बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-वे बिल की समस्या
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 17, 2018 11:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

ई-वे बिल की समस्या

संपादकीय /  February 08, 2018

इलेक्ट्रॉनिक वे (ई-वे) बिल की व्यवस्था को 1 फरवरी से अनिवार्य करने के बाद भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ और उसी शाम इसे टाल दिया गया। यह घटना वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के आधे-अधूरे क्रियान्वयन और उससे जुड़ी चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है। 50,000 रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं के  परिचालन के लिए ई-वे बिल को अनिवार्य करने की खातिर 1 फरवरी की तारीख चुनी गई थी क्योंकि जीएसटी के शुरुआती क्रियान्वयन से जुड़ी दिक्कतों में कमी आनी शुरू हो गई थी। 

 
दिसंबर में इस तारीख के चयन के बाद से ही इसे हासिल कर पाना चुनौतीपूर्ण लग रहा था। उसी वक्त 15 राज्यों ने भी साथ ही साथ अंतरराज्यीय ई-वे बिल की व्यवस्था लागू करने के लिए समान तिथि पर हामी भर दी थी। केंद्र को यह मालूम था कि नेटवर्क इस बोझ को सहन करने की स्थिति में नहीं है। इसके बावजूद केंद्र सरकार अपनी तय समय-सीमा पर टिकी रही। इससे पता चलता है कि वह जमीनी हकीकतों को लेकर सही आकलन करके नहीं चल रही। अभी चंद रोज पहले जीएसटीएन पोर्टल गुजरात समेत कई राज्यों में ध्वस्त हो गया जिससे ट्रकों का परिवहन लगभग ठहर ही गया। देशव्यापी स्तर पर दोबारा यही कहानी दोहराई गई। बजट के चलते मीडिया भी इसे जरूरी तवज्जो नहीं दे सका।
 
अब सरकार द्वारा ई-वे बिल की व्यवस्था को एक बार पुन: अनिश्चितकाल के लिए टाल देने से कई नए मुद्दे सामने आ गए हैं। सबसे पहली बात, प्रक्रिया के रूप में देखें तो ई-वे बिल की आवश्यकता, पुरानी व्यवस्था में किसी खास सुधार की ओर संकेत नहीं करती। बल्कि यह केवल वैट व्यवस्था के दिनों के वे बिल का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण मात्र है और विडंबना देखिए कि अधिकारियों की जांच के लिए इसका प्रिंट आउट साथ रखना भी अनिवार्य है। इस बात से समझा जा सकता है कि आखिर अंतरराज्यीय चौकियों पर वाहनों की लंबी कतारें कम क्यों नहीं हुई हैं। 
 
विडंबना यह भी है कि  ई-बिल का लक्ष्य ऐसे गतिरोधों को समाप्त करना भी था। इसकी मदद से ट्रांसपोर्टरों की परेशानी कम की जानी थी और साथ ही कम इनवॉइसिंग और कर वंचना की समस्या को भी समाप्त किया जाना था। ई-वे बिल इस समस्या को मजबूती से हल नहीं कर पाया है। दूसरा, सरकार अब अन्य विकल्प तलाश रही है। इनमें इसका अंतरराज्यीय परिचालन  शुरू करने के पहले राज्य के भीतर आवागमन और नेटवर्क की भार वहन क्षमता की जांच की जानी आवश्यक है। शुरुआत में ई-वे बिल को उच्च मूल्य वस्तुओं के आवागमन के लिए सीमित किए जाने की संभावना है। इन बातों से यह सवाल जाहिर तौर पर उठता है कि आखिर सरकार ने पहले इन पर विचार क्यों नहीं किया। अगर ऐसा होता तो कारोबार भी प्रभावित नहीं होता और सरकार को भी शर्मिंदगी का सामना नहीं करना पड़ता।
 
नेटवर्क में बार-बार आ रही समस्या, खासतौर पर जब फाइलिंग की तय सीमा करीब हो, उससे यही संकेत मिलता है कि सरकार शायद वस्तुओं के आवागमन पर नजर रखने के लिए अन्य विकल्प तलाश कर सकती है जो जीएसटीएन नेटवर्क पर बोझ न डाले। वस्तुओं और माल के लिए आरएफडीआई टैग एक विकल्प हो सकता है। हालांकि यह सच है कि ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए एक सक्षम नेटवर्क चाहिए। याद रहे कि आरएफआईडी टैग की प्रस्तुति को सन 2007 में नए वाहनों के यातायात प्रबंधन और ड्राइविंग लाइसेंस के  जरिये के रूप में देखा गया था। अब इन लक्ष्यों को एक देशव्यापी नेटवर्क में मिलाया जा सकता है। ई-वे बिल की विफलता बताती है कि सरकार को तत्काल रचनात्मक विकल्प तलाशने होंगे ताकि जीएसटी के फायदे खराब क्रियान्वयन की भेंट न चढ़ जाएं।
Keyword: e way bill, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दुग्ध निर्यात पर प्रोत्साहन का किसानों को मिलेगा लाभ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.