बिजनेस स्टैंडर्ड - बढ़ते कानूनी दांव से कर्ज समाधान पर असर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, October 20, 2018 04:39 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

बढ़ते कानूनी दांव से कर्ज समाधान पर असर

देव चटर्जी / मुंबई February 25, 2018

गैर-निष्पादित आस्तियों के खिलाफ बैंकों की तरफ से शुरू की जा रही मौजूदा दिवालिया प्रक्रिया अदालती लड़ाई की ओर बढ़ रही है क्योंकि बोली लगाने वाले् और मौजूदा मालिकान रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल और लेनदारों की तरफ से दिवालिया संहिता की मनमानी व्याख्या व इस्तेमाल की शिकायत कर रहे हैं। बिनानी सीमेंट, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और जेपी के लिए समाधान प्रक्रिया पहले ही अदालत पहुंच चुकी है और कानूनी दांव-पेंच का अगला दौर भूषण पावर ऐंड स्टील और एस्सार स्टील की बोली प्रक्रिया में शुरू होने की संभावना है।
 
मुंबई के एक कॉरपोरेट वकील ने कहा, ज्यादातर मामलों में सर्वोच्च न्यायालय में अपील होगी क्योंकि दिवालिया संहिता की व्याख्या ज्यादातर मामलों में अलग-अलग है। बिनानी सीमेंट के मामले में इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने दूसरे दौर की बोली मंगाई जबकि पहले दौर में जेएसडब्ल्यू सीमेंट विजयी हो चुकी थी। अन्य मामले में देर से आने वालों को बोली लगाने की अनुमति नहीं दी गई। लंदन की लिबर्टी हाउस सोमवार को अदालत जाने की योजना बना रही है क्योंकि भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए इसे बोली लगाने की अनुमति नहीं दी गई जहां टाटा स्टील पहले दौर में विजेता के तौर पर सामने आई थी।
 
बिनानी सीमेंट की प्रवर्तक बिनानी इंडस्ट्रीज एनसीएलटी के कोलकाता पीठ जा चुके हैं क्योंकि आरोप था कि इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने कंपनी का मूल्यांकन महज 63 अरब बताया जबकि मूल्यांकन 173 अरब रुपये का है। कंपनी का यह भी आरोप है कि आईआरपी की व्यक्तिगत रुचि इस मामले में अपने अनुकूल बोलीदाता को लेकर है। टिप्पणी मांगे जाने पर बिनानी सीमेंट के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल डेलॉयट के विजय कुमार अय्यर ने बिनानी इंडस्ट्रीज के दावे पर टिप्पणी नहीं की। यह याचिका एनसीएलटी में लंबित है।
 
दूसरी ओर वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज आरबीआई व एसबीआई की तरफ से शुरू की गई आईबीसी प्रक्रियाओं के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय पहुंच गई है। कंपनी ने कहा कि इसने 22 अरब रुपये के कर्ज भुगतान के लिए संपत्ति बिक्री समेत कई कदम उठाए हैं लेकिन बैंक ने इन कदमों को नजरअंदाज कर दिया। यह मामला अभी लंबित है। कर्ज से लदी एक कंपनी के सीईओ ने कहा, कुछ कंपनियों के खिलाफ मनमाने ढंग से आईबीसी प्रक्रिया शुरू करना (खास तौर से दूरसंचार क्षेत्र में) और कई अन्य एनपीए खाते को नजरअंदाज करना (जो ऐसी या इससे भी खराब स्थिति में है) ठीक नहीं है। आरबीआई को स्पष्ट करना चाहिए कि किस आधार पर इसने कुछ कंपनियों को सूची में शामिल किया, जिससे बड़े पैमाने पर नौकरियों का नुकसान हुआ जबकि कई अन्य को छोड़ दिया गया। इसी वजह से कई कंपनियां अदालत की चौखट पर हैं।
 
सबसे बड़ी अदालती लड़ाई हालांकि एस्सार स्टील के मामले में होने की संभावना है जहां कंपनी को दो बोलियां मिली हैं। लेनदारों ने कहा कि आर्सेलरमित्तल और नुमेटल की बोली खारिज की जा सकती है। नुमेटल की 25 फीसदी हिस्सेदारी रुइया के ट्रस्ट के पास है। आर्सेलरमित्तल के पास उत्तम गैल्वा की 29 फीसदी हिस्सेदारी थी और इसने एस्सार की बोली लगाए जाने से ठीक पहले इसे बेच दिया। आर्सेलरमित्तल के प्रवर्तक एल एन मित्तल के पास कजाकिस्तान की केएसएस की 33 फीसदी हिस्सेदारी थी, जिसके चलते इनके पास केएसएस पेट्रोन की 100 फीसदी हिस्सेदारी हो गई, जो एसबीआई की एनपीए की सूची में शामिल है और आईबीसी के तहत इसे एनसीएलटी भेजा गया है। मित्तल ने केएसएस की व्यक्तिगत हिस्सेदारी एस्सार स्टील की बोली लगाने से पहले बेच दी।
 
बोली से पहले एनपीए में हिस्सा होने के बाद भी मित्तल के अधिकारियोंं को भरोसा है कि एस्सार स्टील की उनकी बोली में जीत मिलेगी। नुमेटल के अधिकारियों को भी इतना ही भरोसा है क्योंकि इसने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों व सरकारी कानूनी अधिकारियों से कानूनी सलाह ली है।
Keyword: bank, loan, debt,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के निर्णय से दूर होगी नकदी की किल्लत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.