बिजनेस स्टैंडर्ड - बदला जाए ढांचा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, August 18, 2018 01:58 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

बदला जाए ढांचा

संपादकीय /  February 27, 2018

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को प्रशासनिक विवाद और राजनीतिक संकट की मानो आदत सी हो गई है। इनका नाता प्रदेश के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केंद्र सरकार से है। मुख्यमंत्री के मन में संस्थानों के प्रति नाम मात्र का ही सम्मान है जबकि केंद्र सरकार प्रशासनिक मशीनरी पर से नियंत्रण छोडऩा नहीं चाहती। केंद्र ने केजरीवाल का काम कठिन बनाने में कोई कसर उठा नहीं रखी है। परंतु ताजा विवाद अतीत से एकदम अलग है। दिल्ली के मुख्य सचिव ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के आवास के भीतर आम आदमी पार्टी के विधायकों ने उन पर हमला किया। दिल्ली के शीर्ष नौकरशाह ने पुलिस में शिकायत की और पुलिस ने मुख्यमंत्री के आवास पर छापा मारा। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच की जाएगी। नौकरशाही संगठनों की नाराजगी जाहिर है। वहीं दिल्ली सरकार के समर्थकों और आप का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से तैनात नौकरशाह केजरीवाल प्रशासन के खिलाफ राजनीति प्रेरित अभियान चला रहे हैं। दरअसल दिल्ली सरकार को यह अधिकार ही नहीं है कि वह अहम पदों पर अपनी पसंद के नौकरशाह नियुक्त कर सके।
पुलिस को हमले के इस आरोप की पारदर्शी तरीके से जांच करनी चाहिए। उसके बाद अदालत तय करेगी कि मामला दरअसल क्या था। बहरहाल, केजरीवाल भी पूरे प्रकरण से पल्ला नहीं झाड़ सकते क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने एक तरह से नौकरशाह पर किए गए हमले को स्वीकार ही किया। ऐसी शासन शैली को माफ नहीं किया जा सकता है जिसमें नौकरशाहों पर शारीरिक हमला किया जाता हो। बतौर राजनेता केजरीवाल ऐसे मामलों में उचित कदम उठाने में विफल रहे हैं और उन्हें इसकी जवाबदेही ही नहीं उठानी चाहिए बल्कि कीमत भी चुकानी चाहिए। 
यहां बड़े ढांचागत प्रश्न भी हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। दिल्लीवासियों को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच की लड़ाई की कीमत चुकानी पड़ रही है। इसका असर दरअसल शासन और जवाबदेही पर पड़ रहा है। यह बात एकदम स्पष्ट है कि दिल्ली को सीमित राज्य का दर्जा देने का प्रयोग बुरी तरह नाकाम हो रहा है। एक स्तर पर देखा जाए तो इसके लिए केजरीवाल को दोषी ठहराना बेमानी है। देश में यह चलन रहा है और हर मुख्यमंत्री चाहता है कि वह अपनी पसंद के नौकरशाह नियुक्त करे। कुछ ही ऐसे होंगे जो अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी द्वारा नियुक्त नौकरशाहों के साथ निबाह करें। 
ढांचागत कमी की बात करें तो उसका संबंध मौजूदा राजनीतिक झगड़े से परे है। दरअसल जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री की जवाबदेही और उसके अधिकारों के बीच बड़ा अंतर है। इस स्थिति को बदलना होगा। दिल्ली में पुलिस और नौकरशाही का नियंत्रण निश्चित तौर पर चुनी हुई सरकार के हाथ होना चाहिए। नगर निकाय भी जवाबदेही को बांटने और सत्ता के ढांचे को जटिल बनाने का ही काम करता है। उनको समाप्त किया जाना चाहिए और उनके राजस्व आधार, अधिकार और जवाबदेही को राज्य सरकार को सौंपा जाना चाहिए। दिल्ली विकास प्राधिकरण और उसके नियंत्रण वाली जमीन को भी राज्य सरकार के हवाले किया जाना चाहिए। 
संक्षेप में कहें तो दिल्ली को एक पूर्ण राज्य के रूप में काम करने देना चाहिए। खासतौर पर तब जबकि सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सहमत भी हैं। केंद्र सरकार के संस्थानों और लोगों के संरक्षण के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को छोड़ देना चाहिए और राज्य में उच्च पदस्थ लोगों की सुरक्षा का दायित्व एक अलग पुलिस बल को दिया जाना चाहिए। दुनिया भर में यही व्यवस्था काम करती है और अब वक्त आ गया है कि भारत भी इसे अपना ले।
Keyword: Delhi, Arvind kejriwal, Centre,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मुखौटा कंपनियों का पंजीकरण बहाल करना सही होगा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.