बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी पर 'लचर' रवैये के लिए सरकार को फटकार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, July 23, 2018 03:10 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

जीएसटी पर 'लचर' रवैये के लिए सरकार को फटकार

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली February 09, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन के बाद करदाताओं को हुई असुविधाओं के लिए बंबई उच्च न्यायालय ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। इस संबंध में एक करदाता की याचिका पर न्यायालय ने तीखे शब्दों में कहा कि जीएसटी प्रणाली करदाताओं के लिए सरल नहीं है, इसलिए उनकी शिकायतों के निवारण के लिए एक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था देश की छवि और प्रतिष्ठïा को नुकसान पहुंचा रही है। उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे समय में जब देश खुले दिमाग से विदेशी निवेशकों का स्वागत कर रहा है, जीएसटी के बाद पेश आई दिक्कतें दूर करने के लिए एक ढांचा तैयार करना अति आवश्यक हो गया है। 
 
रोबोटिक एवं ऑटोमेशन उपकरण कंपनी एबिकॉर ने एक रिट याचिका दायर की थी। कंपनी ने इसमें जीएसटी नेटवर्क पर पंजीयन और कर चुकाने में आई कठिनाइयों का जिक्र किया। जीएसटी नेटवर्क नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लिए सूचना-प्रौद्योगिक ढांचा मुहैया करा रहा है। न्यायालय ने इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने में पेश आ रही दिक्कतों पर भी चिंता जताई। न्यायालय ने कहा, 'जीएसटी का खूब प्रचार हुआ और इसे लोकप्रिय करार दिया गया। अगर करदाताओं को जीएसटी से जुड़ी वेबसाइटों और इसके पोर्टल तक आसानी से पहुंचने में असुविधा हो रही है तो संसद का विशेष सत्र और जीएसटी परिषद की असाधारण बैठक बुलाने का कोई औचित्य नहीं है।' 
 
अब जीएसटी क्रियान्वयन को आठ महीने हो पूरे हो चुके हैं, लेकिन उद्योग जगत रिटर्न जमा करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने और इलेक्ट्रॉनिक वे (ई-वे) बिल आदि से जुड़ी दिक्कतों की शिकायतें कर रहे हैं। तकनीकी दिक्कतें आने की खबरों के बीच सरकार को देश भर में ई-वे बिल लागू होने के पहले ही दिन इसे अगले निर्देश तक के लिए टाल दिया। उद्योग जगत को अब भी ट्रांजिशनल क्रेडिट और इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड मिलने का इंतजार है। जीएसटी लागू होने से पहले जमा भंडार पर ट्रांजिशनल क्रेडिट 1.3 लाख करोड़ रुपये है। 
 
न्यायालय ने मौजूदा हालात पर चिंता जताई और उम्मीद जताई कि जीएसटी क्रियान्वयन और इसके प्रशासनिक पक्षों को देख रहे लोग और इकाइयां नींद से जागेंगी और आवश्यक व्यवस्था करेंगे। न्यायालय ने कहा, 'देश की छवि और साख और प्रतिष्ठïा बरकरार रखने के लिए आवश्यक उपाय करना जरूरी है। खासकर ऐसे समय में यह बात और महत्त्वपूर्ण हो जाती है जब हम विदेशी निवेश आमंत्रित कर रहे हैं और विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कंपनियों के बेहतर नतीजे अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.