बिजनेस स्टैंडर्ड - योगी सरकार की सख्ती पड़ सकती है भारी?
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योगी सरकार की सख्ती पड़ सकती है भारी?

साई मनीष /  03 11, 2018

शासन-प्रशासन

अपराधियों के खात्मे, उन्हें जेलों में भरने और उनमें सुधार लाने के पूर्व में हुए उपाय उत्तर प्रदेश को सुरक्षित बनाने में बेअसर साबित हुए हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड योगी सरकार की सख्ती पड़ सकती है भारी?बात 3 फरवरी 2018 की है। इस दिन उत्तर प्रदेश में शामली जिले के झिंजिना गांव में एक मंदिर के पास स्थानीय पुलिस कर्मी खड़े थे, जो रंगदारी वसूलने के लिए आ रहे किसी शख्स का इंतजार कर रहे थे। लेकिन उन्हें इस बात का इल्म भी नहीं था कि उनके हाथ क्या आने वाला है। पुलिस को शिकायत मिली थी कि किसी ने स्थानीय पंचायत के एक सदस्य से उसके परिजनों की जान बख्शने के बदले 1 करोड़ रुपये मांगे हैं। जब मोटरसाइकल पर सवार दो लोग वसूली करने के लिए पहले से तय जगह पर पहुंचे तो पुलिस ने उनकी मुठभेड़ हो गई। देर तक गोलीबारी होती रही। जब गोलियों की आवाज बंद हुई तो पुलिस ने तलाशी शुरू कर दी। वहां गोलियों से जख्मी अकबर उर्फ मूसा पड़ा मिला। 

अकबर पड़ोस के गांव का रहने वाला था। उसके पास से कुछ नकदी, पिस्तौल और जिंदा कारतूस मिले। जख्मी अकबर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। जब अकबर का कच्चा चिट्ठा खोला गया तो पता चला कि पुलिस को 13 से भी अधिक मामलों में उसकी तलाश थी। उस पर डकैती, आपराधिक षड्यंत्र रचने, खतरनाक हथियार रखने जैसे कई संगीन आरोप थे। शामली के गांवों में अकबर का बहुत आतंक था, इसलिए उसके मरने की खबर सुनकर लोगों ने राहत की सांस ली। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता संभालने के बाद अकबर समेत 32 अपराधी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए हैं। 

मुठभेड़ का सिलसिला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायकों को बताया है कि उनके सत्ता संभालने के बाद से राज्य में 1,000 से अधिक मुठभेड़ हो चुकी हैं। सिलसिला अभी चल ही रहा है। अपराधियों के खात्मे के साथ 2,500 से अधिक खूंखार अपराधी पकड़े गए हैं और 1,700 से अधिक अपराधियों के सिर पर पुलिस ने इनाम भी रखे हैं।

उत्तर प्रदेश के लोग अक्सर दहशत में जीते हैं। लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों में भी माहौल खौफनाक है क्योंकि वहां महिलाओं और लड़कियों के यौन उत्पीडऩ, छेड़छाड़ की घटनाएं आम बात हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (जहां अकबर मारा गया था) रंगदारी, गोलीबारी और बलात्कार जैसे अपराधों के लिए कुख्यात रहा है। योगी सरकार को विरासत में मिले राज्य और जेलों पर नजर डालें तो जाहिर हो जाएगा कि सरकार ने अपराधियों के सफाये का मन क्यों बना लिया है। उत्तर प्रदेश में रिपोर्ट दर्ज करने में पुलिस की आनकानी से अपराधियों का लेखा-जोखा रखना कठिन होता है, वहां अपराध और जेलों की स्थिति और भी चौंकाने वाली है।

अपहरण के मामले

2008 से 2016 के बीच राज्य में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान अपहरण के मामले 193 प्रतिशत बढ़ गए थे, जो राष्टï्रीय औसत से अधिक थे। मायावती के शासनकाल में अपहरण 64 प्रतिशत और लूटपाट 51 प्रतिशत बढ़ी थी। हत्या के मामले भी उस दौरान राष्टï्रीय औसत से अधिक थे। अखिलेश के कार्यकाल के दौरान राज्य की महिलाओं की जान सांसत में रही। 2012 से 2016 के दौरान राज्य में बलात्कार की घटनाओं में 145 प्रतिशत तक तेजी आ गई। सामूहिक बलात्कार, जिसे गृह मंत्रालय अब अलग अपराध मानता है, की घटनाएं 19 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं।  महिलाओं के शीलभंग के प्रयासों में तीन गुना से अधिक तेजी आई और यौन उत्पीडऩ की घटनाएं भी दोगुनी हो गईं। इस बीच अखिलेश सरकार के कार्यकाल में अपहरण के मामलों में 79 प्रतिशत से अधिक इजाफा हुआ। बच्चों के खिलाफ अपराध में भी राज्य पीछे नहीं रहा। 

दलितों के साथ अपराध

राज्य में दलितों के साथ अपराध के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए। देश में दलितों के साथ अपराध के हर चार मामलों में से एक उत्तर प्रदेश का ही था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा अपराधिक मामले दर्ज किए और इन्हीं इलाकों में पुलिस ने सबसे ज्यादा मुठभेड़ को अंजाम दिया। देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में आपराधिक मामलों की दर भले ही ज्यादा है लेकिन अतीत में उत्तर प्रदेश के अपराधियों पर कानून व्यवस्था का कोई असर नहीं दिखा है। पिछली सरकारें अपराधियों को बचाती थीं, जिससे जेल में बंद होने का डर उन्हें नहीं था।

