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अभी कम अवधि की एफडी भली

संजय कुमार सिंह / संजय कुमार सिंह February 25, 2018

बेंचमार्क बॉन्ड प्रतिफल में मजबूती को देखते हुए निवेशकों को भी अब अपनी रणनीति बदल लेनी चाहिए। नए माहौल के हिसाब से उनको निश्चित आय की अपनी रणनीति को फिर से बनाने की जरूरत है। अब ब्याज दरों में मजबूती आने के आसार हैं। लिहाजा आपको कम अवधि वाली सावधि जमा का विकल्प लेना चाहिए। साथ ही लंबी अवधि के फंडों में 10 फीसदी से ज्यादा आवंटन नहीं करना चाहिए।  हाल में बजट के दिन बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी हुई। हालांकि इसके कई कारण थे। सुंदरम म्युचुअल फंड में मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम) द्विजेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं, 'बजट में जीएसटी मद में राजस्व वृद्घि का अनुमान बाजार के गले नहीं उतर रहा। बाजार को लग रहा है कि सरकार उधारी लक्ष्य पर नहीं टिक पाएगी और उसकी उधारी बढ़ेगी।' श्रीवास्तव के अनुसार बाजार की नजर में प्रतिफल में बढ़ोतरी का एक और कारण यह है कि सरकार ने जिस तरह खर्च की योजना तैयार की है, उससे बजट मुद्रास्फीतिकारी हो सकता है। श्रीवास्तव कहते हैं, 'जिस तरह से वृद्घि में तेजी आ रही है, उससे संभव है कि भारतीय रिजर्व बैंक सख्त रुख अपनाएगा और उम्मीद से पहले ही दरों में वृद्घि कर देगा। बाजार यह मानकर चल रहा है।' 

 
हालांकि बॉन्ड प्रतिफल में तेजी को वैश्विक घटनाक्रम ने भी बढ़ाया है। दिसंबर में अमेरिकी फेडरल ने 2018 में तीन बार दरों में वृद्घि का खाका तैयार किया है। लेकिन वेतन वृद्घि में तेजी आने के कारण फेडरल के कदम पर नजर रखने वालों का कहना है कि अब चौथी दर वृद्घि की 25 फीसदी संभावना है। निवेशकों को इस नए माहौल के अनुरूप अपनी फिक्स्ड-इनकम रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को फंडों का चयन अपनी समयावधि और जोखिम सहन करने की क्षमता के हिसाब से करना चाहिए। श्रीवास्तव कहते हैं, 'मान लीजिए कि आपने सेवानिवृति के लिए लंबी अवधि का पोर्टफोलियो बना रखा है। जाहिर है, इसमें डेट का हिस्सा भी होगा जो आपके संपत्ति आवंटन में आवश्यक है। लिहाजा, पोर्टफोलियो की फिक्स्ड-इनकम श्रेणी के लिए आपने जितना पैसा रखा है, उसका 10 से 15 प्रतिशत लंबी अवधि के फंडों में डालना चाहिए। ये फंड औसतन सात-आठ वर्ष की परिपक्वता वाले होने चाहिए। इसके लिए आप अपनी रकम को लिक्विड फंड या अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म जैसे कम अवधि वाले फंड में लगाएं और वहां से सिस्टमैटिक ट्रांसफर योजना के जरिए लंबी अवधि के फंडों में डालें।'
 
श्रीवास्तव का मानना है कि चूंकि अर्थव्यवस्था में मजबूती आ रही है और आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) भी जाहिर तौर पर मुद्रास्फीति को 2 से 6 फीसदी के दायरे में रखना चाहती है, ऐसे में लंबी अवधि के दौरान 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल अपने मौजूदा स्तर से नीचे आ सकता है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन कहते हैं, 'लंबी परिपक्वता वाले बॉन्ड फंड आवंटन के लिए निवेशक अगर डायनेमिक बॉन्ड फंडों का इस्तेमाल करें तो अच्छा रहेगा। डायनेमिक बॉन्ड फंडो के प्रबंधकों के पास वैश्विक और घरेलू घटनाक्रमों के आधार पर पोर्टफोलियो में बदलाव करने का विकल्प होता है।'
 
शेष पोर्टफोलियो संक्षिप्त अवधि वाले फंडों का होना चाहिए। 12 से 18 महीने की अवधि के लिए निवेशकों को अपनी पूंजी अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म फंड में लगानी चाहिए। वहीं 36 महीने की निवेश अवधि और कराधान पर इंडेक्सेशन लाभ चाहने वालों को अपनी रकम उस फंड मेंं लगानी चाहिए जिसकी औसत परिपक्वता दो-तीन साल हो। वर्ष 2019 में आम चुनाव होने हैं। ऐसे में बाजार को अनिश्चितता बढऩे का अनुमान है। इसलिए आपको ज्यादातर पूंजी संक्षिप्त अवधि के फंडों में निवेश करनी चाहिए। 
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