बिजनेस स्टैंडर्ड - महिला ग्राहकों को लुभाते और पकड़ बनाते ब्रांड
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महिला ग्राहकों को लुभाते और पकड़ बनाते ब्रांड

टी ई नरसिम्हन /  February 13, 2018

लंबे समय से खेलों का परिधान बनाने वाली कंपनियों की नजर पुरुषों पर ही टिकी रही है लेकिन अब खेल एवं फिटनेस के प्रति महिलाओं का भी रुझान बढऩे से स्पोट्र्सवियर ब्रांड महिला ग्राहकों को भी पूरी तवज्जो देने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की क्रयशक्ति बढऩे से भी खेल परिधान बनाने वाली वैश्विक एवं घरेलू कंपनियों ने आधी आबादी को अपनी रणनीति में प्रमुखता देनी शुरू कर दी है।  जहां कुछ कंपनियां अपने ब्रांड के बारे में संदेश देने के लिए महिलाओं की आवाज का इस्तेमाल कर रही हैं वहीं कुछ कंपनियां खेलों की दुनिया में अलग मुकाम बना चुकी महिला खिलाडिय़ों को जगह दे रही हैं। खेल परिधान कारोबार से जुड़े सभी पक्षों को अपनी ब्रांडिंग, उत्पादों की डिजाइन और खुदरा बिक्री रणनीति पर नए सिरे से गौर करना पड़ रहा है।
 
प्यूमा इंडिया की मार्केटिंग प्रमुख देवस्मिता मजूमदार कहती हैं, 'हमें कारोबार के एक अलग हिस्से के तौर पर महिला परिधान की संभावनाओं का अहसास 2016 में हुआ था। उसके बाद से ही हमार मार्केटिंग एवं अन्य तरीकों से इस वर्ग पर ध्यान दे रहे हैं।' प्यूमा के अलावा दूसरी कंपनियां भी यही कर रही हैं। वुड्स एवं वुडलैंड नाम से परिधान बनाने वाली कंपनी एयरो ग्रुप के प्रबंध निदेशक हरकीरत सिंह कहते हैं, 'आज हम खास महिलाओं के लिए अलग उत्पाद लेकर ही नहीं आ रहे हैं बल्कि हमारे अभियान में भी महिलाओं की खास हिस्सेदारी होती है।' उनकी कंपनी के 40 फीसदी उत्पादों का डिजाइन महिलाओं को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। 
 
वैसे भारत में महिला स्पोट्र्सवियर का बाजार अभी काफी छोटा है लेकिन इस कारोबार में लगी कंपनियों का मानना है कि काफी तेजी से बढ़ते इस बाजार को नजरअंदाज करना बड़ी बेवकूफी होगी। लंबे समय तक स्पोट्र्सवियर बाजार पर पुरुषों का ही कब्जा रहा है। उन दिनों या तो महिलाओं को इन उत्पादों में से ही अपने लिए खरीदारी करनी पड़ती थी या फिर वे इन्हें खरीदने से परहेज ही करती थीं। उसके बाद इन कंपनियों ने पुरुषों के लिए बनाए जाने वाले उत्पादों के डिजाइन को ही अपेक्षाकृत छोटे आकार और महिलाओं के पसंदीदा रंगों में पेश करने की रणनीति अपना ली। 
 
बेंगलूरु के ब्रांड सलाहकार हरीश बिजूर कहते हैं, 'पहले आम तौर पर किसी स्टोर के 90 फीसदी हिस्से में पुरुषों के कपड़े रखे होते थे लेकिन अब महिला परिधानों को भी बराबर स्थान मिलता है। कुछ स्टोर तो महिलाओं के लिए पूरा एक फ्लोर ही अलग रखने लगे हैं।' मौजूदा दौर में अधिक महिलाएं नौकरी एवं रोजगार करने लगी हैं लिहाजा उनकी क्रयशक्ति भी बढ़ गई है। इसके अलावा कैजुअल स्टाइल वाले एथलेटिक कपड़ों और फिटनेस एवं ट्रेनिंग परिधानों के प्रति महिलाओं का रुझान भी बढ़ा है। प्यूमा इंडिया के प्रबंध निदेशक अभिषेक गांगुली ने कुछ समय पहले यह उम्मीद जताई थी कि वर्ष 2018 खत्म होने तक महिला परिधान कारोबार 30 फीसदी की वृद्धि दर हासिल कर लेगा। प्यूमा ने बॉलीवुड की उभरती अभिनेत्री दिशा पटानी को अपने विज्ञापन का जिम्मा सौंपा है। इसके साथ ही कंपनी जल्द ही महिलाओं पर केंद्रित प्रचार अभियान भी शुरू करने वाली है।
 
