बिजनेस स्टैंडर्ड - राजकोषीय समेकन में विराम की संभावना
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राजकोषीय समेकन में विराम की संभावना

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली January 29, 2018

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन और उनके दल ने राजकोषीय घाटा बढऩे की संभावना से इनकार नहीं किया है।  केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.2 प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा है।  2018-19 के बजट के पहले 2017-18 की आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि राजकोषीय समेकन के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य से चुनाव के ठीक पहले के बजट में बचने की जरूरत है। क्या इसका मतलब यह है कि अगले साल में सकल घरेलू उत्पाद का 3.2 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य महत्त्वाकांक्षी है, जैसा कि मध्यावधि राजकोषीय नीति में कहा गया है? यह समीक्षा क्या उसी के विस्तार की ओर जा रही है?
 
यह भी पाया गया है कि 500 अरब रुपये की अतिरिक्त बाजार उधारी से वित्त वर्ष 12 में राजकोषीय घाटा बढऩे की बाजार की चिंता गलत है क्योंकि यह राष्ट्रीय लघु बजट कोष से छोटी निकासी है। यह कहा जा सकता है कि इसके माध्यम से सरकार ने 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त उधारी कम कर दी है।  समीक्षा में कहा गया है, 'केंद्र के स्तर पर राजकोषीय विकास की व्यापकता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि सरकार राजकोषीय समेकन को 2016-17 में सापेक्षिक कर सकती है।' इसका मतलब यह हुुआ कि यह संभव है कि केंद्र सरकार राजकोषीय घाटे के बजट अनुमान से आगे बढ़ जाए। राज्य सरकारें नजदीकी से अपने लक्षित राजकोषीय समेकन के मुताबिक काम कर रहे हैं। इसका आंशिक योगदान केंद्र को दिया जा सकता है, जिसने राज्यों को जीएसटी के तहत होने वाले घाटे की भरपाई करने की गारंटी दी है। 
 
केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे का बजट लक्ष्य 5.5 लाख करोड़ की तुलना में घाटा पहले ही इस साल नवंबर तक 12 प्रतिशत ज्यादा हो चुका है। सर्वे में कहा गया है कि यह पिछले 5 साल के औसत की तुलना में ज्यादा है। बहरहाल समीक्षा में यह भी कहा गया है कि विनिवेश से प्राप्तियां बजट लक्ष्य को पार कर 700 अरब रुपये तक पहुंच जाएंगी। इससे अन्य मदों से आ रही कम प्राप्तियों से राहत मिलेगी। इस साल के बजट के आंकड़े जीडीपी के आंकड़े की तुलना मेंं थोड़ा अलग होंगे। समीक्षा में अनुमान लगाया गया है कि चालू मूल्यों पर जीडीपी 10.5 प्रतिशत बढ़ेगा, जबकि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 9.5 प्रतिशत का अनुमान लगाया था। बहरहाल 2017-18 के बजट में वृद्धि 11.75 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।  डेलॉयट इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री और पार्टनर अनीस चक्रवर्ती ने कहा, 'राजकोषीय घाटे की मात्रा पर बहस जारी है और निकट भविष्य में समेकन देखा जा सकता है।' 
 
समीक्षा मेंं कहा गया है कि राजकोषीय घाटा बढऩे को लकेर चिंता बढ़ी है, जो जीडीपी का 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था, हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि अतिरिक्त बाजार उधारी और घाटे में कोई संबंध है या नहीं।  समीक्षा में कहा गया है, 'कोई जरूरी नहीं है कि बाजार उधारी राजकोषीय घाटे में नजर आए। ऐसा इसलिए है कि भारत में सिर्फ बाजार उधारी से राजकोषीय घाटा तय नहीं होता बल्कि राष्ट्रीय लघु बचल कोष (एनएसएसएफ) की अलग व्यवस्था है।' समीक्षा में केंद्र व राज्यों दोनोंं की ही अतिरिक्त उधारी का जिक्र किया गया है। 
 
सुब्रमण्यन ने कहा कि राज्यों व केंद्र की बाजार उधारी राजकोषीय घाटे में आनुपातिक रूप से नहीं होती। यह अन्य देशों के लिए सही हो सकता है, लेकिन एनएसएसएफ के कारण भारत में ऐसा नहीं है।  बहरहाल एक विशेषज्ञ का कहना है कि राज्यों ने मौजूदा स्थिति में एनएसएसएफ से ज्यादा उधारी नहीं ली है और केंद्र सरकार ने भी इस कोष से धन नहीं निकाला है।
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