बिजनेस स्टैंडर्ड - पहले के मुकाबले अब बाजार में दिखेगा ज्यादा उतार-चढ़ाव
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पहले के मुकाबले अब बाजार में दिखेगा ज्यादा उतार-चढ़ाव

समी मोडक /  February 25, 2018

दिग्गज निवेश विशेषज्ञ 81 वर्षीय मार्क मोबियस का कहना है कि भारत आर्थिक वृद्धि दर में तेजी के मामले में चीन से आगे निकल जाएगा। समी मोडक ने उनसे विभिन्न मसलों पर बात की। पेश हैं उनसे की गई बातचीत के मुख्य अंश: 

 
पिछले एक साल में वैश्विक बाजारों में खासी तेजी आई है। ऐसे में हम बाजार में तेजी के किस मुकाम पर हैं? 
 
बाजार में तेजी शीर्ष स्तर के करीब पहुंच चुकी है। किसी भी नजरिये से देखें तो बाजार ऊंचाई पर है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि बाजार अब और ऊपर नहीं जाएगा। पिछले साल अगर निवेशकों ने यह सोचा होता कि अब नकदी अपने पास रखने का समय है तो काफी सारा पैसा अभी बाजार से बाहर होता। मेरे खयाल से यह बड़ी गलती होगी। लेकिन जब बाजार ऊपर जाता है तो भविष्य में बाजार में अच्छी-खासी गिरावट से पैदा होने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए कुछ रकम बचाकर रखना एक अच्छा विचार है। अगर अमेरिकी हालात को देखें तो वहां आर्थिक माहौल अच्छा है। हालांकि बाजार ऊंचे स्तर पर हैं, लेकिन यह स्तर बरकरार रह सकता है। लेकिन अतीत से सबक लेते हुए निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और कुछ नकदी पास रखनी चाहिए। 
 
इस महीने के शुरु में महंगाई के डर से बॉन्ड प्राप्तियों में उछाल के बीच बाजार में खासी उथल-पुथल रही है। क्या यह साल उठापटक भरा रहेगा? 
 
एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) उद्योग में तेजी देखने को मिली है। इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर धन आ रहा है क्योंकि निवेशकों को कम लागत वाले विकल्पों की तलाश रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो बाजार में ईटीएफ निवेश के लिए लिहाज से बड़े आकर्षण का केंद्र बन कर उभरे हैं। वैसे ईटीएफ का धन उसी दिशा में जाता है जिस तरफ बाजार जाता है। इसलिए ईटीएफ पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पिछले साल कम अनिश्चितता थी, क्योंकि सभी एक ही दिशा में जा रहे थे। बाजार ऊपर जा रहा है तो ईटीएफ में धन भी अधिक आ रहा है और वे बड़ी तादाद में शेयर खरीद रहे हैं। लेकिन अब जब गिरावट आ रही है तो आपको उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल रहा है। आपको बाजार में पहले के मुकाबले आगे अधिक अनिश्चितता देखने को मिलेगी। ईटीएफ में तेजी बाजार के लिए जोखिम है। यह भेड़चाल एक ही दिशा में है। जब चट्टान आती है तो यह गिरने लगता है या पलटने की कोशिश करता है। इससे बड़ी गिरावट आ जाती है। 
 
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आप क्या सोचते हैं? 
 
विकास दर के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा। हम इसे देख रहे हैं और भारत इसे बरकरार रखेगा। अगर सुधार जारी रहे तो भारत में बहुत तेजी से आगे बढऩे की क्षमता और प्रतिभा है। मेरे विचार से वृद्धि दर में आई मौजूदा नरमी अस्थायी है। आने वाले समय में अर्थव्यवस्था फिर रफ्तार पकड़ सकती है। नोटबंदी से विकास दर पर भारी असर पड़ा। इसके नतीजे अपेक्षित रहे या नहीं, इस पर सवाल उठाए जा सकते हैं। नोटबंदी अर्थव्यवस्था के लिए झटका थी। हालांकि दूसरी तरफ कर सुधार के सकारात्मक प्रभाव रहे हैं।
 
हाल के फर्जीवाड़े से बैंकों पर क्या असर पड़ेगा? 
 
बैंकों के परिचालन में एक बड़ा सुधार आने वाला है। अब सभी बैंकों को अपनी प्रणाली और संचालन को लेकर ज्यादा सावधान रहना होगा। दूसरा असर यह दिखेगा कि अब इन सभी बैंकों को अधिक पूंजी देनी होगी और सरकार को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। पूंजी मिलने पर बैंक एक बार फिर उधारी देना शुरू कर सकते हैं। बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त रकम नहीं होने की वजह से शायद पूंजी निवेश में भी कमी आई है। 
 
सरकार सुधार या नीतिगत बदलाव के लिए क्या कदम उठा सकती है?
 
कर प्रणाली आसान बनाने की दरकार है। आप विदेशी निवेशकों से पूंजीगत लाभ कर जुटाने की उम्मीद नहीं कर सकते। इसका कोई मतलब भी नहीं है। मामला कर भुगतान का उतना नहीं है, क्योंकि अगर कोई निवेशक किसी ऐसे देश में बैठा है, जिसके साथ भारत ने कर संधि नहीं की है तो यह एक तरह से दोहरा कर होगा। दूसरी बात यह कि इन पर आप कैसे नजर रखेंगे क्योंकि विदेशी निवेशक एक दिन खरीदते हैं तो अगले दिन बेच देते हैं। 
 
आभासी मुद्रा पर आपकी क्या राय है?
 
आभासी मुद्राएं 1637 के ट्यूलिप संकट की तरह आर्थिक बुलबुला बना रही हैं। इनसे संकट पैदा हो सकता है। सचाई यह है कि कई लोग आभासी मुद्राओं के जरिए रकम बनाकर खुद को अमीर जैसा महसूस करते हैं।  जब ऐसी सोच आती है तो वित्तीय प्रणाली में अधिक रकम आती है और बाद में यह शेयर बाजार का रास्ता पकड़ लेती है। इससे हर तरफ तेजी का बाजार बन जाता है। अगर यह रकम निकलती है तो साख में कमी आती है और भरोसा घट जाता है। कोई नहीं जानता कि यह असर कितना बड़ा होगा। 
 
क्या आपकी सक्रिय तौर पर बाजार पर नजर रखने की योजना है? 
 
मैं बाजार से जुड़ा रहूंगा। मुझे नहीं पता कि रिटायरमेंट का मतलब क्या होता है। 
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