बिजनेस स्टैंडर्ड - आधार से निजी जानकारी हटाने की मांग
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आधार से निजी जानकारी हटाने की मांग

किरण राठी /  February 13, 2018

देश के नागरिकों की विशिष्ट पहचान से जुड़ी परियोजना 'आधार' की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय में चल रही सुनवाई के बीच मेघालय के 1202 वासियों ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को पत्र लिखकर आधार में शामिल सभी निजी सूचनाओं को हटाने के लिए कहा है। उनका कहना है कि संस्था ने पंजीकरण के वक्त उनकी अनुमति नहीं ली थी। यूआईडीएआई को इस बाबत कई ईमेल भेजे गए हैं। मेघालय के इन लोगों का कहना है कि आधार में उनकी निजी सूचनाएं हटा ली जाएं और इसकी जानकारी उन सभी एजेंसियों या संगठनों को दे दी जाए जिनके पास आधार संख्या या दूसरी सूचनाएं साझा हुई हैं। उनका कहना है कि पंजीकरण के दौरान उनकी अनुमति नहीं ली गई थी। अगर वे अनुमति की बात पर राजी नहीं होते तब भी वे निजी डेटा आधार के डेटाबेस से हटाने का आग्रह करते हैं। 

 
यूआईडीएआई को अक्सर आधार रद्द करने या उसे निलंबित करने के लिए निवेदन किया जाता रहता है। हालांकि आधार अधिनियम, 2016 के मुताबिक किसी भी निवासी के द्वारा आधार संख्या छोडऩे/वापस करने का प्रावधान नहीं है लेकिन यूआईडीएआई ने कहा है कि इसका गलत इस्तेमाल रोकने के लिए अपनी शारीरिक पहचान यानी उंगली के निशान या आंखों की पुतलियों द्वारा पहचान (बायोमेट्रिक) को लॉक किया जा सकता है। यूआईडीएआई ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि आधार नामांकन और उसका अद्यतन आधार अधिनियम, 2016 और नियमन के मुताबिक ही किया गया है। भारत के निवासियों के लिए जारी की गई 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या को छोडऩे का कोई प्रावधान नहीं है। यूआईडीएआई ने लिखित जवाब में कहा, 'नागरिकों को सरकार या कानून के दायरे से बाहर होने का अधिकार नहीं है। कुछ लोग आयकर कानून को पसंद नहीं करते तो क्या वे पैन कार्ड का डेटा खत्म करने या उसे छोडऩे के लिए कह सकते हैं? या फिर वे अपने जन्म प्रमाणपत्र, कॉलेज या स्कूल डिग्री या पासपोर्ट का ब्योरा खत्म करने का निवेदन कर सकते हैं?'
 
आधार संख्या पाने वाले इसे छोड़ नहीं सकते हैं लेकिन यूआईडीएआई के पास यह अधिकार है कि वह आधार को रद्द या निलंबित कर दे। प्राधिकरण ने दोहराव, फर्जी पंजीकरण, शारीरिक पहचान से जुड़े अपवाद, जनसांख्यिकीय और आंखों की पुतलियों से जुड़े मामले की वजह से आधार संख्या को रद्द या निलंबित किया है। आधार अधिनियम, 2016 के कानून के तौर पर प्रभावी होने के बाद आधार को रद्द या निलंबित करने का अधिकार यूआईडीएआई के सीईओ के पास है।
Keyword: aadhaar, data, UIDAI,,
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