बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकिंग प्रणाली का गहराता संकट और बाजार पर दबाव
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, July 16, 2018 06:46 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

बैंकिंग प्रणाली का गहराता संकट और बाजार पर दबाव

बाजार संकेतक
देवांग्शु दत्ता /  March 21, 2018

पिछले पखवाड़े तेलुगू देशम पार्टी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग हो जाने और बैंकिंग घोटाले का दायरा व्यापक होने से घबराए खुदरा निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। तीन लोकसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में हार और केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जैसी खबरों के चलते सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी थोड़ा कमजोर नजर आने लगी। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी कर प्रस्तावों से वैश्विक व्यापार युद्ध छिडऩे की आशंका ने भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को कुछ हद तक डरा दिया है। लिहाजा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और विनिर्माण क्षेत्र के उत्साहजनक आंकड़े आने और खुदरा महंगाई दर में कमी का रुझान आने के बावजूद बाजार सूचकांकों में गिरावट देखी जा रही है।

 
बाजार में लंबे समय तक गिरावट का रुख बरकरार रहने के आसार दिख रहे हैं। तकनीकी संदर्भ में निफ्टी 200 कारोबारी दिवसों के औसत स्तर (डीएमए) से थोड़ा अधिक 10,150-10,200 अंकों के दायरे में रह सकता है। अगर यह 10,000 अंक के स्तर से भी नीचे खिसक जाता है तो फिर गिरावट का रुख लंबे समय तक कायम रह सकता है। खराब कारोबारी धारणा के चलते जनवरी के बेहतर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) को भी तवज्जो नहीं दी गई। जनवरी 2017 की तुलना में जनवरी 2018 में आईआईपी 7.5 फीसदी की तेजी पर रहा है। फरवरी में खुदरा महंगाई में भी बढिय़ा सुधार हुआ है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई फरवरी में 4.44 फीसदी रही जबकि जनवरी में यह 5.07 फीसदी थी। वैसे महंगाई कम होने से अप्रैल में ब्याज दरों के कम होने की संभावना कम हो जाती है। 
 
आगामी वित्त वर्ष में विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले साल अप्रैल-मई में आम चुनाव होंगे। कर्नाटक में विधानसभा के चुनाव जल्द ही होंगे। वहां का सियासी माहौल देश के राजनीतिक परिदृश्य में हो रहे बदलावों से सीधे तौर पर प्रभावित होगा जिसका बाजार की उठापटक पर असर पडऩा तय है। मोटे तौर पर बाजार का रुख चुनावों में भाजपा को मिली हार-जीत पर निर्भर करेगा। भाजपा को मिलने वाली सीटों से ही यह तय होगा कि बाजार तेजी पकड़ता है या उसमें गिरावट आती है। 
 
उत्तर प्रदेश के फूलपुर एवं गोरखपुर और बिहार के अररिया में हुए उपचुनाव के नतीजे भाजपा के खिलाफ गए। खासकर उत्तर प्रदेश में भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले संसदीय क्षेत्रों में मिली हार ने बाजार की धारणा पर गहरी चोट पहुंचाई। अगर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन आगे भी रहता है तो उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए अपना तगड़ा आधार बनाए रख पाना खासा मुश्किल हो जाएगा। पुरानी सहयोगी तेदेपा के अलग हो जाने से भाजपा पर अपना गठबंधन बनाए रख पाने को लेकर आशंकाएं भी जताई जाने लगी हैं। अगर अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिलता है तो सहयोगी दलों की भूमिका अहम हो जाएगी।
 
मार्च में निवेश का पैटर्न भी खासा रोचक रहा है। संस्थागत निवेशकों ने इक्विटी खरीदी हैं लेकिन बाजार गिरा है। यह अपने आप में अनूठी बात है। इस महीने की 16 तारीख तक घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुल 3.3 अरब रुपये के इक्विटी खरीदी थी जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 63.8 अरब रुपये की खरीद की। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने 106 अरब रुपये की बिकवाली भी की है। इन आंकड़ों के गहरे निहितार्थ हो सकते हैं।
 
पहला, खुदरा बिक्री इतनी अधिक रही है कि उसने संस्थागत निवेशकों की खरीदारी को पीछे छोड़ दिया है। मार्च में निफ्टी सूचकांक 2.5 फीसदी गिर गया है जबकि खुदरा निवेशकों के रुझान को बेहतर तरीके से दर्शाने वाला निफ्टी स्मालकैप 250 सूचकांक 3.3 फीसदी गिरा है। पंजाब नैशनल बैंक घोटाले के बारे में नई जानकारियां सामने आने के बाद गारंटी पत्र (एलओयू) पर रोक जैसी तीव्र प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इससे खुदरा निवेशकों की धारणा और अधिक प्रभावित हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और वित्त मंत्रालय के बीच मतभेद होने के संकेतों ने भी घबराहट बढ़ाई है।
 
दूसरा, रुपये में ऋण अदायगी से एफपीआई के दूर होने से बॉन्ड बाजार में और गिरावट की आशंका है। पिछले छह महीनों में तमाम बॉन्ड बाजारों का प्रतिफल बढ़ा है और प्रतिफल वक्र भी स्थिर हो चुका है। बॉन्ड भाव के बढऩे का मतलब है कि ऋण में निवेश करने वालों के लिए पूंजीगत नुकसान होगा। सपाट बॉन्ड वक्र होने से मंदी की भी आशंकाएं पैदा होती हैं। सामान्य तौर पर यह इक्विटी बाजार में गिरावट का प्रमुख संकेतक होता है।
 
बैंकिंग क्षेत्र के गहरे संकट में होने को लेकर कोई संदेह नहीं है और इसका आर्थिक प्रगति पर लंबे समय तक असर पड़ता भी लाजिमी है। वित्तीय क्षेत्र में संकट वैश्विक कारकों के असर से पैदा होने के कई वाकये हुए हैं। वित्तीय संकट हमेशा ही लंबे समय तक आर्थिक विकास को प्रभावित करता है। ऐसे में एलओयू जैसे सशक्त तरीके को बंद करने की कोशिश से निर्यातकों के लिए लागत बढऩी तय है।  बाजार अब भी इस पहलू को नजरअंदाज कर सकता है कि बैंकों में 2.2 लाख करोड़ की अतिरिक्त पूंजी डालने से भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बहीखाता नहीं सुधरेगा। वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा विधेयक के प्रावधान भी असली समस्याओं का समाधान करने की स्थिति में नहीं हैं।
 
पिछले दो वर्षों से खुदरा निवेश बाजार में तेजी का अहम घटक रहा है। इसे परखने का सबसे अच्छा तरीका इक्विटी म्युचुअल फंड परिसंपत्तियों में प्रवाह है। लेकिन इसका बड़ा हिस्सा संस्थागत निवेश योजनाओं में लगा है। नया वित्त वर्ष शुरू होने और अप्रैल के आंकड़े आने के बाद बाजार धारणा में संभावित बदलाव का पता चल पाएगा।
Keyword: nirav modi, bank, loan, debt, PNB, fraud,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या एस्सार मामले की हो गहनता से जांच?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.