बिजनेस स्टैंडर्ड - असंतोष का समाधान!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, July 22, 2018 06:24 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

असंतोष का समाधान!

संपादकीय /  March 13, 2018

महाराष्ट्र सरकार 180 किलोमीटर लंबा सफर तय कर नाशिक से मुंबई पहुंचने वाले हजारों किसानों के विरोध प्रदर्शन को शांत करने में कामयाब रही है। राज्य सरकार को किसानों की अधिकांश मांगों के आगे झुकना पड़ा है लेकिन इन वादों को पूरा कर पाना आसान नहीं होगा। केवल कुछ मांगें ही लागू करने लायक लग रही हैं और उसके लिए भी सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा। अन्य मांगें तो काफी जटिल हैं और उन्हें पूरा करने में कई तरह की अड़चनें आ सकती हैं। 

 

आदिवासी किसानों को सामुदायिक या वन भूमि का मालिकाना हक देना, फसलें खराब होने पर मिलने वाला मुआवजा बढ़ाना और किसानों की सहमति के बगैर ढांचागत परियोजनाओं के लिए कृषि-भूमि का अधिग्रहण नहीं करना जैसी मांगें आसानी से पूरी की जा सकती हैं। लेकिन सभी कृषि ऋणों की बिना शर्त माफी और एम एस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने जैसी दो अहम मांगों को पूरा कर पाना खासा मुश्किल हो सकता है। 

भले ही महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल घोषित किसान कर्ज माफी योजना का दायरा वर्ष 2001 तक के लिए बढ़ाने पर सहमत हो गई है लेकिन इस कदम से उसके खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पडऩे के अलावा प्रक्रियागत अवरोध भी खड़े हो सकते हैं। राज्य सरकार ने कर्ज माफी योजना के तहत 340 अरब रुपये का पैकेज घोषित किया था लेकिन अभी तक केवल 138 करोड़ रुपये के कर्ज ही माफ हुए हैं। किसी भी हाल में कर्ज माफी बुनियादी तौर पर एक अविवेकपूर्ण विचार है और उसके कई अनचाहे नतीजे होते हैं। 

कर्ज अदायगी की संस्कृति पर कुठाराघात करने के अलावा कर्ज माफी योजनाएं पहले से ही बदहाल सहकारी संस्थाओं की वित्तीय सेहत भी खराब करती हैं। इन योजनाओं के चलते बैंक किसानों को कर्ज देने से भी परहेज करने लगते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि किसान साहूकारों के चंगुल में फंसने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

फसलों के लिए अधिक एमएसपी के मुद्दे पर विचार के लिए एक समिति के गठन पर सहमति जताकर राज्य सरकार ने संभवत: अधिक समय लेने की कोशिश की है। इस बारे में अंतिम फैसला निश्चित तौर पर केंद्र की पहल से ही तय होगा। स्वामीनाथन आयोग ने एमएसपी के लिए विस्तृत उत्पादन लागत (सी2) फॉर्मूला अपनाने का सुझाव दिया था जिसमें फसल उत्पादन से जुड़ी सभी तरह की लागत एवं श्रम मूल्य के अलावा खेत का किराया मूल्य भी शामिल किया जाता है। लेकिन सरकार ने इस पर अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि वह एमएसपी तय करते समय केवल भुगतान के तौर पर लगी लागत (ए2) के साथ खेती में लगे परिवार के श्रम मूल्य (एफएल) को ही शामिल करेगी। 

वैसे सी2 फॉर्मूला लागू कर पाने के लिए जरूरी आंकड़े जुटा पाना खासा मुश्किल है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने के तरीके बता रहा नीति आयोग भी ए2 प्लस एफएल फॉर्मूले का सहारा ले रहा है। लेकिन इससे किसानों के खुश होने की संभावना कम है।

किसानों के इस प्रदर्शन के नतीजे जो भी रहें, यह सच है कि कृषि क्षेत्र का असंतोष तमाम राज्यों तक फैला है और इस पर बहुत तेजी से ध्यान देने की जरूरत है। खेती से मुनाफा कमाने की क्षमता में आई गिरावट इसकी मूल वजह है। महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र बेहद खराब दौर से गुजर रहा है। पिछले चार में से तीन साल इसकी कृषि विकास दर नकारात्मक रही है। 

ऐसे में जरूरत यह है कि घाटा उठाने वाली फसलों की खेती को पशुपालन और मत्स्यपालन जैसे सहयोगी कृषि कार्यों के साथ जोड़ दिया जाए। इससे भी अहम होगा कि किसानों की आय के पूरक के तौर पर गैर-कृषि ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार एवं आय के अतिरिक्त अवसर पैदा किए जाएं। अगर ऐसा नहीं होता है तो अन्य राज्यों में भी महाराष्ट्र की तरह किसानों के प्रदर्शन होने तय हैं।
Keyword: महाराष्ट्र, सरकार, राज्य सरकार, किसान,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या ट्रांसपोर्टरों का हड़ताल पर जाना है वाजिब?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.