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विशिष्ट योजना जरूरी

संपादकीय /  March 08, 2018

 भारतीय मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस वर्ष गर्मी जल्दी आएगी और सामान्य की तुलना में इसकी तीव्रता भी अधिक होगी। इन हालात में हमें नकारात्मक असर से बचने के लिए पहले ही बेहतर तैयारी करके रखनी होगी। देश के दक्षिणी हिस्से को छोड़कर अधिकांश इलाकों में तापमान के सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहने का अनुमान जताया गया है। 

 

इसके अलावा मार्च और मई के बीच लू चलने की घटनाएं भी पहले की तुलना में ज्यादा होने की बात कही गई है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो यह लगातार तीसरा वर्ष होगा जब हमें भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले सन 2014 और 2015 में हमें लगातार सूखे का सामना करना पड़ा था। गर्मी को लेकर मौसम विभाग की सटीक भविष्यवाणी को देखते हुए इसके गलत होने की संभावना भी बहुत कम है। देखा जाए तो तापमान में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू भी हो चुका है। कई क्षेत्रों में तो यह सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा है। अत्यधिक गर्मी के तमाम असर हो सकते हैं। इसका अर्थव्यवस्था पर बहुत व्यापक असर हो सकता है। इससे फसल के उत्पादन पर बुरा असर हो सकता है, खासतौर पर गेहूं की फसल पर जो कि मार्च में तापमान में समय से पहले हुए इजाफे के चलते काफी संवेदनशील है। 

गर्मियों का असर पानी के स्रोतों पर भी पड़ेगा क्योंकि कम बारिश के कारण पानी पहले ही काफी कम है। बिजली की मांग बढ़ेगी और जल विद्युत का उत्पादन कम होगा। पशुओं के प्रभावित होने के कारण दूध का उत्पादन कम होगा और मनुष्यों के बीमार पडऩे की आशंका बढ़ेगी। इससे गर्मी के कारण होने वाली बीमारियां बढ़ेंगी और लोगों की मृत्यु भी हो सकती है। अत्यधिक गर्मी पडऩे से श्रम संबंधी उत्पादकता भी प्रभावित होगी। 

पानी की कमी गर्मियों के कारण होने वाली सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल है। इस वर्ष देश के जलाशयों में जल स्तर पहले ही कम रहा है। एक मार्च तक केंद्रीय जल आयोग की निगरानी वाले देश के 91 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्टॉक पिछले साल के स्तर से 11 फीसदी और औसत से 9 फीसदी कम रहा है। इतना ही नहीं सर्दी में होने वाली बारिश का स्तर सामान्य से 64 फीसदी कम रहा जबकि उत्तर पश्चिम के खेती वाले इलाके में यह 67 फीसदी कम रहा। 

हालांकि ला नीना प्रभाव के संकेत भी मिल रहे हैं जिसे मॉनसून के लिए अच्छा माना जाता है। इसके बावजूद आईएमडी ने अगले मॉनसून पर इसके किसी प्रभाव का आकलन नहीं किया है, न ही कोई निष्कर्ष दिया है। ऐसा शायद इसलिए क्योंकि इसके मई के अंत से कमजोर पडऩे की आशंका है जबकि मॉनसून उसके बाद ही आता है। भले ही ला नीना की वजह से अच्छी बारिश हो लेकिन इससे राहत केवल बारिश के मौसम में ही मिलेगी न कि मॉनसून से पहले के मौसम में जबकि उसी समय इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। 

ऐसे में गर्मी से होने वाली समस्याओं से बचने के लिए क्षेत्रवार योजना बनाना जरूरी है। अहमदाबाद ने वर्ष 2010 में गर्मी से निपटने की कार्य योजना बनाई थी जब वहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस होने से करीब 700 लोगों की मौत हो गई थी। इस योजना की मदद से 2015 में ऐसे ही हालात में मौत का आंकड़ा सिमटकर 20 हो गया। अन्य राज्यों को इससे सबक लेते हुए जगह-जगह सार्वजनिक पेयजल और दिन के लिए छांव बनानी चाहिए। स्कूलों का समय बदला जाना चाहिए और जलाशयों से पानी जारी करने का समय बदलना चाहिए ताकि उसका उचित इस्तेमाल हो। श्रमिकों के काम का समय भी बदला जा सकता है। खेतों में ऐसी फसल बोनी चाहिए जो गर्मी बरदाश्त कर सके। जीन संवद्र्घन इसमें मददगार हो सकता है।
Keyword: मौसम विभाग, मार्च, मई, लू,
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