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आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का आईपीओ : महंगा है मूल्यांकन

श्रीपद एस ऑटे / मुंबई March 20, 2018

भले ही शेयर बाजार अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर के नजदीक हैं, लेकिन फिर भी कई निवेशक आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (आई-सेक) में निवेश करना पसंद करेंगे। यह कंपनी ब्रोकरेज राजस्व और एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों के आधार पर वर्ष 2014 से भारत की सबसे बड़ी इक्विटी ब्रोकर है। प्रख्यात प्रौद्योगिकी-आधारित प्रतिभूति सेवा प्रदाता आई-सेक अपनी प्रवर्तक आईसीआईसीआई बैंक द्वारा 40 अरब रुपये की बिक्री पेशकश के साथ प्राथमिक बाजार में आ रही है। हालांकि जहां आईपीओ का मूल्यांकन महंगा है और इस वजह से निवेशकों को तुरंत लाभ की कम गुंजाइश है, वहीं आई-सेक के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार रुझान के बीच अधिक सह-संबंध भी एक संभावित जोखिम है।
 
मजबूत व्यवसाय
 
आई-सेक प्रभिूतियों में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की दिग्गज कंपनियों में शामिल है। कंपनी के प्रतिभूति प्लेटफॉर्म की शुरुआत वर्ष 2000 के शुरू में की गई थी। यह प्रतिभूति ब्रोकिंग, वित्तीय उत्पाद वितरण आदि जैसी सेवाएं मुहैया कराती है। इसकी प्रॉपराइटरी इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्रणाली उसे आसान और लागत किफायती तरीके से ग्राहक जरूरतों को तुरंत पूरा करने में सक्षम बनाती है। इसी तरह, उसका ओपन-सोर्स डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म भी एक अन्य मददगार पेशकश है। ऐक्सिस कैपिटल ने एक रिपोर्ट में कहा है, 'आई-सेक ने प्लग-एंड-प्ले आर्कीटेक्चर का इस्तेमाल कर अपना इलेक्ट्रॉनिक ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म तैयार किया है जिससे कि वह इसे अपनी आंतरिक प्रणालियों और बाहरी पक्षों (जिनके उत्पाद वह वितरित करती है) के साथ आसानी से समेकित कर सकें।' इस सब से ब्रोकरेज कंपनी को लागत को नियंत्रित बनाए रखने और ऊंचा मार्जिन कमाने में मदद मिली है। 
 
मौजूदा समय में अपने ई-ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म आईसीआईसीआईडायरेक्ट डॉटकॉम के तहत आई-सेक की सेवाओं से 46 लाख ग्राहक और 39 लाख परिचालन खाते (31 दिसंबर 2017 तक) जुड़े हुए हैं। कंपनी को कुछ राजस्व बैंकिंग गतिविधियों से भी प्राप्त होता है। मजबूत टै्रक-रिकॉर्ड और परिदृश्य को देखते हुए ज्यादातर विश्लेषक इस निर्गम पर सकारात्मक हैं। नारनोलिया सिक्योरिटीज की शोध प्रमुख विनीता शर्मा का कहना है, 'हमने इक्विटी भागीदारी में संभावित सुधार, इक्विटी बाजार के प्रति लोगों की बचत आदतों में बदलाव, तेजी से बढ़ रही वितरण आय, ब्रोकरेज आय में संभावित वृद्घि आदि को ध्यान में रखते हुए इस आईपीओ पर 'खरीदारी' का नजरिया अपनाया है।' 
 
मजबूत वित्तीय स्थिति
 
आई-सेक ने वित्त वर्ष 2013-वित्त वर्ष 2017 के दौरान अपनी कुल आय में 18.8 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर दर्ज की। ब्रोकरेज आय का उसके राजस्व में मौजूदा समय में 55 प्रतिशत से अधिक का योगदान है और यह वित्त वर्ष 2017 में 17.6 फीसदी और वित्त वर्ष 2018 के 9 महीनों में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत तक बढ़ी। विश्लेषकों का मानना है कि ब्रोकरेज उद्योग का राजस्व 15-18 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर से बढने का अनुमान है, लेकिन बेहद सस्ते ब्रोकरेज से प्रतिस्पर्धा में तेजी एक बड़ी चुनौती होगी। आई-सेक का शुद्घ लाभ भी वित्त वर्ष 2013-17 के दौरान 45 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर से बढ़ा। वहीं वित्त वर्ष 2018 में भी मुनाफे में अच्छी तेजी दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों में 20 फीसदी से अधिक का शुद्घ मुनाफा मार्जिन (वित्त वर्ष 2018 के 9 महीनों के दौरान 29.6 फीसदी) भी अच्छा है और यह एडलवाइस फाइनैंशियल सर्विसेज, आईआईएफएल होल्डिंग्स, मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज, जेएम फाइनैंशियल जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक है। इससे आई-सेक को शानदार पूंजी पर प्रतिफल (आरओई) दर्ज करने में मदद मिली। वित्त वर्ष 2017 में कंपनी ने 69.2 फीसदी का आरओई दर्ज किया जो प्रतिस्पर्धियों द्वारा दर्ज किए गए 14-20 फीसदी के प्रतिफल की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि कई प्रतिस्पर्धियों ने अन्य क्षेत्रों (आवास वित्त में उपस्थिति) भी किस्मत आजमाई है, इसलिए उन पर बाजार रुझान का कम प्रभाव पडऩे की आशंका है। हालांकि कंपनी के लिए अपनी आय और बाजारों से अधिक सह-संबद्घता एक जोखिम है, लेकिन म्युचुअल फंडों, बीमा, पेंशन योजनाओं आदि से बढ़ती वितरण आय उसे कुछ हद तक राहत प्रदान करती है। आई-सेक की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी शिल्पा कुमार कहती हैं, 'आई-सेक की गैर-ब्रोकरेज आय का योगदान वित्त वर्ष 2013 के 30 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2017 में 37 फीसदी पर पहुंच गया और वितरण सेगमेंट में उत्पाद विविधता का प्रयास बरकरार रहेगा।'
 
अनुकूल उद्योग परिदृश्य
 
भारत में बदलता निवेश रुझान भी शुभ संकेत है। कुमार कहती हैं, 'वित्तीय सेवाएं पारंपरिक परिसंपत्तियों से वित्तीय संपत्तियों में तब्दील हो रही हैं। चूंकि बैंक जमाओं पर ब्याज दर में अब कमी आई है और इसलिए लोग इक्विटी और म्युचुअल फंडों की ओर रुख कर रहे हैं।'
 
महंगा मूल्यांकन, पर प्रतिस्पर्धियों के समान
 
हालांकि आई-सेक के व्यवसाय में दक्षता और नेतृत्व को लेकर कुछ शंकाएं हैं, लेकिन इस आईपीओ का मूल्यांकन मौजूदा समय में कंपनी की वित्त वर्ष 2017 की आय के 49 गुना और वित्त वर्ष 2018 की आय के 31 गुना पर है। 
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