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बिटकॉइन से कमाएं तो 20 फीसदी अग्रिम कर भी चुकाएं

दिलाशा सेठ और सोमेश झा /  February 13, 2018

आभासी मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) को लेकर चल रही अनिश्चितताओं के बीच एक स्तर पर थोड़ी स्पष्टता आई है। आभासी मुद्रा को बेचकर बैंक बैंलेंस बढ़ाने वाले निवेशकों को आयकर विभाग की ओर से किसी भी तरह की कार्रवाई से बचने के लिए इससे होने वाली आय पर 20 प्रतिशत अग्रिम कर देना होगा। आभासी मुद्रा एक्सचेंज यूनोकॉइन के संस्थापक सात्विक विश्वनाथ कहते हैं, 'हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आभासी मुद्रा वस्तु, पूंजीगत ऐसेट या व्यापारिक आय में से क्या है और आयकर विभाग भी कोई अंतर नहीं कर रहा है। वे कह रहे हैं कि कि इससे कमाए धन पर सीधे 20 प्रतिशत का का अग्रिम कर चुका दें।'

 
आयकर विभाग ने हाल ही में कुछ एक्सचेंज से निवेशकों की जानकारी जुटाई थी और बिटकॉइन, इथीरियम, रिपल, लाइटकॉइन समेत दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग करने वाले हजारों लोगों को नोटिस भेजे थे। निवेशकों से दूसरे सवालों के साथ ही यह भी पूछा गया था कि क्या उन्होंने इस वर्ष और पिछले 2 वर्ष से लगातार वार्षिक आयकर रिटर्न भरते समय आभासी मुद्राओं से होने वाली आय का जिक्र किया है?  एक आयकर अधिकारी ने बताया, 'क्रिप्टोकरेंसी से आय पर कम से कम 20 प्रतिशत का अग्रिम कर देना ही चाहिए, क्योंकि दीर्घावधि पूंजीगत आय के लिए भी यही प्रावधान है। यदि आभासी मुद्रा को 36 महीनों से कम समय के लिए रखा जाता है तो इसका वर्णन आयकर रिटर्न में करना चाहिए, जिस तरह लघु अवधि पंूजीगत लाभ कर के लिए किया जाता है।'
 
अग्रिम कर का अर्थ है, वित्त वर्ष के समाप्त होने का इंतजार किए बगैर जब आय हो, तभी कर भी चुका दिया जाए। अग्रिम कर चुकाने की 4 तिथियां जून, सितंबर, दिसंबर और मार्च महीने की 15 तारीख है। इसलिए यदि आप 15 दिसंबर के बाद बिटकॉइन बेचते हैं तो इससे हुई आय पर 15 मार्च तक अग्रिम कर का भुगतान करना होगा। आभासी मुद्रा को 36 महीने से अधिक समय तक रखने पर इस पर 20 प्रतिशत दीर्घावधि पूंजीगत आयकर लगेगा, जबकि 3 वर्ष से कम समय पर 30 प्रतिशत का लघु अवधि पूंजीगत आयकर लगेगा।
 
सभी निवेशक और एक्सचेंज इस पर स्पष्टता चाहते हैं कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर किस तरह से व्यवहार करेगी। हालांकि सरकार और आरबीआई यह कह चुके हैं कि अभी इसे मुद्रा के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बीच, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज व्यवस्था का हिस्सा होने के लिए उत्सुक हैं। मई 2016 में, आरबीआई ने एक बिटकॉइन एक्सचेंज जेबपे से कहा था, 'बिटकॉइन को वस्तु या सेवा में से क्या समझा जाए इसे स्पष्ट करने के लिए उसने विदेशी व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) से कहा है। अगर कंपनी बिटकॉइन में जिंस की तरह व्यापार करती है तो उसे फॉवर्ड मार्केट कमीशन से इस पर स्पष्टता लेनी होगी।' इसके बाद, सितंबर 2016 में डीजीएफटी ने जेबपे को लिखित रूप में कहा था कि इस पर वित्तीय सेवाओं के विभाग से स्पष्टता लें।
 
एक्सचेंज लगा रहे जीएसटी
 
नियामकीय प्रक्रियाओं के अभाव के बाद भी वस्तु एवं सेवाकर (जाएसटी) आभासी मुद्रा के संसार का हिस्सा है। एक्सचेंज लेनदेन शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा रहे हैं, जो 0.3 प्रतिशत से लेकर 2 प्रतिशत तक होता है। यह, आईटी सेवाओं के समकक्ष है, जिन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। आभासी मुद्रा एक्सचेंज कॉइनसिक्योर के सह-संस्थापक मोहित कालरा कहते हैं, 'हम लेनदेन शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी ले रहे हैं।' कालरा बताते हैं कि अक्टूबर में जीएसटी विभाग मुंबई ने उनसे पूछा था कि वे किस तरह से जीएसटी लगा रहे हैं। वह बताते हैं, 'हमने उन्हें सारी जानकारी दी और बताया कि हम किस प्रकार से जीएसटी की गणना करते हैं।' एक्सचेंजों का कहना है कि आभासी मुद्रा अपनी प्रकृति में विशिष्ट हैं और सरकार को अभी यह निर्धारित करना है कि इसे किस श्रेणी में रखा जाए।
 
निशीथ देसाई एसोसिएट्स में पार्टनर वैभव पारिख ध्यान दिलाते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी की प्रकृति के आधार पर जीएसटी निर्भर करेगा। वह कहते हैं, 'अगर आप जीएसटी को देखते हैं तो इसमें बिटकॉइन कहीं भी मौजूद नहीं है। इसलिए यह 'शेष' श्रेणी में आता है जिन पर 18 प्रतिशत कर लगता है। अगर आप इसे वस्तु के तौर पर देखते हैं तो उस श्रेणी के अनुसार जीएसटी लगेगा।' हालांकि वह कहते हैं कि बहुत हद तक इसे वस्तु के तौर पर देखा जा सकता है।
 
तिमाही ऑडिट रिपोर्ट जरूरी
 
सरकार यह आवश्यक कर सकती है कि क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज तिमाही रूप से आयकर विभाग तथा आरबीआई को अपनी ऑडिट रिपोर्ट सौंपें। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अगर एक्सचेंज तिमाही आंकड़े उपलब्ध कराते रहेंगे तो कोई समस्या नहीं होगी। बैंकों की तरह ही इस मामले में भी तिमाही ऑडिट रिपोर्ट जरूरी हो सकती है।' आभासी मुद्रा उद्योग सरकार से स्व-नियमन की बात कर रहा है जिससे वह रिजर्व बैंक जैसी किसी नियामकीय संस्था को रिपोर्ट सौंप सके। नियमन के अभाव में बैंक लगातार क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के खाते बंद कर रहे हैं।
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