बिजनेस स्टैंडर्ड - सीमा शुल्क में बढ़ोतरी, सालाना आयात पर असर
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सीमा शुल्क में बढ़ोतरी, सालाना आयात पर असर

ए के भट्टाचार्य /  02 18, 2018

अर्थव्यवस्था

कुल आयात में करीब एक-चौथाई हिस्सेदारी वाली वस्तुओं की 40 श्रेणियों पर सीमा शुल्क में बढ़ोतरी से सीमा शुल्क संग्रह पर पड़ेगा असर। ऐसे में 2018-19 में सीमा शुल्क संग्रह महज 19 फीसदी बढ़ेगा, जो चालू वर्ष की 25 फीसदी बढ़ोतरी से कम है

सीमा शुल्क में बढ़ोतरी से ज्यादातर उत्पादों पर 33 फीसदी से 100 फीसदी तक असर पड़ेगा
सीमा शुल्क बढ़ाने से देश के कुल आयात में से एक-चौथाई प्रभावित हो सकते हैं
आयात शुल्क बढऩे से हीरे और रत्नों का का आयात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा
हीरे और रत्नों का निर्यात में अहम योगदान है
मोबाइल के आयात में बढ़ोतरी की संभावना की से ही बजट में इन पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया है

बिजनेस स्टैंडर्ड सीमा शुल्क में बढ़ोतरी, सालाना आयात पर असरविभिन्न वस्तुओं के आयात पर सीमा शुल्क बढ़ाने के वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट फैसले का दायरा कितना व्यापक है और इस फैसले का 2018-19 में सरकार के सीमा शुल्क संग्रह पर क्या असर होगा? सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सीमा शुल्क में बदलाव का दायरा तुलनात्मक रूप से बड़ा है। लेकिन यह संभव है कि सीमा शुल्क संग्रह बजट के अनुमानित आंकड़े से अधिक रहा।

उत्पादों की 40 श्रेणियों परबुनियादी सीमा शुल्क 2 फरवरी, 2018 से बढ़ाया गया है। एक फरवरी के बजट भाषण के मुताबिक शुल्क में ये बदलाव घरेलू उद्योग को पर्यात सुरक्षा मुहैया कराने, 'मेक इन इंडिया' को प्रोत्साहित कर घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और देश में ज्यादा रोजगार अवसरों के सृजन में मदद के लिए किए गए हैं। शुल्क में बढ़ोतरी से ज्यादातर उत्पादों पर 33 फीसदी से 100 फीसदी तक असर पड़ेगा।

इतना ही नहीं, जेटली के इन वस्तुओं के आयात पर सीमा शुल्क बढ़ाने से देश के कुल आयात में से एक-चौथाई प्रभावित हो सकते हैं। जिन आयातित उत्पादों पर बुनियादी सीमा शुल्क बढ़ाया गया है, उनका 2017-18 की अप्रैल से नवंबर तक की अवधि में 75 अरब डॉलर का आयात होने का अनुमान है। यह 2017-18 के पहले 8 महीनों के कुल आयात 297 अरब डॉलर का करीब 25 फीसदी था।

वित्त वर्ष 2016-17 में इन 40 वस्तु श्रेणियों का आयात 85 अरब डॉलर रहा, जो उस साल के कुल आयात 384 अरब डॉलर का करीब 22 फीसदी था। उससे एक साल पहले इन उत्पादों के आयात की कीमत 88 अरब डॉलर थी, जिसका 2015-16 के कुल आयात 381 अरब डॉलर में 23 फीसदी हिस्सा रहा। वित्त वर्ष 2017-18 की औसत स्तर पर अप्रैल से नवंबर तक की अवधि के दौरान इन 40 श्रेणियों के तहत आने वाली वस्तुओं के आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। अगर चालू वर्ष के दौरान आयात में बढ़ोतरी 2016- 17 की रफ्तार से हुई होती तो चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में इन 40 वस्तु श्रेणियों का आयात केवल 56 अरब डॉलर पर पहुंचता। हालांकि आंकड़े दर्शाते हैं कि ये आयात समान अवधि में पहले ही 75 अरब डॉलर पर पहुंच चुके हैं, जो 34 फीसदी अधिक है।

बजट में आयात शुल्क बढ़ाने जाने से प्रभावित होने वाले आयात में सबसे बड़ा हिस्सा हीरे और रत्नों (अनगढ़ हीरों को छोड़कर) का है। ऐसे हीरे और रत्नों का आयात अप्रैल-नवंबर, 2017 में 50 अरब डॉलर (कुल आयात का करीब 17 फीसदी) रहने का अनुमान है, जबकि इनका आयात पूरे 2016- 17 में 54 अरब डॉलर और 2015- 16 में 56 अरब डॉलर रहा था। इन उत्पादों पर बुनियादी सीमा शुल्क 2.5 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हीरे और रत्नों का आयात, निर्यात से जुड़ा है। आयातित हीरे और रत्नों के एक बड़े हिस्से का मूल्य संवर्धन करने के बाद उसका निर्यात किया जाता है। लेकिन यह जुड़ाव पिछले कुछ वर्षों में प्रभावित हुआ है। हीरे और रत्नों का निर्यात 2017-18 की अप्रैल से नवंबर तक की अवधि में केवल 28 अरब डॉलर, 2016- 17 में 44 अरब डॉलर और 2015- 16 में 39 अरब डॉलर रहा। 2017- 18 में उससे पिछले दो वर्षों के मुकाबले आयात में निर्यात के मुकाबले ज्यादा तेज बढ़ोतरी हुई है।

