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फिलहाल बाजार में बरकरार रहेगी सीमित गिरावट

पुनीत वाधवा /  March 11, 2018

कैलेंडर वर्ष 2018 अब तक बाजार के लिए खासा अनिश्चितताओं भरा रहा है। बीच-बीच में सुधार और उथल-पुथल के  साथ सेंसेक्स 29 जनवरी 2018 को कारोबार के दौरान पहुंचे 36,444 के स्तर से करीब 10  प्रतिशत तक नीचे आ चुका है। मझोले एवं छोटे शेयरों के खंड में गिरावट अधिक चिंताजनक रही है। एसऐंडपी बीएसई मिड-कैप और एसऐंडपी बीएसई स्मॉल कैप सूचकांक कैलेंडर वर्ष 2018 के अपने शुरुआती स्तर से लगभग 15 फीसदी नीचे आ गए हैं। सवाल है कि क्या बाजार गिरावट के आखिरी मुकाम पर है? क्या इससे अधिक गिरावट होगी? या यह सिलसिला अब थमने वाला है? जब बाजार अपने सर्वोच्च स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक लुढ़क जाता है तो बाजार को गिरावट की चपेट में माना जाता है। इस लिहाज से भारतीय बाजार फिलहाल लगभग आधी गिरावट के शिकार हुए हैं।

 

ज्यादातर विश्लेषकों को लगता है कि बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी और संभवत: भविष्य में होने वाली घटनाओं के कारण निकट से मध्यम अवधि तक गिरावट जारी रह सकती है। हालांकि उनका मानना है कि फिलहाल तेज गिरावट आने का अंदेशा नहीं दिख रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मोतीलाल ओसवाल कहते हैं, 'जनवरी में बाजार में जबरदस्त तेजी दिखी थी और किसी ने इसकी उम्मीद नहीं की थी। इस तरह की स्थितियां काफी हलचल पैदा करती हैं। ऊंचे स्तर से गिरावट की कोई न कोई वजह होती है। पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में हुआ फर्जीवाड़ा अचानक सुर्खियों में आया और बाजार की तेजी को खा गया। हमें लगता है कि स्थिति और बिगड़ी तो निफ्टी 50 मौजूदा स्तर से 3 से 4 प्रतिशत और नीचे आ सकता है। हालांकि इसमें थोड़ा समय लग सकता है और इस दौरान निवेशकों के धैर्य की परख भी हो जाएगी।'

इस्पात एवं एल्युमीनियम पर शुल्क लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की घोषणा और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित वृद्धि और बॉन्ड बाजार पर इसका असर  दो ऐसे जोखिम हैं, जिनसे बाजार को अगले दो महीनों में रूबरू होना पड़ सकता है। इनके अलावा सरकार के उधारी कार्यक्रम (अप्रैल में घोषणा हो सकती है), ब्याज दर एवं महंगाई सहित प्रमुख आर्थिक आंकड़े, मॉनसून की प्रगति, राज्यों में होने वाले चुनावों के नतीजे और बैंकिंग क्षेत्र की गतिविधियां ऐसे कारक होंगे, जिनसे अगले कुछ महीनों में बाजार को जूझना पड़ सकता है। 

डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक यू आर भट्टï ने कहा, 'हम ऐसी गिरावट से इनकार नहीं कर सकते हैं, जिसके बाद बाजार मंदडिय़ों की गिरफ्त में आ सकता है। हालांकि अभी हम इस पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। हमें निफ्टी 50 के लिए 9,700 के स्तर पर समर्थन दिख रहा है। लेकिन अगर कंपनियों की आय में वृद्धि की रफ्तार निराशाजनक रही तो यह समर्थन टूट सकता है। तेल की कीमतें, ब्याज दरें और बैंकिंग जगत की घटनाओं पर सबकी नजरें रहेंगी।'

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम का कहना है कि मिड एवं स्मॉल-कैप खंडों में गिरावट अभी थमी नहीं है। उन्होंने कहा, 'ऊंचे स्तर पर जा चुके इन दोनों शेयरों में गिरावट से पूरे बाजार को 4 लाख करोड़ रुपये की चपत लग सकती है।' विश्लेषकों का कहना है बाजार इस समय जिस स्तर पर है, उसमें महंगाई बढऩे की आशंका और अगले कुछ महीनों में मुख्य दरें बढऩे की संभावना का असर तो दिख रहा है, लेकिन मॉनसून के मिजाज पर गौर नहीं किया गया है। उनका मानना है कि बैंकिंग शेयर अब भी बाजार की कमजोर नब्ज बने हुए हैं। ओसवाल का कहना है कि मार्च तिमाही की आय के आंकड़े बाजार में तेजी लाने में अहम साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'निफ्टी और सेंसेक्स के क्रमश: 10,000 और 31,000 के स्तर बाजार में रकम लगाने के लिए मुनासिब होंगे।'
Keyword: कैलेंडर वर्ष 2018, मझोले, छोटे शेयर, खंड,
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