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भारतीय रेल को पटरी पर लाने का इरादा

बीएस संवाददाता /  February 01, 2018

रेलवे अपने विस्तार के वित्त पोषण के लिए खुद की आय पर निर्भर होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजटीय भाषण में इसका संकेत देते हुए चालू वर्ष के लिए रेलवे की बजटीय सहायता में 150 अरब डॉलर की कटौती करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने अगले साल के लिए रेलवे को 531 अरब रुपये आवंटित किए हैं। इसका मतलब साफ है कि अगले वित्त वर्ष के लिए रेलवे को करीब 20 अरब रुपये कम मिलेंगे। चालू वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय में 110 अरब रुपये की कटौती की गई है। हालांकि सरकार ने 2018-19 के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की योजना बनाई है जिसमें से करीब 38 फीसदी रकम उधारी के जरिये उपलब्ध कराई जा रही है। उधार के जरिये रकम की व्यवस्था करने वाली रेलवे की इकाई इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) 285 अरब रुपये जुटाएगी जबकि शेष 264 अरब रुपये भारतीय जीवन बीमा निगम से प्राप्त होंगे। इसके अलावा 270 अरब रुपये सार्वजनिक निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं से आने की उम्मीद है। रेलवे अपने आंतरिक संसाधनों से करीब 115 अरब रुपये जुटाएगा।

 
जेटली ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 92.5 फीसदी परिचालन अनुपात का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। रेलवे की कुशलता को परिलक्षित करने वाला यह अनुपात रेलवे के व्यय के मुकाबले उसके खर्च को दर्शाता है। इससे पहले 2017-18 के लिए 94.6 फीसदी के परिचालन अनुपात का अनुमान लगाया गया था लेकिन चालू वर्ष के दौरान यह 96 फीसदी तक ही बढ़ सका। वर्ष 2018-19 में रेलवे को 129.9 अरब रुपये के अधिशेष का अनुमान लगाया गया था। रेलवे के खुद का राजस्व सृजन 7 फीसदी बढ़कर 2,011 अरब रुपये होने का अनुमान लगाया गया है। माल एवं यात्रियों के परिवहन कारोबार से प्राप्त आय 7 फीसदी बढ़कर 2,008.40 अरब रुपये होने का अनुमान है। विपणन, स्टेशनों का पुनर्विकास एवं अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों से प्राप्त गैर-यातायात आय करीब 50 फीसदी बढ़कर 208 अरब रुपये होने का अनुमान है।
 
सुरक्षा रेलवे के लिए एक प्रमुख मुद्दा है और अगले वर्ष सुरक्षा पर खर्च के लिए उसे 730.65 अरब रुपये मिलेंगे। चालू वर्ष के दौरान राष्टï्रीय रेल संरक्षा कोश (आरआरएसके) का आकार 687.25 अरब रुपये होने का अनुमा है। वर्ष 2018-19 के लिए आरआरएसके को 50 अरब रुपये का बजटीय समर्थन मिलेगा जबकि केंद्रीय सड़क निधि में रेलवे की हिस्सेदारी के तहत रेलवे सुरक्षा निधि से 100 अरक रुपये और रेलवे के राजस्व से 50 अरब रुपये  प्राप्त होंगे। जेटली ने कहा कि रेलवे द्वारा लक्ष्यों को हासिल करने में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा, 'हम रेलवे नेटवर्क के सर्वोत्तम विद्युतीकरण की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2017-18 के दौरान 4,000 किलोमीटर को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।'
 
वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 12,000 वैगन, 5,160 कोच और करीब 700 लोकोमोटिव की खरीदारी की जाएगी। माल शेड और निजी साइडिंग यानी बगल की लाइन को फास्ट ट्रैक आधार पर चालू करने जैसे बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।  मुंबई के उपनगरीय परिवहन प्रणाली में विस्तार किया जा रहा है और 110 अरब रुपये की लागत से 90 किलोमीटर लंबी दोहरी लाइन ट्रैक को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा 400 अरब रुपये की लागत से 150 किलोमीटर लंबे अतिरिक्त उपनगरीय नेटवर्क स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है जिसमें कुछ सेक्शन पर एलिवेटेड कॉरिडोर भी शामिल हैं। बेंगलूरु महानगर में करीब 170 अरब रुपये की अनुमानित लागत से लगभग 160 किलोमीटर लंबे उपनगरीय नेटवर्क स्थापित करने की भी योजना बनाई जा रही है।
 
इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के जरिये देश भर के 600 प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की तैयारी चल रही है। देश में 25,000 से अधिक यात्रियों की आवाजाही वाले सभी स्टेशनों पर एस्केलेटर लगाए जाएंगे। जेटली ने कहा, 'सभी रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को वाई-फाई सुविधा से लैस किया जाएगा। सभी स्टेशनों और ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे ताकि यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ आधुनिक ट्रेन-सेट का डिजाइन पेरम्बूर स्थित एकीकृत कोच फैक्टरी में तैयार किया जा रहा है। इस प्रकार के पहले ट्रेन-सेट को 2018-19 में चालू किया जाएगा।'
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