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इंडियन ओवसीज बैंक में बढ़ी सरकार की हिस्सेदारी

टीई नरसिम्हन / चेन्नई March 04, 2018

इंडियन ओवरसीज बैंक मे 46.94 अरब रुपये निवेश के बाद भारत सरकार की हिस्सेदारी 7.49 प्रतिशत बढ़ गई है। यह सरकार के पुनर्पूंजीकरण योजना का हिस्सा है। 
जनवरी महीने में सरकार ने कहा था कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पुनर्पूंजीकरण करेगी, जिसमें 800 अरब रुपये रीकैप बॉन्डों के माध्यम से निवेश होगा और 81.39 अरब रुपये का निवेश 2018 के लिए बजट समर्थन के माध्यम से होगा। 
घोषणा के मुताबिक रीकैप बॉन्ड  और 2017-18 के बजट समर्थन के माध्यम से आईओबी को 46.94 अरब रुपये आवंटित किए गए हैं, जो भारत सरकार के  पक्ष में इक्विटी शेयरों के तरजीही आवंटन के एवज में हुआ है। इसमें से 41.32 अरब रुपये का आवंटन रीकैप बॉन्ड के माध्यम से हुआ है। 
बैंक ने कहा है कि निवेश के बाद सरकार की हिस्सेदारी 7.49 प्रतिशत बढ़कर पहले के 82.41 प्रतिशत से बढ़कर अब 89.90 प्रतिशत हो गई है। 
आईओबी ने कहा कि बासेल 3 की जरूरतों का अनुपालन करने के लिए पूंजी पर्याप्तता अनिवार्य है और इसके लिए पूंजी जुटाने की जरूरत बढ़ी है। 
केंद्र सरकार ने बैंक में अतिरिक्त इक्विटी पूंजी के निवेश का प्रस्ताव किया है, जो सरकार के अपने वित्तीय संस्थानों व बैंकों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के तहत किया गया है। 
जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल पूजी पर्याप्तता के लिए इस्तेमाल होगा जो बैंक के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इस समय बंक की अधिकृत पूंजी 100 अरब रुपये है और पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल 28.52 अरब रुपये है। 
दिसंबर 17 को समाप्त तीसरी तिमाही में बैंक को 9.71 अरब रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ है, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में 5.54 अरब रुपये का नुकसान हुआ था। बहरहाल बाद में नुकसान 12.22 अरब रुपये से 20.56 प्रतिशत कम हो गया। 
चेन्नई का यह बैंक बहुत ज्यादा एनपीए होने के संकट से जूझ हा है। बैंक का तर्क है कि उसका नुकसान धीरे धीरे कम हो रहा है। उदाहरण के लिए दूसरी तिमाही की तुलना में तीसरी तिमाही में नुकसान 20.59 प्रतिशत घटा है। बैंक को यह भी भरोसा है कि वह एनपीए की समस्या से निजात पा लेगा। 
Keyword: इंडियन ओवरसीज बैंक, बॉन्ड,
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