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रद्दी कागजों से तैयार होती हैं ईको-फ्रेंडली पेंसिल

स्नेहा भट्टाचार्य /  February 23, 2018

बीस फुट लंबे देवदार के वृक्ष से कितनी पेंसिल तैयार हो सकती हैं? बमुश्किल 2,500। देश में केवल पेंसिलों की जरूरत पूरी करने के लिए हर साल 80 लाख से अधिक पेड़ काटे जाते हैं। इससे पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान ने तमिलनाडु में कृषि समुदाय से जुड़े दो युवा उद्यमियों को झकझोर कर रख दिया।  इंडियन सुपरहीरोज के संस्थापक विष्णु वर्धन और उप-संस्थापक दिव्या शेट्ïटी बेंगलूरु की एक बहुराष्टï्रीय कंपनी में बतौर इंस्ट्रक्शनल डिजाइनर काम कर रहे थे। साल 2014 के अंत में, जब किसानों की आत्महत्या की खबरें बढऩे लगी तब उन्हें इससे इन दोनों को काफी हताशा हुई। वर्धन ने बताया कि दिव्या के दादाजी किसान थे। दिव्या जब महज 8 साल की थी, तो उनके दादाजी ने आत्महत्या कर ली थी। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूण है कि कई साल गुजरने के बाद भी हालात नहीं बदले हैं। वह कहते हैं, 'हमारे किसानों को कभी उनका हक नहीं मिल पाता है।' किसानों की इस पीड़ा को कम करने के लिए उन्होंने सोचना शुरू किया और वर्ष 2015 में उन्होंने 'इंडियन सुपरहीरोज' नाम से एक सामाजिक संस्था की नींव रखी। इसका शुरुआती मकसद जैविक खेती करने वाले सीमांत किसानों को उनके कृषि उपज में किफायती मूल्य वर्धन करना और बिना किसी बिचौलिये को शामिल किए ग्राहकों को सीधे उत्पाद बेचने में मदद करना। वर्धन बड़े फख्र से बताते हैं, 'जब हमने इस उद्यम की शुरुआत की थी तब हमारे बोर्ड में जैविक खेती करने वाले केवल दो किसान थे, लेकिन अब हमारे साथ 843 जैविक खेती करने वाले किसान, 12 एनजीओ और हमारे साथ काम करने वाले 200 आदिवासी जुड़े हैं। शुरू में हमारा मॉडल ऑफलाइन था, मगर 2017 की शुरुआत में हमने 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट इंडियनऑर्गेनिक डॉट स्टोर' नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की है।' 

 
किसानों के साथ इस परियोजना पर काम के दौरान उन्होंने महसूस किया कि पेड़ों को काटना कितना मूर्खतापूर्ण है क्योंकि इसी वजह से पानी की भारी किल्लत जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वर्धन ने कहा, '1.30 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र, वन कटाई की वजह से खत्म हो चुका है। इनमें से 36 फीसदी कागज निर्माण के लिए और 42 फीसदी इमारती लकड़ी आधारित उत्पादों के लिए इस्तेमाल होता है। इन इमारती लकडिय़ों से 18-20 अरब पेंसिलें तैयार की जाती हैं।' ये हैरान करने वाले आंकड़े वर्धन और शेट्ïटी को रद्ïदी कागज से पेंसिलें तैयार करने की विधि पर सोचने को मजबूर करने के लिए काफी थे। वर्धन बताते हैं, 'हमने इन दो वजहों को खत्म करने का फैसला किया और इसकी वजह से प्लांटसिल तैयार हुआ।' वह कहते हैं, 'ये पेंसिलें अखबारों, 100 फीसदी पुनर्चक्रित और इस्तेमाल किए जा चुके कागजों से तैयार किए जाते हैं। हम कोयंबटूर के अलग-अलग स्कूलों से अखबार इकट्ïठा करते हैं और बदले में हम उन्हें हर महीने पेंसिलों की आपूर्ति करते हैं। इस काम की वजह से बच्चों से हमें बहुत प्यार मिलता है।' 
 
उनकी पेंसिलों में काफी विविधता है। इनमें परंपरागत पेंसिलें, इंद्रधनुष पेंसिल भी शामिल है जो नुकीला करने पर कागज पर इंद्रधनुष उकेरती है। यहां बड़े बच्चों के लिए मखमली पेंसिलें भी तैयार की जाती हैं जो कि पकडऩे और लिखने में मुलायम होने के साथ ही चमकीले रंगों की बनी होती हैं। उनके पास फ्रूट पेंसिलें भी होती हैं जिससे अनन्नास, नारियल, संतरा, हरा सेब आदि अलग-अलग तरह की सुगंध आती है। यह शृंखला यहीं नहीं रुकती। उनके पास बीज पेंसिलें हैं, जिसमें पौधों के बीज धंसे होते हैं। वर्धन ने कहा, 'मिर्च, पालक, फलियों, टमाटर, बैगन जैसे स्थानीय बीजों को हम सीधे अपने किसानों से खरीदते हैं। पेंसिल ज्यादा छोटी हो जाने पर और इस्तेमाल करने लायक न रह जाए तो छात्र उसे जमीन में बो सकते हैं, उस पर पानी डालने से कुछ ही दिनों वहां एक नया पौधा उग जाएगा।' उन्होंने अपनी आगे की योजना का खुलासा करते हुए कहा कि वे प्लास्टिक का इस्तेमाल किए बगैर पर्यावरण अनुकूल कलम तैयार करने पर काम कर रहे हैं। न्यूनतम 110 पेंसिलों के आर्डर के साथ और बढ़ते प्रशंसकों के दम पर वर्धन और शेट्ïटी ने यह कारनामा कर दिखाया है जिनमें छोटे बच्चों से लेकर बड़ी कंपनियां तक शामिल हैं। 
Keyword: paper, pencil,,
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