बिजनेस स्टैंडर्ड - चीन के पहिये और भारत में सवारी
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चीन के पहिये और भारत में सवारी

ऋषभ कृष्ण सक्सेना / ग्रेटर नोएडा 02 11, 2018

छोटे शहरों पर नजर

चीन और दूसरे एशियाई देशों से उत्पाद ला रहीं कई नई-नवेली दोपहिया कंपनियां
विनिर्माण के बजाय केवल असेंबलिंग संयंत्रों से चल रहा काम, कुछ के पास आरऐंडडी भी नहीं
चीन से आयातित गाडि़यों पर अपना ठप्पा लगाकर बेचने का उद्योग सूत्र लगा रहे आरोप
भारतीय होने का दावा मगर 40 से 65 फीसदी तक पुर्जे आ रहे चीन से

रियल्टी, ट्रेडिंग आदि कारोबारों की फर्में सस्ते विदेशी पुर्जों के बल पर उतरीं दोपहिया उद्योग में

एक समय था, जब भारत में ढेरों छोटी-बड़ी मोबाइल फोन कंपनियां आ गई थीं। वे चीन से सस्ते फोन मंगाकर अपने नाम से बाजार में बेचती थीं और अच्छा मार्जिन कमा लेती थीं। अब दोपहिया बाजार में भी कई छोटी देसी कंपनियां उसी तरह के नुस्खे पर काम कर रही हैं। एक से तीन साल पुरानी ये कंपनियां चीनी पुर्जों के दम पर 'किफायती' बाइक उतार रही हैं। ऑटो एक्सपो में क्लीवलैंड साइकलवर्क्‍स, एफ्टेक मोटर्स, ओकीनावा स्कूटर्स, पुबांग ईट्रॉन समेत कई नई कंपनियां आई हैं, जिनके उत्पादों में चीन या दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के पुर्जों की अच्छी-खासी संख्या है। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जो चीन से समूचा इंजन या समूची गाड़ी ही मंगाकर यहां बेच रही हैं।

हैदराबाद की कंपनी लैश मैडिसन मोटरवर्क्‍स अमेरिका की क्लीवलैंड साइकलवर्क्‍स के उत्पाद भारत में ला रही है। अगले वित्त वर्ष में दोपहिया बाजार में प्रवेश की मंशा रखने वाली कंपनी ने ऑटो एक्सपो में रेट्रो लुक वाली कई बाइक दिखाईं, जिनमें अधिकतर की कीमत 2 लाख रुपये से शुरू होती है। कंपनी का दावा है कि उसकी बाइक में यूरोप और एशिया के कई देशों से आयातित पुर्जे इस्तेमाल किए गए हैं।

लैश मैडिसन मोटर वर्क्‍स इंडिया के चेयरमैन संदीप बुडाला ने बताया कि उनकी कंपनी पुणे में गाडिय़ां असेंबल करेगी। पहले साल में केवल 5,000 गाडिय़ां असेंबल करने और बेचने की उनकी योजना है। अमेरिकी कंपनी क्लीवलैंड चीन से ही अपनी बाइक के इंजन, फ्रेम और अन्य पुर्जे बनवाती रही है। बुडाला ने भी स्वीकार किया कि बाइक सीकेडी के रूप में लाई जाएंगी और एक बाइक में तो अधिकतर पुर्जे और हिस्से चीन से ही लगाए जा रहे हैं।

बाइक बाजार में पिछले कुछ समय से खासी उछाल आई है और दूसरे कारोबारों से जुड़ी कंपनियां भी उसका फायदा उठाना चाहती हैं। चीन और अन्य पड़ोसी देशों से आने वाले सस्ते इंजन और पुर्जे उनके लिए रामबाण का काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में लखनऊ की एफ्टेक मोटर्स को ही लीजिए। यह लखनऊ की रियल्टी कंपनी एफ्टेक डेवलपर्स की सहायक कंपनी है, जिसका हाल ही में गठन किया गया है। फिलहाल यह कंपनी लखनऊ में कारखाना बना रही है। कंपनी को इसी साल अप्रैल में कारखाना तैयार होने और पहली बाइक बाजार में आने की उम्मीद है। 

एफ्टेक मोटर्स के मुख्य कार्य अधिकारी विपिन चौधरी का दावा है कि उनके पास करीब 150 कर्मचारियों की शोध-विकास (आरऐंडडी) टीम है, जो भारत के माफिक बाइक तैयार कर रही है। एफ्टेक की अमूमन सभी बाइक में 60 फीसदी पुर्जे भारत के और 40 फीसदी चीन आदि देशों के हैं। कंपनी 110 सीसी से 250 सीसी तक की बाइक लाएगी और 250 सीसी बाइक में 60 फीसदी से ज्यादा पुर्जे चीन से आएंगे। हालांकि चौधरी यह भी कह रहे हैं कि धीरे-धीरे सभी पुर्जे भारत में ही बनने लगेंगे। एफ्टेक का कहना है कि उसकी गाड़‍ियों की डिजाइन भी भारत में नहीं बल्कि इटली में तैयार होती है।

