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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका

पवन बुरुगुला / मुंबई 01 29, 2018

आर्थिक समीक्षा

आर्थिक समीक्षा में शेयरों के उच्च मूल्यांकन पर सतर्कता और संभावित गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। इस वित्त वर्ष में 23 फीसदी की तीव्र बढ़ोतरी के बाद बेंचमार्क सेंसेक्स अभी पिछले 12 महीने की आय के 27 गुने पर कारोबार कर रहा है। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों इस वित्त वर्ष में बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है और यह अभी और भी ज्यादा मूल्यांकन क्रमश: 47 व 105 गुने पर कारोबार कर रहा है। समीक्षा में कहा गया है, ऐसे मूल्यांकन के टिके रहने के लिए भविष्य में अर्थव्यवस्था और आय में बढ़ोतरी मौजूदा अनुमानों के मुताबिक जरूरी होगी और इसके लिए पोर्टफोलियो में बदलाव की भी दरकार होगी। अन्यथा इनमें गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। देसी इक्विटी में बढ़ोतरी कंपनियों की मजबूत आय में बढ़ोतरी के अनुमान से हुई है। हालांकि आय में बढ़ोतरी अब तक ठीक नहीं रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है, आय में बढ़ोतरी का अनुमान भारत में काफी ज्यादा है। वास्तव में यह अनुमान इतना ज्यादा है, जो शेयर बाजार में उछाल के मूमल में निहित है। साल 2016-17 के शुरू में संकेत उभरने लगे थे कि कंपनी आय व जीडीपी अनुपात में गिरावट शायद अब थम जाएगा। निवेशकोंं ने इस खबर पर प्रतिक्रिया जताई और सुधार के अनुमान से शेयर के लिए बढ़ी कीमत पर बोली लगाई। इस तरह से कीमत व मौजूदा आय का अनुपात काफी तेजी से बढ़ा। आय में सुस्ती मोटे तौर पर नीतिगत अवरोध मसलन जीएसटी का क्रियान्वयन व नोटबंदी के चलते देखने को मिली है। बाजार आने वाले समय में आय में सुधार की उम्मीद कर रहा है।

मोतीलाल ओसवाल इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के शोध प्रमुख गौतम दुग्गड़ ने कहा, बाजार का मूल्यांकन मोटे तौर पर आय में सुधार की उम्मीद में काफी ज्यादा है। इसलिए अगर आय के मोर्चे पर निराशा मिलती है या और निवेश में कमी आती है तो हम बड़ी गिरावट देख सकते हैं। आय की रफ्तार में सुस्ती के बावजूद शेयर कीमतों को जिस चीज ने मजबूत रखा है वह है वैश्विक व देसी बाजार में नकदी की बहुलता। समीक्षा में कहा गया है, वैश्विक स्तर पर ब्याज की दरें काफी कम रहने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम (ईआरपी) में गिरावट आई है। ईआरपी में कमी से पोर्टफोलियो का आवंटन डेट से इक्विटी में चला गया है। 

इसमें कहा गया है, कुल मिलाकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारतीय शेयर बाजार में बढ़ोतरी तीन मायनों में अलग रही है, बढ़त की रफ्तार, स्तर और लाभ का हिस्सा और ब्याज की वास्तविक दर का स्तर। ब्याज का निचला स्तर विकसित अर्थव्यवस्थाओं के उच्च मूल्यांकन को उचित ठहरा रहा है। लेकिन भारत का मूल्यांकन इस लिहाज से काफी कम होना चाहिए। ऐसे में भारत के मूल्यांकन को जो चीजें आगे बढ़ा रही है वह है ईआरपी में कमी, जो पोर्टफोलियो में भारी फेरबदल में प्रतिबिंबित हुआ है।

देसी बाजार के लिहाज से पोर्टफोलियो में फेरबदल पारंपरिक संपत्तियों मसलन सोने व रियल एस्टेट के रिटर्न के गिरावट के चलते हुआ है। साथ ही नोटबंदी के चलते वित्तीय बचत में बढ़ोतरी हुई और इसका बड़ा हिस्सा इक्विटी बाजार पहुंच गया। मूल्यांकन की चिंता के अलावा इसमें कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को प्रमुख जोखिम बताया गया है। कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल में 25 फीसदी चढ़ी है और अभी करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी ने कहा, वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव डाला है। जब भी कीमतें बढ़ती है महंगाई में इजाफा होता है और राजकोषीय घाटा भी बढ़ता है। तेल की मौजूदा कीमतें अपेक्षाकृत महंगी नजर आ रही है और तेल की बढ़ती कीमतों के झटके को समाहित करने के लिए सरकार को उत्पाद शुल्क में कटौती के जरिये संतुलित कदम उठाना पड़ सकता है ताकि यह महंगाई पर असर न डाले।

सुब्रमण्यन की टिप्पणी पर बॉन्ड प्रतिफल उछला

10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 13 आधार अंक उछल गया जब मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मौद्रिक सहजता की गुंजाइश सीमित है। 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल सोमवार को 7.44 फीसदी पर बंद हुआ। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2017-18 में 6.75 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज करेगी, वहीं वित्त वर्ष  2019 में यह 7 से 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज करेगी। स्थानीय बॉन्ड भी दबाव में रहे क्योंकि 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल यूरोपीय कारोबार में कई साल की ऊंचाई पर पहुंच गया। 10 वर्षीय ट्रेजरी का प्रतिफल बढ़कर 2.708 फीसदी पर पहुंच गया, जो साल 2014 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। उधर, दो वर्षीय ट्रेजरी प्रतिफल बढ़कर 2.148 फीसदी पर पहुंच गया, जो साल 2008 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। यह जानकारी रॉयटर्स से मिली।
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