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एनटीपीसी ने पराली आधारित ईंधन आपूर्ति के लिए बोलियां आमंत्रित की

भाषा / नई दिल्ली February 08, 2018

देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दादरी में 2,650 मेगावाट क्षमता के बिजलीघर के लिए प्रतिदिन 1,000 टन पराली आधारित ईंधन की खरीद के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। देश में वायु प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच कंपनी ने यह पहल की है। इससे जहां एक तरफ वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी, वहीं किसानों को पराली के निपटान का एक बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा और कमाई के अतिरिक्त स्रोत सृजित होंगे। कंपनी प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, बोयोमास आधारित गोलों (पेलेट्स) के परीक्षण के शुरूआती चरणों को पूरा करने के बाद एनटीपीसी ने 1,000 टन पराली आधारित ईंधन की आपूर्ति के लिए बोलियां आमंत्रित कीं हैं। इसमें प्रतिदिन 500 टन कृषि अपशिष्ट आधारित गोले तथा 500 टन प्रति टोरीफाइड कृषि अपशिष्ट गोले या बट्टे (ब्रिकेट्स) हैं। टोरिफिकेशन एक प्रक्रिया है जिसमें लकड़ी या बायोमास को गर्म कर उसमें से नमी को हटाया जाता है। इससे ऐसा उत्पाद बनता है जो ईंधन का काम करता है और उसका उपयोग कोयला आधारित बिजलीघरों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

कंपनी के अनुसार यह निविदा दो साल के लिए होगी। इसके तहत 1,000 टन पेलेट प्रतिदिन के लिए कीमत सीमा 5,500 रुपये प्रति टन रखी गई है। वहीं, टोरिफिकेशन प्रक्रिया से पराली के जरिये बनने वाले गोले या बट्टी के लिए 6,600 रुपये प्रति टन की सीमा रखी गई है। भारत उन कुछ गिने-चुने देशों में शामिल हैं जहां वायु प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक है। देश के उत्तरी भाग खासकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में पराली को खुले में जलाना वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक माना गया है। धान की फसल कटाई के बाद खेतों में पराली शेष रह जाती है। उसका तना, जड़, ठूंट आदि शेष रह जाती है जिसे किसान जलाकर नष्ट करते हैं, उससे उठने वाले धुएं को प्रदूषण की बड़ी वजह माना जाता है।

समस्या की गंभीरता को समझते हुए एनटीपीसी ने अपने बिजलीघरों में कोयला के साथ पराली आधारित ईंधन के उपयोग की योजना बनाई है। इस बारे में सरकार ने परामर्श जारी कर तापीय बिजलीघरों में 5 से 10 प्रतिशत कृषि अपशिष्ट आधारित ईंधन के उपयोग की बात कही है। इसमें स्टार्ट-अप को आकर्षित करने के लिए एनटीपीसी ने वैसे बोलीदाताओं को भी बोली लगाने की अनुमति दी है जिनके पास पहले से कोई अनुभव नहीं है। इस बोली में कंपनियां, राज्य या केंद्र के उपक्रम, व्यक्तिगत या भागीदार कंपनियां, गैर सरकारी संगठन, न्यास, सहकारी संस्थान, कल्याणकारी संस्थान, सीमित जवाबदेही भागीदारी वाली कंपनियां भाग ले सकती हैं। लेकिन इसके लिए उनके पास जीएसटीआईएन तथा पैन होना चाहिए।

बोली में नई विनिर्माण क्षमता सृजित करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। इसके तहत सफल बोलीदाताओं को सितंबर 2018 से सामग्री उपलब्ध करानी होगी। पुन: एनटीपीसी ने कुल मांग को छोटे लॉट 20 टन प्रतिदिन में बांटा है। एक बोलीदाता कितनी भी लाट के लिए बोली लगा सकता है लेकिन यह संख्या 12 से अधिक नहीं होगी। इसका मकसद ज्यादा-से-ज्यादा बोलीदाता को इसके लिए आकर्षित करना है। एनटीपीसी अगर जरूरी मात्रा के लिए पर्याप्त बोलीदाता को आकर्षित करने में सफल रहती है, इससे देश भर में बिजली घरों में पराली के उपयोग का रास्ता साफ होगा। इससे देश में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी और तापीय बिजलीघरों से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

Keyword: एनटीपीसी, पराली, ईंधन आपूर्ति, बिजली उत्पादक, दादरी, बिजलीघर, वायु प्रदूषण,
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