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जनवरी में सिकुड़ा कपड़ा-वस्त्र निर्यात

दिलीप कुमार झा / मुंबई February 21, 2018

कपड़ा और वस्त्र खंड में प्रोत्साहन देने के लिए किए जा रहे सरकारी प्रयासों के बावजूद निर्यात में हर महीने गिरावट आ रही है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में कपड़ा और वस्त्र निर्यात 13 प्रतिशत गिरकर 186 अरब रुपये पर आ गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 215 अरब रुपये था। कपड़ा निर्यात 13 प्रतिशत लुढ़कर 97 अरब रुपये पर आ गया, जबकि पिछले साल की अवधि में यह 111 अरब रुपये था। इसी प्रकार, वस्त्र निर्यात 14 प्रतिशत गिरकर 89 अरब रुपये रह गया।
 
व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि रुपये की मजबूती और आयात करने वाले राष्ट्रों द्वारा अल्प विकसित देशों (एलडीसी) को तरजीह दिए जाने से सरकार को राज्य शुल्कों की वापसी (आरओएसएल) और एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) के रिफंड आसान करने की जरूरत है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि आयात करने वाले देश निर्यातकों के साथ अल्प विकसित देशों के उनके समकक्षों की तरह ही व्यवहार करें। सीआईटीआई के चेयरमैन संजय जैन ने कहा कि सूती वस्त्रों के निर्यात में 16 प्रतिशत तक की तीव्र गिरावट, वस्त्रों में 14 प्रतिशत तक और मानव-निर्मित कपड़ों में सात प्रतिशत तक की गिरावट हुई है।
 
जनवरी में कपड़ा और वस्त्र निर्यात का हिस्सा घटकर 12 प्रतिशत हो गया, जबकि 2017 में यह 14 प्रतिशत था। अप्रैल 2017 और जनवरी 2018 के बीच कपड़ा और वस्त्र निर्यात इस वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में चार प्रतिशत गिरकर 1,871 अरब रुपये पर आ गया, जबकि एक साल पहले यह 1,940 अरब रुपये था। हालांकि धागे, कपड़े और सिले या  बुने हुए कपड़ों का आयात 86 अरब रुपये से 15 प्रतिशत बढ़कर 99 अरब रुपये हो गया। जैन ने कहा कि जीएसटी के बाद प्रभावी आयात शुल्कों में तेज गिरावट आई है, जिससे घरेलू उद्योग के लिए आयात 15-20 प्रतिशत तक सस्ता हो गया है।
 
सरकार ने केंद्रीय बजट में एक विशेष पैकेज में 19 प्रतिशत के इजाफे की घोषणा की थी, जो पहले 60 अरब रुपये था। हालांकि, 2016 में पैकेज की घोषणा करते हुए सरकार ने इसे रोजगार सृजन और निर्यात में वृद्धि के साथ जोड़ा था। सूती वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषद और लाहोटी ओवरसीज के चेयरमैन उज्जवल लाहोटी ने कहा कि 1 जुलाई, 2017 से बंद पड़े आईजीएसटी को तुरंत जारी करते हुए सरकार को पहले मुख्य मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। इससे कार्यशील पूंजी अवरुद्ध हो रही है। जैन ने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कायम रखने के लिए उद्योग को कपड़ों तथा सूती धागे के लिए आरओएसएल पैकेज और भारत वाणिज्यिक निर्यात योजना पर न्यूनतम दो प्रतिशत के रूप में तत्काल राहत की जरूरत है। इसके अलावा, आयात रोकने के लिए सरकार को मूल्य शृंखला पर तुरंत सीमा शुल्क लगाना चाहिए।
Keyword: textiles, कपड़ा एवं परिधान नीति,
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