बिजनेस स्टैंडर्ड - एफडी पर ही दांव न लगाएं, दूसरी ओर भी नजर घुमाएं
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, July 23, 2018 01:44 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

एफडी पर ही दांव न लगाएं, दूसरी ओर भी नजर घुमाएं

संजय कुमार सिंह /  March 18, 2018

सरकार ने इस बार के आम बजट में वरिष्ठï नागरिकों को बैंकों, डाकघरों और सहकारी बैंकों में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज के मामले में बड़ी राहत दी। उन्हें 50,000 रुपये तक की ब्याज आय पर किसी तरह का कर नहीं देना पड़ेगा। वरिष्ठï नागरिकों को इस छूट का पूरा फायदा उठाना चाहिए, लेकिन यदि उन्हें महंगाई को मात देनी है तो पोर्टफोलियो में विविधता की जरूरत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 
 
तय करें डेट और इक्विटी का अनुपात
 
बुजुर्ग निवेशक को पहले तय करना चाहिए कि सेवानिवृत्ति की कितनी राशि डेट में लगानी है और कितनी इक्विटी में। इसके लिए '100 माइनस एज के नियम' का इस्तेमाल करना चाहिए। आपकी जो भी उम्र हो, उसे 100 में से घटा दीजिए। जो भी आंकड़ा आता है, वही आपका इक्विटी प्रतिशत होगा। अगर आपकी उम्र 60 वर्ष है तो 100 में से घटाने पर 40 बचेंगे यानी आपको 40 प्रतिशत रकम इक्विटी में और बाकी 60 प्रतिशत डेट में लगानी चाहिए। आप कुछ और बातों का ध्यार रखते हुए इस अनुपात में मामूली बदलाव भी कर सकते हैं।
 
पहली बात तो यह है कि बुजुर्ग को अपने खर्च पूरे करने के लिए हर महीने कितनी नकदी की जरूरत होगी। यह रकम उनकी स्थिर आय राशि से इतर तैयार होनी चाहिए। दूसरी बात, बजुर्ग में जोखिम लेने की कितनी इच्छा है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन कहते हैं, 'यदि कोई वरिष्ठï नागरिक बाजार में उतार-चढ़ाव का असर अपनी पूंजी पर नहीं पडऩे देना चाहता है तो उसे केवल 15 प्रतिशत तक रकम इक्विटी में लगानी चाहिए। अगर उसे थोड़ी अस्थिरता और पूंजी में मामूली कमी से दिक्कत नहीं है तो वह 30 प्रतिशत तक रकम इक्विटी में और 70 प्रतिशत रकम डेट में लगा सकता है। जिन लोगों के पास अपनी जरूरतों से ज्यादा रकम है, वे डेट और इक्विटी में 50-50 प्रतिशत रकम लगा सकते हैं।' बुजुर्ग जो रकम अपने बच्चों को देने की सोच रहे हैं, उसे वे इक्विटी में लगा सकते हैं।
 
इसके अलावा कर पर भी ध्यान देने की जरूरत है। बुजुर्गों को अपनी जरूरत से बहुत अधिक रकम अर्जित नहीं करनी चाहिए ताकि उन्हें कर के झंझट में न फंसना पड़े। उदाहरण के लिए धनाढ्य बुजुर्गों को 10 लाख रुपये से ज्यादा रकम हासिल करने से परहेज करना चाहिए वरना वे 20 से 30 प्रतिशत आयकर के दायरे में आ जाएंगे। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के अलावा सावधि जमा (एफडी), लिक्विड फंड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड जैसी योजनाओं के जरिये कुछ रकम बचानी चाहिए, जो स्वास्थ्य संबंधी समस्या पैदा होने पर काम आएगी। जो लोग हाल में सेवानिवृत हुए हों उन्हें अधिक उम्र के निवेशकों की तुलना में इक्विटी में अधिक निवेश करना चाहिए। 
 
