बिजनेस स्टैंडर्ड - पांच राज्यों की मुट्ठी में निर्यात
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पांच राज्यों की मुट्ठी में निर्यात

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली January 29, 2018

राज्य स्तर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आंकड़ों का पहली बार इस्तेमाल करते हुए सरकार को निर्यात के लिहाज से राज्यों के बीच भारी असमानता और निर्यात करने वाली फर्मों की बिखरी प्रकृति नजर आई है। सोमवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा से पता चलता है कि पांच राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना का संयुक्त रूप से देश के निर्यात में 70 फीसदी का भारी भरकम योगदान है। दूसरी ओर 16 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों का कुल निर्यात में सिर्फ 3 फीसदी योगदान है। समीक्षा में कहा गया है, ऐसे आंकड़ों से निर्यात के प्रदर्शन और राज्यों के रहन-सहन के स्तर के बीच मजबूत सह-संबंध का संकेत मिलता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात करने वाले और अन्य राज्यों के साथ कारोबार करने वाले राज्य अमीर पाए गए हैं। यह हालांकि पारंपरिक जानकारी है कि कुछ चुनिंदा राज्यों का निर्यात में ज्यादा योगदान है, लेकिन ताजा आंकड़े सरकार की तरफ से राज्य के हक में इस क्षेत्र के लिए अगली नीतियां तैयार करने की कोशिश है। इस संबंध में वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने पिछले महीने सभी राज्यों से अपनी-अपनी निर्यात नीतियां बनाने को कहा था।
 
समीक्षा में कहा गया है, सबसे बड़ी फर्मों की निर्यात में अन्य देशों के मुकाबले काफी कम हिस्सेदारी है। देश की एक फीसदी अग्रणी फर्में सिर्फ 38 फीसदी का निर्यात करती है जबकि दूसरे देशों में ऐसी कंपनियों की हिस्सेदारी ज्यादा है। यह इस क्षेत्र के लिए बुरी खबर है क्योंकि बड़े कारोबार से तुलनात्मक फायदा मिलता है और लंबी अवधि का परिदृश्य भी सुधरता है। फर्मों के स्तर पर आंकड़ों का संग्रहण हालांकि सरकार की ट्रेड इंटेलिजेंस एजेंसियां करती हैं, लेकिन हाल में ही इस क्षेत्र की विस्तृत तस्वीर सामने आ पाई है जिसकी वजह कारोबारियों की तरफ से जीएसटी की फाइलिंग है।
 
सरकार ने अंतरराज्यीज कारोबार पर भी ध्यान केंद्रित किया है और कारोबारी सुगमता की खाई की पहचान की है। पिछले साल समीक्षा में अनुमान लगाया गया था कि भारत का अंतरराज्यीज कारोबार जीडीपी का 30-50 फीसदी था। लेकिन जीएसटी के आंकड़ों के बाद सरकार ने अब खुलासा किया है कि वस्तुओंं व सेवाओं का आंतरिक कारोबार (गैर-जीएसटी वाले आइटम को छोड़कर) जीडीपी का करीब 60 फीसदी है। समीक्षा से संकेत मिलता है कि निर्यात प्रोत्साहन को और उपयुक्त बनाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि निर्यातकों को राज्यों के कर पर राहत दिए जाने से सिले सिलाए परिधानों का निर्यात करीब 16 फीसदी बढ़ा है। हालांकि अन्य सामानों के मामले में यह सही नहीं है। सेवाओं के कारोबार में समीक्षा उम्मीद भरी तस्वीर सामने रखता है जहां भारत साल 2016 में वाणिज्यिक सेवाओं में दुनिया का आठवां सबसे बड़ा निर्यातक रहा और इसकी हिस्सेदारी 3.4 फीसदी रही। अप्रैल-सितंबर 2017-18 में इस क्षेत्र की निर्यात की रफ्तार 16.2 फीसदी रही, जो 2016-17 में 5.7 फीसदी रही थी। लेकिन आयात भी 17.4 फीसदी बढ़ा है। सेवाओं से शुद्ध प्राप्तियां इस अवधि में 14.6 फीसदी बढ़ी।
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