बिजनेस स्टैंडर्ड - 'दावोस में अगुआई करे भारत'
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'दावोस में अगुआई करे भारत'

एजेंसियां / दावोस January 22, 2018

विश्व आर्थिक मंच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले आज भारत के प्रमुख उद्योगपतियों और कार्य कार्याधिकारियों ने कहा कि संरक्षणवाद जैसे मुद्दों से निपटने में भारत को अग्रणी भूमिका निभानी होगी। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका जैसे देश इस मंच पर संरक्षणवाद और घरेलू हितों जैसे मुद्दों का समर्थन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री आज ज्यूरिख होते हुए दावोस पहुंच गए। मंच के मुख्य सत्र में कल उनका भाषण होगा। इसके अलावा वह वैश्विक कारोबारी समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।
 
कई दिग्गज उद्योगपति मोदी के आने से पहले ही यहां पहुंच चुके हैं। विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक में पिछले कई वर्षों से शिरकत कर रहे दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने कहा कि भारत को बिक्री एवं विपणन का महीन फर्क समझना चाहिए तथा खुद को अग्रणी भूमिका में रखते हुए अपनी बात रखनी चाहिए। स्पाइसजेट के मुख्य कार्याधिकारी अजय सिंह ने कहा कि भारत दावोस में ठोस और शानदार बातें कह सकता है और उन्हें कहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहतर कोई नहीं हो सकता है। सिंह ने कहा कि भारत के लिए यह बहुत बड़ा अवसर है क्योंकि 20 साल बाद भारत के प्रधानंत्री इस बैठक में शिरकत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पिछले साल जब शी चिनफिंग यहां थे तो चीन पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था और यह स्वाभाविक था। इस बार सभी का ध्यान भारत पर होगा।' 
 
आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य कार्य अधिकारी तथा प्रबंध निदेशक चंदा कोछड़ ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक सुधार से गुजर रही है और तेज आर्थिक वृद्धि के ऐसे रास्ते पर अग्रसर है जिससे हर कोई लाभान्वित हो सकता है। शिखर सम्मेलन में उपस्थित कई भारतीय मुख्य कार्याधिकारियों ने कहा कि वैश्विक समुदाय प्रधानमंत्री मोदी को सुनने का इंतजार कर रहा है। उनका भाषण इसलिए भी अधिक रोचक हो गया है क्योंकि बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सम्मेलन में अपने अमेरिका फस्र्ट की वकालत कर सकते हैं। ट्रंप यह भी बता सकते हैं कि उन्होंने कॉरपोरेट कर की दर कम कर कैसे अमेरिकी कंपनियों को अमेरिका में ही मुनाफा तथा रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए वापस बुलाया। मोदी भी अपने कार्यक्रमों के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के भविष्य के संबंधों पर अपना नजरिया रखेंगे। उन्होंने देश से रवाना होने से पहले कल कहा था कि भारत का अन्य देशों के साथ संबंधों का हालिया वर्षों में विस्तार हुआ है। बाहरी दुनिया के साथ देश के संबंध वास्तविक रूप से बहुआयामी हुए हैं जिनमें राजनीतिक, आर्थिक, सामान्य जन के स्तर पर, और सुरक्षा तथा अन्य आयाम शामिल हैं। इस बीच स्विट्जलैंड के बर्फ की पहाडिय़ों से घिरे दावोस शहर में फिलहाल हर तरफ भारत के नजारे दिख रहे हैं। शहर की गगनचुंबी इमारतों और बसों पर भारत और भारतीय कंपनियों के विज्ञापन अटे पड़े हैं। 
 
समावेशी विकास सूचकांक में पाक से नीचे भारत!
 
समावेशी विकास सूचकांक में भारत 62वें स्थान पर रहा। सोमवार को जारी इस सूचकांक में भारत को उसके पड़ोसी देशों चीन (26वें) और पाकिस्तान (47वें) के बाद जगह दी गई है। विश्व आर्थिक मंच  (डब्ल्यूईएफ) ने सालाना जारी होने वाले अपने सूचकांक कहा कि दुनिया का सर्वाधिक समावेशी अग्रणी अर्थव्यवस्था होने का तमगा नॉर्वे ने बरकरार रखा है।  लिथुआनिया एक बार फिर तेजी से उभरते बाजारों की सूची में सबसे ऊपर रहा है। डब्ल्यूईएफ ने कहा कि देशों को वरीयता तय करने के लिए लोगों के रहन-सहन के मानकों, पर्यावरण सुदृढ़ीकरण और भविष्य की पीढिय़ों को कर्ज से सुरक्षा आदि बातों पर विचार किया जाता है। पिछले साल भारत 79 विकासशील देशों में 60वें पायदान पर रहा था, जबकि चीन और पाकिस्तान क्रमश: 15वें और 52वें स्थान पर रहे थे। हालांकि निचले स्थान पर रहने के बाद भी भारत 'आगे बढ़ते' रुझान के कारण तेजी से उभरती दस शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।  हालांकि भारत इस साल भी सरकार, कारोबार, स्वयंसेवी संगठन तथा मीडिया के मामले में सबसे भरोसेमंद देशों में बना हुआ है लेकिन पिछले साल की तुलना में भरोसे में काफी गिरावट आई है।
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