रीबॉक और नाइकी जैसे वैश्विक ब्रांड पहले ऐसा कर चुके हैं। एक साल पहले रीबॉक ने अभिनेत्री कंगना रनौत को अपना ब्रांड ऐंबेसडर बनाने के साथ ही केवल महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित खास स्टोर भी शुरू किए थे। नाइकी ने भी अभिनेत्री दीपिका पडुकोणे को प्रमुख स्थान देते हुए महिला एथलीटों पर केंद्रित अभियान चलाया था।  हरकीरत सिंह का कहना है कि अधिक आकांक्षी और उत्पादों के मूल्य को लेकर जागरूक होने के बावजूद महिलाएं कहीं अधिक निष्ठावान उपभोक्ता होती हैं। इसी का असर है कि आज के समय में वुड्स और वुडलैंड के कुल कारोबार का 35 फीसदी हिस्सा महिला ग्राहकों के जरियेे आ रहा है जबकि कुछ साल पहले तक यह 15-20 फीसदी ही हुआ करता था। हरकीरत कहते हैं, 'अगले एक-दो साल में हमारा 50 फीसदी कारोबार महिला ग्राहकों के जरिये होने लगेगा और जल्द ही यह समूह पुरुषों को पीछे भी छोड़ देगा।'
 
आउटडोर एवं एडवेंचर उत्पादों के भारतीय ब्रांड वाइल्डक्राफ्ट के मालिक सिद्धार्थ सूद और गौरव डबलिश भी नए उपभोक्ता समूह को लेकर खासे आशावान हैं। वाइल्डक्राफ्ट का कारोबार 30-35 फीसदी की तेजी से बढ़ रहा है लेकिन महिला उत्पादों की वृद्धि दर 40-50 फीसदी के करीब हो चुकी है। 
 
फैशन और फिटनेस 
 
महिलाओं के बीच खेल एवं फिटनेस गतिविधियों के प्रति रुझान बढऩे से स्पोट्र्सवियर ब्रांडों का उन पर खास ध्यान जा रहा है। वाइल्डक्राफ्ट ने इस प्रवृत्ति को भुनाने के इरादे से ऐक्टिव लाइफस्टाइल नाम से महिलाओं के लिए एकदम अलग फुटवियर रेंज ही जारी कर दी है। इस रेंज में हाइकिंग एवं ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने वाले खास बूट भी शामिल हैं। सिद्धार्थ सूद कहते हैं, 'हमने सर्दियों के दौरान महिलाओं के लिए खास उत्पादों की अपनी रेंज बढ़ाई है। उन्हें खरीदारों की अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है।' वहीं गौरव का कहना है कि इस साल उनका ब्रांड महिलाओं पर अधिक केंद्रित हो जाएगा। 
 
बिजूर की मानें तो आने वाले समय में इस समूह का कारोबार काफी हद तक महिला-केंद्रित हो सकता है। उनका कहना है कि जल्द ही खेल एवं फिटनेस परिधान कंपनियों के स्टोर में 60 फीसदी स्थान महिला ग्राहकों के लिए आवंटित होने लगेगा जबकि पुरुषों के लिए 40 फीसदी जगह ही बची रह जाएगी।  कंपनियों का कहना है कि महिलाओं को ध्यान में रखने की वजह से उत्पादों का डिजाइन खासी अहम भूमिका में आ जाएगा। प्यूमा की देवस्मिता कहती हैं, 'स्पोट्र्स एवं फिटनेस ब्रांड होने का यह मतलब नहीं है कि हम फैशन पर ध्यान देने से परहेज करेंगे।' इसी वजह से प्यूमा अपने उत्पादों को फैशन के मुताबिक ढालने और अधिक नवाचारी बनाने की कोशिश कर रहा है।
 
हरकीरत का मानना है कि महिला ग्राहकों की जरूरतों पर ध्यान देकर कंपनियां अपना दायरा बढ़ाने में सफल हो सकती हैं। वह कहते हैं कि अगर कंपनियां लोगों की सोच बदलने में सफल हो पाती हैं तो वे एक साथ परिवार के सभी सदस्यों की पसंद बन सकती हैं। महिलाएं भी अब अपने लुक और पसंद को लेकर कुछ नया आजमाने की सोच रखने लगी हैं जिसके चलते कंपनियों को डिजाइन और वेराइटी पर खास ध्यान देना जरूरी हो गया है। अधिकांश कंपनियों का मानना है कि महिलाओं पर केंद्रित मार्केटिंग रणनीति अपनाने से ब्रांड को लैंगिक भेदभाव वाले मुद्दों से भी जोड़ा जा सकता है। मसलन, प्यूमा महिलाओं को पेश आने वाली रोजमर्रा की समस्याओं को उठाने के लिए अलग शख्सियतों को अपने साथ जोडऩा चाहता है। देवस्मिता कहती हैं कि ऐसी शख्सियतों की बातों का गहरा असर होता है। हम रीबॉक को भी ऐसी ही रणनीति अपनाते हुए देख चुके हैं। कंगना ने लड़कियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ और पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम वेतन मिलने जैसे मुद्दों को उठाया था। वाइल्डक्राफ्ट भी इसी रास्ते पर चलते हुए महिलाओं से संबंधित मुद्दों को स्वर देने की योजना बना रहा है।
Keyword: brand, woodland, women,,
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