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एलओयू पर पाबंदी से भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं पर असर

बीएस संवाददाता / मुंबई/चेन्नई/कोलकाता March 14, 2018

लेटर ऑफ कंफर्ट (एलओसी) और लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी करने पर भारतीय रिजर्व बैंक की रोक से भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं का कारोबार प्रभावित होगा, खास तौर से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं का। यह पीएसयू बैंकों की विदेशी शाखाओं को तर्कसंगत बनाने का काम तेज कर देगा। इसके अलावा कई छोटे व मझोले उद्यमों को भी इस पाबंदी का सामना करना होगा। यह कहना है उद्योग के अधिकारियों का।

 

कारोबारी वित्त पोषण (विशेष रूप से अल्पावधि का कर्ज, जिसमें एलओयू, एलओसी, लेटर ऑफ क्रेडिट, गारंटी आदि शामिल हैं) भारतीय सरकारी बैंकों के विदेशी कारोबार का अहम हिस्सा है। कारोबारी वित्त पोषण का कारोबार अब धीरे-धीरे सिकुड़ जाएगा।

इसके अतिरिक्त पीएसयू बैंक की पूंजी की जरूरत उनकी तरफ से दिए गए कारोबारी वित्त पोषण के हिसाब से बढ़ सकती है, जो उन क्लाइंटों के लिए जोखिम भारांक को आकर्षित करता है, जिन्हें अब एलओयू व एलओसी से बैंक गारंटी व लेटर ऑफ क्रेडिट की ओर बढऩा होगा।

एलओसी व एलओयू बहुत ज्यादा सख्त ढांचा वाले उत्पाद नहीं हैं और इसके लिए जांच परख (ड््यू डिलिजेंस) भी सख्त नहीं है। इसके बजाय बैंक गारंटी व लेटर ऑफ क्रेडिट को समान रूप से स्वीकार किया जाता है और ये मानकीकृत उत्पाद हैं और इसके लिए सख्त जांच होती है और जमानत व मार्जिन की दरकार होती है। बैंकों पर शुद्ध असर यह है कि इन्हें उनके लिए और पूंजी अलग रखनी होगी।

इस पाबंदी से भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं के व्यावहारिक बनाने की प्रक्रिया जल्दी आगे बढ़ानी होगी। सरकार पहले ही हॉन्ग-कॉन्ग जैसे इलाके में पांच-छह सरकारी बैंकों की शाखाओं की जरूरत पर सवाल उठा चुकी है। यह जानकारी बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।

इस बीच बैंकरों ने कहा कि आरबीआई के हालिया कदम से बड़ी कंपनियों के बजाय एमएसएमई को परेशानी होगी। सीआईआई की अध्यक्ष शोभना कामिनैनी ने कहा, कारोबारी वित्त पोषण के  लिए एलओयू व एलओसी पर रोक लगाने के आरबीआई के फैसले से अल्पावधि में खरीदारों के क्रेडिट मार्केट पर अवरोधात्मक असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा, इन दो पत्रों के जरिए कारोबार करने वाले कारोबारियों को अब अनिवार्य रूप से अपने लेनदेन लेटर ऑफ क्रेडिट व बैंक गारंटी के जरिए काम करना होगा। इसके परिणामस्वरूप उधारी की लागत बढ़ जाएगी, खास तौर से छोटे व मझोले उद्यमों के लिए।

सीआईआई का मानना है कि आरबीआई को इसके बजाय एलओयू व एलओसी पर नियमन को सख्त बनाना चाहिए था या फिर पूरी तरह बंद करने के बजाय नियामक को इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की घोषणा करनी चाहिए थी। हालांकि सीआईआई ने आरबीआई के उन इरादों को सही ठहराया, जहां केंद्रीय बैंक बैंकिंग व्यवस्था को साफ-सुथरा करने के लिए कदम उठा रहा है।

स्टील यूजर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष निकुंज तुराखिया ने कहा, एलओयू या एलओसी को अचानक बंद करना आयात के लिए हानिकारक है। इससे अचानक फंड का संकट होगा और कंपनियोंं को इसका असर झेलना होगा।

स्टील की बड़ी कंपनियों में से ज्यादातर ने हालांकि कहा कि इसका असर उनपर नहीं पड़ेगा।
इलेक्ट्रॉनिक, टिकाऊ उपभोक्ता व पेंट निर्माताओं ने कहा कि वे लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के बकाए का भुगतान करते थे। एरो ग्रुप के प्रबंध निदेशक हरकीरत सिंह ने कहा, उनकी कंपनी या यह क्षेत्र इससे प्रभावित नहीं होगा क्योंकि वे मूल रूप से लेटर ऑफ क्रेडिट या उधारी का इस्तेमाल करते हैं।

एक बड़ी वाहन कंपनी का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी ने कहा कि उद्योग विभिन्न तरह के पत्रों मसलन क्रेडिट, लेटर ऑफ क्रेडिट व सीधे भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। लंबी अवधि के लिए उनकी समयसारणी तय होती है। ऐसे में इन कंपनियों पर सीमित असर होगा।
Keyword: एलओसी, एलओयू, भारतीय रिजर्व बैंक, छोटे व मझोले उद्यम,
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