सही डेट योजनाएं चुनें
 
बजट के बाद बुजुर्गों को एफडी, वरिष्ठï नागरिक बचत योजना (एससीएसएस), प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) का इस्तेमाल करना चाहिए। जो अधिक आयकर के दायरे में आते हैं, उनके लिए कर मुक्त बॉन्ड और डेट म्युचुअल फंड अधिक उपयुक्त विकल्प हैं। भारतीय स्टेट बैंक इस समय एक साल की एफडी पर बुजुर्गों को 6.75 प्रतिशत ब्याज दे रहा है और आरबीएल जैसे बैंक 7.6 प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं। अगर धारा 80टीटीबी के तहत निर्धारित कर छूट सीमा का पूरा लाभ उठाना है तो लगभग 7.40 लाख रुपये का निवेश किया जा रहता है। सही एफडी का चयन कैसे किया जाए, इसके बारे में एडलवाइस पर्सनल वेल्थ एडवाइजरी के प्रमुख राहुल जैन का कहना है, 'सभी बैंकों में अपनी एफडी कराएं। ऐसे बैंक चुनें, जिनकी बुनियाद मजबूत हो। ज्यादा ब्याज पाने के फेर में किसी भी बैंक के पीछे आंख मूंदकर न भागें।'
 
एक अन्य योजना एससीएसएस है। बुजुर्ग इसे भी अपना सकते हैं। इसमें 15 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। यदि पत्नी की आय का स्रोत अलग है तो वह भी 15 लाख रुपये अपने नाम से निवेश कर सकती है। इस योजना के तहत पांच साल तक 8.3 प्रतिशत सालाना की ब्याज दर पर हर तिमाही कुछ रकम हासिल होती है। इस योजना में किए गए निवेश पर धारा 80 सी के तहत कर छूट मिलती है। लेकिन इसमें जो भी ब्याज आय होती है, उस पर कर लगता है। भारतीय जीवन बीमा निगम की प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) बुजुर्गों के लिए तीसरा विकल्प होनी चाहिए। इस बार के बजट में वित्त मंत्री ने इसमें निवेश की सीमा दोगुनी कर दी और अब कोई भी व्यक्ति सालाना 15 लाख रुपये इसमें लगा सकता है। यह योजना 10 वर्षों तक 8 प्रतिशत सालाना की दर से प्रतिफल देती है। एससीएसएस और पीएमवीवीवाई दोनों में सबसे आकर्षक बात यह है कि पूरी अवधि तक एक ही दर से प्रतिफल मिलता रहता है। जो बुजुर्ग ऊंचे आयकर दायरे में आते हैं, उन्हें द्वितीयक बाजार से कर-मुक्त बॉन्डों की खरीदारी पर भी विचार करना चाहिए क्योंकि ये बॉन्ड इस समय 6.2 प्रतिशत के प्रतिफल पर मौजूद हैं। राइट हॉराइजंस के मुख्य कार्याधिकारी अनिल रीगो कहते हैं, 'जो लोग ऊंचे आयकर दायरे में आते हैं, वे डेट म्युचुअल फंडों पर भी विचार कर सकते हैं क्योंकि उनमें इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत कर लगता है, जो फायदेमंद होता है।' जिन्हें लगातार नकदी की जरूरत नहीं है, वे सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) में रकम लगा सकते हैं क्योंकि वहां 7.6 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है और उस पर आयकर भी नहीं लगता।
 
इक्विटी पर दें ध्यान
 
निवेश का कुछ हिस्सा तो इक्विटी में जाना ही चाहिए। इससे सुनिश्चित होता है कि आपकी कुल संपत्ति का एक हिस्सा महंगाई से निपट सकेगा। बुजुर्ग निवेशक लार्ज-कैप एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, लार्ज-कैप ऐक्टिव फंड, मल्टी-कैप फंड और डायनैमिक ऐसेट अलोकेशन फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर बड़ी रकम लगानी है तो मिड-कैप फंड और अंतरराष्ट्रीय फंडों में भी थोड़ा बहुत निवेश किया जा सकता है। जब भी बाजार चढ़ रहा हो तो इक्विटी बेच दें और अपनी रकम डेट में लगा दें। 
Keyword: budget, fund,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कंपनियों के बेहतर नतीजे अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.