बिजनेस स्टैंडर्ड - एमएफ और पीएमएस के लिए घोषणा जल्द
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एमएफ और पीएमएस के लिए घोषणा जल्द

राजेश भयानी / मुंबई February 25, 2018

सार्वभौम एक्सचेंज (यूनिवर्सल एक्सचेंज) की परिकल्पना साकार होने में अब कुछ ही समय शेष रहने के मद्देनजर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्युचुअल फंडों और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेस (पीएमएस) को कमोडिटी डेरिवेटिव में कारोबार की अनुमति देने के लिए दिशानिर्देश तय कर दिए हैं। बाजार नियामक जल्द ही इन दिशानिर्देशों की घोषणा करने वाला है। सेबी ने इस विषय पर पिछले साल दिसंबर में परिचर्चा पत्र जारी किया था। इसके बाद नियामक ने सार्वभौम एक्सचेंज के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही इसके शुरू होने की समय सीमा भी तय कर दी थी। इस एक्सचेंज के अस्तित्व में आने के बाद इक्विटी एवं कमोडिटी एक्सचेंज एक दूसरे के खंड में कारोबार कर सकते हैं। हालांकि इससे पहले सेबी उत्पादों का दायरा बढ़ाना और जिंस डेरिवेटिव बाजार में विभिन्न भागीदारों को जोडऩा चाहता है।
 
इस संबंध में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले सप्ताह बजट में भी संकेत दे दिए थे। उन्होंने कहा था, 'फसल की बेहतर कीमत पाने के लिए किसानों को कटाई के बाद उपलब्ध कीमतों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। इस दिशा में उपयुक्त नीतियां बनाने के लिए सरकार संबंधित मंत्रालयों के साथ एक संस्थागत प्रणाली विकसित करेगी। यह प्रणाली कीमत और मांग के अनुमान, वायदा एवं विकल्प कारोबार के इस्तेमाल, वेयरहाउस डिपॉजिटरी सिस्टम के विस्तार और विशिष्टï निर्यात और आयात के उपायों पर निर्णय लेने में भी मददगार साबित होगी।'
 
एक्सचेंज उद्योग के अधिकारी इस घोषणा से उत्साहित हैं। वैसे, वित्त मंत्री ने कृषि-उत्पाद के संबंध में यह घोषणा की है, लेकिन इस व्यवस्था के तहत बनने वाले बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल उन गैर-कृषि अनुबंधों के लिए भी उपयोगी साबित होगा, जिनकी डिलिवरी संभव होगी। इनमें सोना, चांदी और अन्य डिलिवरी आधरित अनुबंध होंगे, जिनके प्रस्ताव एमसीएक्स और एनसीडीईक्स ने सेबी को दिए हैं। एक्सचेंज उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'वित्त मंत्री के बयान में जोर कृषि जिंसों पर दिया गया है, लेकिन हमारा मानना है कि सेबी इसका दायरा बढ़ाकर दूसरे जिंसों में भी वायदा एवं विकल्प कारोबार की अनुमति देगा। हमें नहीं लगता कि नियामक कृषि एवं गैर-कृषि उत्पादों में अंतर करेगा।'
 
वित्त मंत्री के बयान से स्पष्टï संकेत मिलता है कि सरकार जिंस डेरिवेटिव बाजार को एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में देख रही है। सूत्रों ने कहा कि सरकार डब्ल्यूडीआरए रिपॉजिटरी ढांचे का भी विस्तार करना चाह रही है। फिलहाल दो रिपॉजिटरी काम कर रहे हैं और एक ने इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रसीद जारी करनी शुरू कर दी है। सूत्रों ने कहा कि अब तक रिपॉजिटरी का शुरुआती चरण कृषि उत्पाद पर केंद्रित रहा है, लेकिन बाद में गैर-कृषि उत्पाद के लिए भी इसका विस्तार किया जा सकता है। गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज के अस्तित्व में आने के बाद यही ढांचा उपयोगी साबित होगा। सेबी गैर-कृषि जिंसों के लिए भी दिशानिर्देश ला सकता है, गैर-कृषि सहित डब्ल्यूडीआरए रिपॉजिटरी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा।
Keyword: jins, exchange,,
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