बिजनेस स्टैंडर्ड - बाजार में उपलब्ध मछली में हानिकारक रसायन तो नहीं
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बाजार में उपलब्ध मछली में हानिकारक रसायन तो नहीं

खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  March 19, 2018

क्या आपने कभी सोचा है कि बाजार में उपलब्ध मछलियां कितनी सुरक्षित हैं? यह सवाल खासकर दूरदराज के मछली उत्पादक केंद्रों से बर्फ भरे डिब्बों/बर्तनों में आने वाली मछलियों के संदर्भ में खासी अहमियत रखता है। इन डिब्बों में आने वाली मछलियों में फॉर्मेल्डिहाइड और अमोनिया जैसे हानिकारक रसायन होते हैं। मछली कारोबारी लंबे समय तक मछली में ताजगी बनाए रखने के लिए इन खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। फॉर्मेल्डिहाइड मछली को अधिक समय तक ताजा बनाए रखता है और कृत्रिम रूप में मछलियों का ताजा रंग-रूप बरकरार रखता है, जिससे कारोबारियों को बाजार में लंबे समय तक इन्हें बेचने में मदद मिलती है। अमोनिया बर्फ पिघलने की प्रक्रिया धीमी कर देता है और मछलियों में सडऩ का पता लगने नहीं देता है। इससे मछलियों के गिल का लाल रंग बरकरार रहता है और त्वचा की चमक भी कायम रहती है। इससे खरीदार झांसे में आ जाते हैं और उनके लिए ताजा और खराब मछलियों में विभेद करना मुश्किल हो जाता है। 

 
विश्व स्वास्थ्य संगठन की संस्था इंटरनैशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने फॉर्मेल्डिहाइड को कैंसर का कारण बनने वाले तत्त्व के रूप में वर्गीकृत किया है। यह नाक के पीछे गले के ऊपरी भाग के कैंसर का कारण बन सकता है और इसके साक्ष्य भी मौजूद हैं। खाद्य उत्पादों में इसका इस्तेमाल वर्जित कर दिया गया है। कोच्चि स्थित सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलजी (सीआईएफटी) के वैज्ञानिकों के अनुसार खाद्य पदार्थ में फॉर्मेल्डिहाइड की अधिक मात्रा होने से पेट दर्द, दस्त, गुर्दे संबंधी व्याधियां और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। फॉर्मेल्डिहाइड और इसका संकेद्रित घोल फॉर्मेलिन का इस्तेमाल जीवाणु (बैक्टीरिया) मारने के लिए होता है, साथ ही प्लास्टिक, पेंट और वस्त्र उद्योग में भी इसका इस्तेमाल होता है। 
 
हालांकि अमोनिया उतना खतरनाक नहीं माना जाता है, लेकिन मछली को ज्यादा देर तक ताजा बनाए रखने में इसका इस्तेमाल अनुचित माना गया है। इस बारे में सीआईएफटी के निदेशक सी एन रविशंकर कहते हैं, 'शोध इकाइयों ने अपने अध्ययन में मछलियों के कारोबार, इसके परिवहन और मछली रखने के बर्तनों में अमोनिया की मौजूदगी की पुष्टिï की है।' रविशंकर ने कहा कि इस तरह का अनुचित व्यवहार रोकने के लिए खाद्य गुणवत्ता के लिए काम करने वाली एजेंसियों को हस्तक्षेप करना चाहिए। 
 
इन अशुद्धियों का मौके पर पता लगाने के लिए सीआईएफटी ने पोर्टेबल रैपिड टेस्टिंग किट विकसित किए हैं, जो चंद मिनटों में इनका पता लगा सकते हैं। इस किट को 'सीआईएफटेस्ट किट्स' नाम दिया गया है, जो सस्ता होने के साथ ही इस्तेमाल में भी सरल है। किट में एक विशेष कागज की पट्टïी (पेपर स्ट्राइप), रीएजेंट सॉल्यूशन और एक स्टैंडर्ड कलर चार्ट होते हैं। अशुद्धियों का पता लगाने के लिए सबसे पहले मछली के विभिन्न हिस्से के ऊपर पेपर स्ट्राइप रखा जाता है और इसके बाद रीएजेंट डाला जाता है। इसके बाद एक या दो मिनट बाद रंग में आए बदलाव का मिलान स्टैंडर्ड चार्ट से किया जाता है। प्रत्येक जांच पर इस समय 2 रुपये खर्च होते हैं। हालांकि किट का उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू होने के बाद यह लागत और कम हो जाएगी। कुछ मछली कारोबारी दूसरे हानिकारक तत्वों जैसे सोडियम बेंजोएट का भी इस्तेमाल करते हैं। इससे निपटने के लिए सीआईएफ टी एक डिटेंशन किट विकसित कर रहा है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को मछली एवं मछली उत्पादों की गुणवत्ता जांच की प्रयोगशाला घोषित कर दिया है।  
 
सीआईएफटी प्रयोगशालाओं में तैयार कुछ सीआईटेस्ट का इस्तेमाल लोगों को इसके फायदे बताने और जागरूक बनाने के लिए हो रहा है। ये किट मछलीपालन संबंधित राज्य संगठनों और केरल में कुछ सुपरमार्केट्स को भी दिए गए हैं। दूसरे कई राज्य जैसे त्रिपुरा, गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु ने मछली संरक्षण एवं परिवहन में इन हानिकारक तत्त्वों का इस्तेमाल रोकने के लिए इस किट में रुचि दिखाई है। सीआईएफटी इस तकनीक का पेटेंट नहीं कराना चाहता है। यह संभावित उद्यमियों को इसके व्यावसायिक उत्पादन के लिए लाइसेंस देगा। इसके लिए अभिरुचि आमंत्रित करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी। उत्पादन अधिकार प्राप्त करने के लिए कुछ कंपनियां पहले से ही संस्थान के साथ संपर्क में हैं। 
 
उम्मीद तो यही की जा रही है कि खाद्य निरीक्षक, गुणवत्ता नियामक एवं और यहां तक कि स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वाले लोग भी जल्द ही यह पता लगाने की स्थिति में होंगे कि बाजार में उपलब्ध मछली हानिकारक तत्त्वों से मुक्त है या नहीं। इससे कृत्रिम तरीके से मछलियों को ताजा रूप देने के कारोबारियों के अनुचित तौर-तरीके पर भी अंकुश लगेगा। अच्छी गुणवत्ता, ताजा मछलियां ग्राहकों को उपलब्ध कराने के लिए राज्यों के मछलीपालन केंद्रों और खाद्य विभागों को इस किट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए। 
Keyword: sea food, fish,,
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