पुर्जों के लिए नई कंपनियां चीन पर ही निर्भर नहीं हैं। गुड़गांव की ओकीनावा स्कूटर्स वियतनाम से भी पुर्जे मंगाती है। उसका जापान से भी कारोबारी रिश्ता है। कंपनी करीब 160 डीलरों का नेटवर्क तैयार कर रही है और भारत में दो ई-स्कूटर पहले ही बेच रही है। उसने ई-बाइक का नमूना भी तैयार किया है। ओकीनावा के संस्थापक और प्रबंध निदेशक जीतेंद्र शर्मा ने कहा कि उनकी गाड़ि‍यां राजस्थान के अलवर स्थित संयंत्र में ही बनेंगी, लेकिन पुर्जे चीन, वियतनाम आदि से भी आएंगे क्योंकि भारत में ई-दोपहिया के लिए पुर्जे बनाने वाले बहुत कम हैं।

शर्मा की यह बात तो सही है कि भारत में ई-बाइक के पुर्जे बनाने वाले बहुत कम हैं। ई-ऑटो और स्कूटर बनाने वाली कोलकाता की कंपनी पुबांग ईट्रॉन तो खुलकर कहती है कि उसका आरऐंडडी संयंत्र भी चीन में ही है और उसकी वेबसाइट बताती है कि अधिकतर उत्पाद वहीं से आयात होते हैं। लेकिन पेट्रोल बाइक के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता समझ नहीं आती। दोपहिया उद्योग के वरिष्ठ अधिकारी इसे कुछ अरसा पहले आई 'बजट फोन क्रांति' से जोड़ते हैं। उस समय तमाम कंपनियां चीन से आए बेहद सस्ते फोन पर अपना ठप्पा लगाकर बेच रही थीं।

उद्योग सूत्र बताते हैं कि खुद को 'अमेरिकी या यूरोपीय कंपनी' बताने वाले कुछ नए खिलाड़ी वही काम कर रहे हैं। चीन में चोंगचिंग एक्सक्रॉस और ताइवान में सीपीआई मोटर जैसी कुछ कंपनियां ठेके पर मनचाही बाइक तैयार कर रही हैं। चीनी ई-कॉमर्स दिग्गज अलीबाबा के प्लेटफॉर्म पर ये कंपनियां इस बाबत बाकायदा विज्ञापन भी देती हैं। ये कंपनियां किसी का भी ठप्पा लगाने को तैयार हैं। भारत में भी कुछ छोटी कंपनियां उन्हीं से बाइक लेकर अपने नाम से बेच रही हैं क्योंकि इनमें 40-45 फीसदी तक मार्जिन मिल जाता है। यही वजह है कि कई कंपनियां आरऐंडडी या डिजाइन केंद्र के बगैर ही काम कर रही हैं।

आयातित पुर्जे भी मार्जिन का गणित दुरुस्त कर देते हैं। मसलन एफ्टेक मोटर्स की 110 सीसी की बाइक 44,000 रुपये से भी कम में शुरू होती है, जो उसी श्रेणी की दूसरी बाइक से 15 फीसदी तक सस्ती हैं। उसकी 250 सीसी की बाइक भी अन्य बाइक से 7-8 फीसदी सस्ती है, जो कम रकम नहीं होती। हालांकि कंपनी के सीईओ चौधरी का कहना है कि कंपनी अपने मार्जिन पर चोट खाकर कीमत कम रख रही है ताकि बाजार में पैठ बनाई जा सके।

इन कंपनियों के लक्ष्य भी बहुत बड़े नहीं हैं। एफ्टेक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना में डीलर बना चुकी है, लेकिन पहले छह महीने में वह केवल 10,000 बाइक बेचना चाहती है। क्लीवलैंड के बुडाला तो पहले साल में बमुश्किल 5,000 बाइक बिकने की उम्मीद कर रहे हैं। मजे की बात है कि इनमें से अधिकतर कंपनियां चीनी माल को कोसती भी हैं। ओकीनावा के शर्मा का कहना है कि चीनी ठप्पा अच्छा नहीं है और जैसे ही पुर्जे बनाने वाले भारत में बढ़ेंगे, उनकी कंपनी पूरी तरह भारतीय उत्पाद हो जाएगी।
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