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कर चोरों पर कसेगा कानून का शिकंजा

श्रीमी चौधरी /  02 04, 2018

कारोबारी कानून

सरकार ने धन शोधन रोकथाम कानून, 2002 को सख्त बनाने का प्रस्ताव किया है। जांच एजेंसियों को विदेशी संपत्ति को जब्त करने की अनुमति मिलेगी।
इन संपत्तियों की नीलामी से मिली रकम निवेशकों को बांटी जाएगी।

वर्ष 2018-19 के आम बजट में घोषित प्रस्ताव में मुताबिक कर चोरों द्वारा विदेशों में जुटाई गई संपत्ति को 'अपराध की कमाई' के समान माना जाएगा और जांच एजेंसियां उन पर कार्रवाई कर सकती हैं। बजट में कहा गया है कि जरूरी प्रावधानों के जरिये धन शोधन रोकथाम कानून, 2002 को सख्त बनाया जाएगा। अभी तक सरकार केवल देश के भीतर ही कर चोरों की संपत्तियों पर कार्रवाई कर सकती है। इस कानून को धार देने के लिए वित्त विधेयक, 2018 में कई प्रावधान करने का प्रस्ताव है। इनमें कंपनियों की धोखाधड़ी को अनुसूचित अपराध में शामिल करने और कंपनी पंजीयक को ऐसे मामलों की जानकारी प्रर्वतन संस्थाओं को देने के प्रावधान शामिल है।

पीड़ि‍तों को राहत

नए प्रावधान के तहत अपराध की कमाई से जुटाई गई संपत्तियों को बेचकर मिलने वाली रकम को सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय उसके सही हकदार को दिया जाएगा। मौजूदा कानून निवेशकों को रिफंड देने में सहायक नहीं है। अपने पैसों को वापस पाने के लिए अदालती लड़ाई लड़ रहे निवेशक लंबे समय से इस तरह के  प्रावधान की मांग कर रहे हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण वे 13,000 निवेशक हैं जिनका पैसा 56 अरब रुपये के नैशनल स्पॉट एक्सचेंज (एनएसईएल) घोटाले के कारण फंसा है। इस घोटाले का खुलासा 2013 में हुआ था और कई एजेंसियों द्वारा जांच किए जाने के बावजूद निवेशकों को उनका पैसा वापस नहीं मिला पाया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में 40 अरब रुपये की संपत्ति जब्त की है। 

सिटी लिमोजीन घोटाले जैसे पोंजी घोटालों में मध्य वर्ग के लोगों का पैसा कई सालों से फंसा है। इसी तरह राजनीतिक शह वाले मामलों जैसे शारदा, रोज वैली और पर्ल एग्रोटेक कॉर्पोरेशन में भी निवेशकों को कोई राहत नहीं मिली है। अलबत्ता यह स्पष्टï नहीं है कि प्रस्तावित बदलाव पिछली तारीख से लागू किए जाएंगे या नहीं। साथ ही सवाल यह भी है कि उनक मामलों का क्या होगा जिनमें अभी जांच चल रही है। फौजदारी मामलों के वरिष्ठï वकील माजिद मेमन ने कहा, 'जब्त संपत्ति को सही हकदार को देने के लिए कानून में संशोधन का प्रावधान अच्छा कदम है।' मौजूदा कानून के तहत एक बार ईडी के अस्थायी रूप से संपत्ति जब्त करने के बाद एक न्यायिक अधिकारी को इस फैसले की पुष्टिï करनी होती है। इससे अपील का लंबा दौर शुरू हो जाता है जो अपीलीय अदालत से उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय तक पहुंच सकता है। 

विदेशी संपत्ति की जब्ती

जांच एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि जब तक पीएमएलए कानून की प्रक्रिया शुरू होती है तब तक गुनहगार संपत्तियों को हड़प लेते हैं। कई मामलों में ईडी के वकील हितेन वेनेगावकर कहते हैं, 'अपराध की कमाई की कीमत वसूलने के लिए एजेंसी को संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति देना जरूरी है।' धन शोधन के मौजूदा मामलों में प्रवर्तन एजेंसियों के लिए यह साबित करना पाना मुश्किल होता है कि अवैध पैसा किसको मिलेगा क्योंकि धन की हेराफेरी करने वालों का काम करने का तरीका बड़ा जटिल होता है और अक्सर वे इन पैसों को व्यवस्था में लाने का तरीका खोज निकालते हैं। ईडी के वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'नए प्रावधानों से कर चोरों की विदेशों में जमा की गई संपत्तियों को जब्त करना ज्यादा आसान हो जाएगा।'

ताजा आंकड़ों के मुताबिक ईडी ने 8 नवंबर, 2016 से सितंबर 2017 के बीच 3,758 मामले पंजीकृत किए हैं और उनकी जांच चल रही है। इनमें से 3,567 विदेशी मुद्रा कानून और 191 धन शोधन रोकथाम कानून के तहत दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय एचएसबीसी जेनेवा, पनामा पेपर्स और पैराडाइज से जुड़े 150 से अधिक मामलों की जांच कर रहा है। ये सभी खुलासे विदेश में हुए थे। ईडी के एक अधिकारी के मुताबिक अतिरिक्त अधिकारों से एजेंसी को किसी भी तरह के काले धन के प्रवेश पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इससे धन की हेराफेरी करने वालों में भी इस बात का डर पैदा होगा कि उनकी अवैध संपत्ति जब्त हो सकती है।

मेमन ने कहा कि पीएमएलए में जांच एजेेंसियों को व्यापक अधिकार मिले हैं। उन्होंने कहा, 'कानून में अपराध की कमाई की बात कही गई है लेकिन अक्सर ऐसी संपत्ति को भी इसमें शामिल किया जाता है जिसका अपराध से कोई लेनादेना नहीं होता है। ऐसी संपत्तियों को जब्त करने के अधिकारों का भी दुरुपयोग हो सकता है।' कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रावधानों को चुनौती दी जाएगी क्योंकि विदेशी संपत्ति को जब्त करने के लिए जांच एजेंसियों को वहां की सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी। मेमन ने कहा, 'उनके पास संपत्ति को जब्त करने का अधिकार हो सकता है लेकिन इसे विदेशी न्यायालयों में चुनौती का सामना करना पड़ेगा।' नए संशोधन से ईडी को न्यायिक अधिकारी के जब्ती आदेश की पुष्टिï करने के बाद आरोपपत्र दायर करने के लिए 90 दिन का और समय मिलेगा। मौजूदा प्रावधान के तहत आदेश की पुष्टिï के बाद एक दिन का भी समय नहीं मिलता है।
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