सेल्युलर मोबाइल फोन पर सीमा शुल्क 15 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी और उनके पुर्जे एवं सहायक सामान पर सीमा शुल्क 7.5-10 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हो गया है। इनका आयात संयुक्त रूप से बढ़कर अप्रैल- नवंबर, 2017 में 12 अरब डॉलर हो गया है। अगर इस आंकड़े की 2015-16 और 2016-17 में प्रत्येक वर्ष में करीब 16 अरब डॉलर के आयात से तुलना करते हैं तो चालू वित्त वर्ष में इनके आयात में 12 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना नजर आ रही है। शायद इसी वजह से बजट में इन पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया है।

स्मार्ट घड़‍ियों और पहने जाने वाले उपकरणों पर सीमा शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। इनमें ऐपल द्वारा बनाई जाने वाली स्मार्ट घड़ि‍यां भी शामिल हैं। इनका आयात 2015-16 में अनुमानित 2.3 अरब डॉलर था, जो 2016-17 में मामूली रूप से बढ़कर 2.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया। लेकिन चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में यह 2.44 अरब डॉलर रहने का अनुमान है जो अच्छी बढ़ोतरी है।

मोटर वाहनों, मोटर कारों और मोटरसाइकिलों की एक्सेसरीज पर सीमा शुल्क 7.5-10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया है। इनका आयात 2016-17 में घटकर 6 अरब डॉलर रहा, जो 2015-16 में 6.49 अरब डॉलर था। लेकिन 2017-18 की अप्रैल-नवंबर अवधि में इनके आयात की रफ्तार तेज हुई है। इस अवधि में इनका आयात 4.95 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। वनस्पति खाद्य तेल एक अन्य ऐसी वस्तु श्रेणी है, जिसका बड़ा आयात होता है। बजट में इस पर सीमा शुल्क 12.5-20 फीसदी से बढ़ाकर 30 से 35 फीसदी किया गया है।

वनस्पति खाद्य तेलों का आयात लगातार बढ़ रहा है। यह वित्त वर्ष 2015-16 में 1.5 अरब डॉलर था, जो 2016-17 में 1.6 अरब डॉलर हो गया। बढ़ोतरी की रफ्तार जारी रखते हुए इनका आयात 2017-18 के पहले 8 महीनों में 1.3 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। बुनियादी सीमा में बढ़ोतरी के लिए चुने गए 40 उत्पादों की सूची में हीरे एवं रत्नों को छोड़कर बाकी का मुय रूप से घरेलू बिक्री और खपत में इस्तेमाल होता है। हीरे एवं रत्नों का निर्यात में अहम योगदान होता है।

लेकिन अगर आप इन्हें इन आयात के कुल मूल्य से निकाल देते हैं तो इन बढ़े सीमा शुल्कों का दायरा काफी घट जाएगा। हीरे एवं रत्नों के अलावा ऐसे उत्पादों का अनुमानित आयात 2015-16 में 31.58 अरब डॉलर, 2016- 17 में 31.13 अरब डॉलर और 2017-18 की अप्रैल-नवंबर अवधि में 24.63 अरब डॉलर रहा। कुल आयात में इनका हिस्सा इन वर्षों में घटकर करीब 8 फीसदी पर आ गया।

सरकार का अनुमानित बुनियादी सीमा शुल्क संग्रह 2017-18 में 807.5 अरब रुपये रहा, जो 2016-17 में 645.83 अरब रुपये के आयात से 25 फीसदी अधिक है। हालांकि सरकार ने अनुमान जताया है कि उसका बुनियादी सीमा शुल्क संग्रह 2017-18 में केवल 19 फीसदी बढ़कर 963 अरब रुपये रहेगा। वस्तुओं की 40 श्रेणियों के सीमा शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद अनुमान कम रखा गया है। इस बात को लेकर संदेह है कि इन वस्तुओं पर सीमा शुल्क में बढ़ोतरी से 'मेक इन इंडिया' को प्रोत्साहन के जरिये घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और देश में ज्यादा रोजगार सृजन के लक्ष्य हासिल हो पाएंगे। असल में कई विशेषज्ञों का कहना है कि शुल्क से घरेलू उत्पादन में अकुशलता को बढ़ावा मिल सकता है और प्रतिस्पर्धा रुक सकती है। हालांकि शुल्क में बढ़ोतरी के सरकार के राजस्व पर असर को लेकर कुछ स्पष्टता है। शुल्क में बढ़ोतरी से कुल सीमा शुल्क संग्रह 19 फीसदी वृद्धि के बजट अनुमान से ज्यादा रह सकता है।

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