गृह मंत्रालय के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2008 से 2015 के बीच उत्तर प्रदेश में जेल जाने वाले हत्या के दोषियों की तादाद 120 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि उसी दौरान देश भर में यह आंकड़ा केवल 15 प्रतिशत बढ़ा। बहुत अधिक हत्यारे इस दौरान जेल की सलाखों के पीछे गए फिर भी राज्य में हत्या के प्रयासों में 21 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई। जेल का डर भी हत्या के मामलों पर काबू नहीं कर सका और बाद की सरकार तो बलात्कार जैसे घृणित अपराध भी नहीं रोक सकी। राज्य की जेलों में बलात्कार की सजा पाने वालों की संख्या एक तिहाई बढ़ गई, लेकिन बलात्कार के मामले भी 145 प्रतिशत बढ़ गए। महिलाओं के यौन उत्पीडऩ के मामले भी उस दौरान तीन अंकों में बढ़ गए। 

जेल का डर नहीं

अपराध की स्थिति गंभीर इसलिए भी हो रही है क्योंकि नए अपराधियों को जेल का डर नहीं सताता और जरायमपेशा पर उसका असर नहीं होता। जेल में बंद लगभग 7 प्रतिशत अपराधी एक से अधिक जेल गए हैं। देश भर में अपराधी दोबारा अपराध करने से कतरा रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश उलटी चाल चल रहा है।

जेलों के भीतर भी अपरधियों के सुधरने की गुंजाइश नजर नहीं आती। उत्तर प्रदेश में जेल तोड़कर भागने की घटनाएं सबसे ज्यादा हुई हैं और फरार अपराधी मुश्किल से ही दोबारा पकड़े गए हैं। इसकी वजह यह है कि राज्य में बंदियों को जेल में सुधरने की सुविधाएं ही नहीं मिलतीं। देश भर में सबसे ज्यादा कैदी उत्तर प्रदेश की जेलों में ही हैं, लेकिन वहां सबसे कम कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलता है। राज्य की जेलों में 88,000 से अधिक अपराधी और विचाराधीन कैदी हैं, लेकिन उनमें से 1 प्रतिशत से भी कम को अपराध की दुनिया से दूर करने वाला व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

व्यावसायिक प्रशिक्षण पाने वाले कैदी जिस उद्यम से जुड़े हैं, उसमें उत्पादन बहुत कम होता है। 2015 में राज्य के कैदियों ने करीब 15 करोड़ रुपये तक का सामान तैयार किया जिसका प्रति व्यक्ति उत्पादन मूल्य करीब 1,700 रुपये है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों की जेलों में कैदियों की संख्या उत्तर प्रदेश से बहुत कम है, लेकिन वहां कैदियों ने क्रमश: 23 करोड़ और 48 करोड़ रुपये का सामान तैयार किया।

कारोबारी माहौल पर असर

अपराध के इस दुष्चक्र का असर प्रदेश के कारोबारी माहौल पर भी दिखता है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2012 और 2015 के बीच राज्य में सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 39 प्रतिशत की कमी आई।  राज्य में निवेश की गई पूंजी में बढ़ोतरी हुई, लेकिन उस दौरान राज्य में उत्पादक पूंजी में 12 प्रतिशत की गिरावट आई। अपराधों में कमी किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और निवासियों पर कितना असर डालती है, इसका पता फिलीपींस से चलता है, जहां के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में मुख्य अतिथियों में शामिल थे। वहां के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जुलाई, 2016 में दुतेर्ते के सत्ता में आने के बाद से लगभग रोज ही अपराधियों की हत्या और गिरफ्तारी हो रही है। फिलीपींस से मिली खबरें बताती हैं कि 2016 के बाद से वहां अपराध में 22 फीसदी कमी देखी गई। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुमान के मुताबिक दुतेर्ते के सत्ता में आने के बाद से 3,000 से ज्यादा अपराधी मारे गए हैं, संदिग्ध नशाखोर भी शामिल हैं। 

विश्व बैंक ने अनुमान लगाया है, '2017 की पहली छमाही में फिलीपींस में इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और वियतनाम के मुकाबले ज्यादा तेज वृद्धि हुई, लेकिन चीन से धीमी रही। जुलाई, 2016 में नई सरकार के काम संभालने के कुछ महीने के भीतर ही मजबूत वृद्धि देखी गई, जबकि 2017 की पहली छमाही में अर्थव्यवस्था की शुरुआत धीमी थी।'

सख्त रवैया

उत्तर प्रदेश की आबादी, भौगोलिक विशेषताएं और अपराध की स्थिति फिलीपींस से अलग हो सकती है, लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि राज्य में अपराध कम हुए तो कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। निवेशक कानून-व्यवस्था पर बहत नजर रखते हैं और हाल में निवेशक सम्मेलन में 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी लगाने का वायदा करने वालों के लिए कानून-व्यवस्था अहम होगी। योगी आदित्यनाथ ने सख्त रवैया अपनाया है। राज्य के कुछ हिस्सों को वहां बाशिंदों के लिए नर्क बना चुके अपराधियों से प्रदेश को अस्थायी राहत मिल सकती है। लेकिन उनकी सरकार को सुनिश्चित करना पड़ेगा कि सख्त नीति आगे जाकर उलटी न पड़ पाए।
Keyword: उत्तर प्रदेश, शामली, बसपा, समाजवादी पार्टी, सपा,
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