बिजनेस स्टैंडर्ड - 'वर्ष 2018 अधिक उतार-चढ़ाव वाला वर्ष होगा'
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'वर्ष 2018 अधिक उतार-चढ़ाव वाला वर्ष होगा'

पुनीत वाधवा /  March 11, 2018

एडलवाइस सिक्योरिटीज के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्याधिकारी विकास खेमानी ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि कई बड़ी समस्याएं बरकरार हैं, लेकिन छोटी समस्याओं में सुधार आना शुरू हो गया है जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। उनका कहना है कि पिछले साल के मजबूत प्रतिफल के बाद निवेशकों को चालू वर्ष में उम्मीदें कम रखनी चाहिए। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 

क्या आप मानते हैं कि बाजार समय-आधारित गिरावट से जूझ रहा है?
उस पृष्ठïभूमि पर विचार करना जरूरी है जिसके साथ चालू वर्ष 2018 की शुरुआत हुई। कई वृहद समस्याएं हैं, लेकिन सूक्ष्म समस्याओं में सुधार आना शुरू हो गया है। यह निवेशकों के लिए बेहद पेचीदा स्थिति है। वर्ष 2017 कई दशकों में कम उतार-चढ़ाव वाला वर्ष था। वर्ष 2018 अधिक उतार-चढ़ाव वाला होगा। वर्ष 2017 में लगभग 27 प्रतिशत का प्रतिफल देने के बाद बाजार स्थिर दिख सकते हैं। हालांकि वर्ष 2018 में आपको लगभग 18 फीसदी प्रतिफल के साथ संतोष कर लेना चाहिए।

प्रमुख जोखिम क्या हैं?
अगले 12 महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा, हम अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल तीन बार दर वृद्घि की उम्मीद कर सकते हैं। भारत में मुद्रास्फीति भी बढ़ रही है। ये सभी कारक समस्याएं पैदा कर रहे हैं। यदि मॉनसून भी निराश करता है तो बाजार को एक और समस्या का सामना करना होगा। हालांकि सकारात्मक बात यह है कि नोटबंदी और जीएसटी से पैदा हुआ दबाव दूर हो चुका है। उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र और इन्फ्रास्ट्रक्चर/निवेश के संदर्भ में मांग में तेजी आनी शुरू हो गई है। सरकार ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रम्क्चर, सड़कों, किफायती आवास, रेलवे और बंदरगाहों पर काफी खर्च कर रही है। इसके अलावा सात वर्षों तक वृद्घि नहीं होने के बाद अब कंपनियों की आय भी बेहतर दिख रही है। 

क्या बाजार में ऊंची मुद्रास्फीति और मॉनसून कमजोर रहने की आशंका का असर दिख रहा है?
हां, मुद्रास्फीति के संदर्भ में यह बात सही है। लेकिन बाजार में कमजोर मॉनसून की आशंका का असर अभी नहीं दिखा है। मॉनसून को लेकर अभी ऐसा कोई आंकड़ा या मजबूत रुझान उपलब्ध नहीं है जिससे बाजार चिंतित हो। 

अगले 12 महीनों में प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनावों के परिणाम का बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
मुझे विधानसभा चुनावों का मई 2019 में प्रस्तावित आम चुनाव पर कोई असर पडऩे की संभावना नहीं दिख रही है। हालांकि हम इस घटनाक्रम को लेकर सरगर्मी देखेंगे जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव पैदा हुआ है। इसी तरह का रुझान हम 2018 में भी देख सकते हैं। राजनीति में एक साल किसी तरह का अनुमान जताने के लिए लंबा समय होता है। मौजूदा समय में, बाजार का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार वर्ष 2019 में वापसी करेगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो इससे बाजार में अस्थिरता पैदा होगी।

आम चुनाव तक आप सरकार से किस तरह के बदलावों या पहलों की उम्मीद कर रहे हैं?
कोई बड़ा नीतिगत बदलाव नहीं होगा। अब समय पहले घोषित की जा चुकी नीतियों के क्रियान्वयन में तेजी लाने का है। सरकार का फोकस आर्थिक वृद्घि मजबूत बनाने, रोजगार पैदा करने और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने पर रहेगा। बुनियादी ढांचा विकास पर जोर दिया गया है।

छोटे निवेशकों के लिए क्या संदेश देंगे?
बाजार में निवेश बनाए रखें और अल्पावधि समस्याओं से परेशान न हों। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और निवेशकों को दीर्घावधि दृष्टिïकोण के साथ इसका लाभ उठाना चाहिए।

आप कौन से क्षेत्रों को लेकर उत्साहित हैं?
वित्तीय क्षेत्र मजबूत बना रहेगा। कई लोग यह नहीं जानते कि इस क्षेत्र द्वारा कमाई के अवसर सामने आएंगे। मैं भारतीय खपत की रफ्तार को लेकर भी उत्साहित हूं। जैसे जैसे प्रति व्यक्ति आय में सुधार आएगा, खर्च की क्षमता भी बढ़ेगी। इससे खपत-केंद्रित शेयरों में तेजी आएगी। आईटी शेयरों का प्रदर्शन भी वर्ष 2018 में अच्छा रहने के आसार हैं। आईटी में वृद्घि की रफ्तार फिर से मजबूत हो रही है और मूल्यांकन महंगा नहीं है। रुपये में कमजोरी से भी इन शेयरों को सहारा मिलेगा।  

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या गिरावट पर इनमें खरीदारी की जानी चाहिए?
कुछ समय से यह सामने आया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का दुरुपयोग हुआ है। इनमें राजनीतिक हस्तक्षेप के मामले सामने आए हैं। पीएसबी द्वारा 2009 से 2014 तक बड़े पैमाने पर उधारी दर्ज की गई जिससे काफी हद तक कंपनियों में पूंजीगत खर्च को बढ़ावा मिला। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बेहतर प्रशासनिक ढांचे की जरूरत है। बदलते समय के साथ पीएसबी की बाजार भागीदारी घटेगी। समेकन समय की मांग है। एक निवेशक के नजरिये से निजी बैंकों में निवेश बनाए रखना बेहतर है। पीएसबी एक शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग आइडिया माने जा सकते हैं। निजी बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बाजार भागीदारी हथियाने में कामयाब होंगे। 
Keyword: एडलवाइस सिक्योरिटीज, अध्यक्ष, मुख्य कार्याधिकारी, विकास खेमानी,
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