बिजनेस स्टैंडर्ड - रसीद ही काफी नहीं मकान किराया भत्ते के लिए
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रसीद ही काफी नहीं मकान किराया भत्ते के लिए

तिनेश भसीन /  February 04, 2018

यदि आप अपने नजदीकी परिजनों जैसे माता-पिता, भाई-बहन या पति या पत्नी को मकान किराया अदा करते हैं तो आपको मकान किराया भत्ते (एचआरए) के दावे के लिए अपने नियोक्ता को दस्तावेज देते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। आपको किराए की रसीद से इतर ऐसे दस्तावेज देने होंगे जिनसे यह साबित हो सके कि आप आधिकारिक रुप से किराया दे रहे हैं और महज कर बचाने के लिए आपने ऐसा नहीं किया है। पिछले वर्ष आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) की मुंबई शाखा ने एचआरए क्लेम की एक याचिका इसलिए रद्द कर दी थी क्योंकि आवेदनकर्ता यह साबित करने में विफल रही कि वास्तव में किराया दिया गया है। याचिकाकर्ता ने यह कहते हुए 2,52,000 रुपये का एचआरए क्लेम किया था कि वह अपनी मां को किराए का भुगतान करती है। उसने इसके लिए किराया अदा करने की रसीद उपलब्ध कराई थी। उनसे जब किरायानामा, बैंक स्टेटमैंट जैसे दूसरे दस्तावेज मांगे गए तो वह ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाईं और केस हार गईं।

 
केवल इसलिए कि आप आपने करीबी परिजनों को किराया अदा करते हैं, कागजी काम में कोई लापरवाही नहीं बरतें। एचएंडआर ब्लॉक इंडिया में टैक्स रिसर्च प्रमुख चेतन चांडक कहते हैं, 'आयकर विभाग किसी को भी आयकर रिटर्न भरते समय किए गए दावों की सत्यता के लिए नोटिस दे सकता है और दावों की पुष्टि के लिए दस्तावेज की मांग कर सकता है। हर साल अधिकारी कुछ विशेष मानदंड तय करते हैं जिनके आधार पर वे कंप्यूटर के जरिए रिटर्न का विश्लेषण करते हैं।' चांडक कहते हैं कि ये पैमाने कुछ भी हो सकते हैं, जैसे विभाग एक सीमा से अधिक के सभी एचआरए दावों को छानबीन के लिए चुन ले। फिर कई बार कर अधिकारी खुद से भी इनकी छानबीन करते हैं। 
 
किसी भी व्यक्ति को एचआरए का दावा करते समय महज 2 शर्तें पूरी करने की जरूरत होती है। पहला, उस संपत्ति में वह रह रहा हो। दूसरा, संपत्ति मालिक को किराया मिलता हो। टैक्समैन डॉट कॉम के महाप्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, 'इसके लिए सबसे अच्छा दस्तावेज आपके और परिजन के बीच किराए का वैध एग्रीमेंट होता है। इसमें इन सब बातों का विवरण होना चाहिए कि संपत्ति से जुड़े खर्च जैसे रखरखाव, संपत्ति कर और बिजली-पानी के बिल कौन भरेगा? मकान मालिक यानी आपका करीबी परिजन इस तरह के करार के बारे में संबंधित सोसाइटी को भी सूचित कर सकता है। रेंट एग्रीमेंट में संपत्ति मालिक, किराए की राशि, समयावधि सहित अनेक बातें लिखित में होती हैं।'
 
किराये के भुगतान का रिकॉर्ड रखने के लिए आपको बैंकिंग तरीके से भुगतान करना चाहिए। यदि आप नकद किराया देते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि आपके एटीएम की रसीद में किराए की राशि के बराबर या ज्यादा की राशि अंकित हो। साथ ही, किराया सीधे मकान मालिक को देना चाहिए, ना कि उसकी पत्नी या पति को।  ऊपर बताए गए मामले में मुंबई अपीलेट पंचाट ने यह भी जांच की थी कि बिजली एवं पानी का बिल कौन चुका रहा है। हालांकि जांच अधिकारी आमतौर पर इस तरह की जानकारी नहीं मांगते। लेकिन चूंकि आवेदनकर्ता अपने दावे को साबित करने में विफल रही थीं। लिहाजा, अधिकारियों ने और जांच की। 
 
इसका एक दूसरा तरीका भी है। अगर आपके करीबी परिजन, जो मकान मालिक हैं, अपना सालाना आयकर रिटर्न भरते हों और इसमें यह घोषणा करते हों कि उनको किराया मिलता है, तो भी आप अपना दावा साबित कर सकते हैं। वाधवा कहते हैं, 'अगर आप माता-पिता को किराया चुकाते हैं और उनकी आमदनी आयकर के दायरे से बाहर है तो भी उनका आयकर रिटर्न भरना और इसमें किराये की आय की घोषणा करना एक अच्छा तरीका है।' उनको संपत्ति के रखरखाव के लिए 30 प्रतिशत की छूट भी मिलेगी। किराए को बहुत अधिक बढ़ाकर दिखाना भी समस्या पैदा कर सकता है। किराया उस इलाके में चल रही दरों के हिसाब से ही होना चाहिए।
 
यदि आप हर साल 1,00,000 रुपये से अधिक का किराया दे रहे हैं तो आपको मकान मालिक की पैन संख्या के बारे में बताना होगा। अगर आप एचआरए के साथ पैन शंख्या की जानकारी नहीं देते हैं तो अधिकतर कंपनियां एचआरए के दावे की अनुपमति नहीं देतीं। अगर आपके पास दावे को सही ठहराने के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं तो फिर उस दावे को छोड़ देना ही सही होगा। ऐसे में वह राशि आपकी आय में जुड़ जाएगी और कर के स्लैब के हिसाब से उस पर आयकर लगेगा।
Keyword: real estate, property,,
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Comments
 
kp joshi
18-Mar-18
 
नाईस
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