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नए यूलिप सस्ते मगर म्युचुअल फंड बेहतर लगते

तिनेश भसीन /  January 21, 2018

बीमा कंपनियां यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) को नया कलेवर दे रही हैं। नए अवतार में यूलिप की लागत इतनी घटा दी गई हैं कि वे सीधे म्युचुअल फंडों से सीधे होड़ कर सकते हैं। यूलिप के नए रूप में निवेश से जुड़े खर्च घटाए गए हैं। बीमित व्यक्ति को केवल फंड प्रबंधन और मोर्टेलिटी शुल्क का भुगतान करना होता है। इसी तरह पॉलिसी पर प्रशासनिक शुल्क, पॉलिसी आवंटन शुल्क या फंड बदलने पर लगने वाले शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं। इन शुल्कों की वजह से प्रतिफल घट जाता है। 

दरअसल इन दिनों शेयर बाजार में खुदरा निवेशक तेजी से पैसा लगा रहे हैं और बीमा कंपनियों की नजर इन्हीं निवेशकों की रकम पर है। वे भी इस रकम में से कुछ हिस्सा पाने की कोशिश में हैं। पॉलिसी बाजार डॉट कॉम में जीवन बीमा प्रमुख संतोष अग्रवाल कहते हैं, 'पिछले कुछ सालों में म्युचुअल फंडों के जरिये शेयर बाजारों में निवेश कई गुना बढ़ गया है। दूसरी तरफ यूलिप के जरिये निवेशकों की भागीदारी में खास इजाफा नहीं हुआ है।' अग्रवाल का कहना है कि कम लागत का एक कारण यह भी है कि ऐसी यूलिप योजनाओं के जरिए बीमा कंपनियों को दूसरी योजनाओं की क्रॉस सेल (संबंधित योजनाओं में निवेश) या अप-सेल (महंगी योजना में निवेश) का मौका मिल सकता है। 

यूलिप का तीसरा दौर 
एडलवाइस टोकियो लाइफ इंश्योरेंस ने वेल्थ प्लस प्लान उतारा है। मैक्स लाइफ इंश्योरेंस को बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) से मैक्स लाइफ ऑनलाइन सेविंग्स प्लान शुरू करने की अनुमति मिल भी गई है। कुछ दूसरी जीवन बीमा कंपनियों ने भी ऐसी ही सस्ती योजनाएं शुरू करने के लिए आवेदन दाखिल किए हैं। कम खर्च के अलावा इन योजनाओं में निवेशकों को एक फंड से दूसरे फंड में जाने की भी इजाजत दी गई है। ऐसा वे कितनी भी बार कर सकते हैं और इसके लिए उनको कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। निवेशक 'लाइफ-स्टेज' जैसी निवेश रणनीति का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके तहत योजना की अवधि समाप्ति की ओर बढऩे के साथ ही रकम इक्विटी से डेट में चली जाती है। 

बीमा पॉलिसियों में एक फंड से दूसरे फंड में जाने पर कर नहीं लगता है। मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में निदेशक-विपणन और चीफ डिजिटल ऑफिसर- माणिक नंगिया कहते हैं, 'ये योजनाएं ऐसे निवेशकों के लिए तैयार की गई हैं, जिन्हें सारी जानकारियां होती हैं, जो अर्थ-वित्त जगत की बातें समझते हैं और एजेंट से सलाह-मशविरा करने के बजाय स्वयं फैसला करने को प्राथमिकता देते हैं। इसके साथ ही हम जिन फंडों की पेशकश कर रहे हैं, वे पहले से ही बाजार में मौजूद हैं और उनका पुराना रिकॉर्ड भी उपलब्ध है।' एडलवाइस टोकियो का कहना है कि अपनी योजनाएं अधिक आकर्षक बनाने के लिए वह निवेशकों के फंडों में योगदान देंगी। कंपनी एक से पांच साल, छह से दस साल, ग्यारह से पंद्रह साल और सोलह से बीस साल के बीच प्रीमियम का क्रमश: 1 प्रतिशत, 3 प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 7 प्रतिशत हिस्सा देगी। एडलवाइस टोकियो लाइफ के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी दीपक मित्तल कहते हैं, 'यह ग्राहकों को जोड़े रखने का एक तरीका है। इसके साथ ही निवेशकों के कोष में रकम डालने से उन्हें अपना संचित धन बढ़ाने में मदद मिलती है।'

सुस्त निवेशकों के लिए
वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि अपने निवेश पर अधिक से अधिक लाभ कमाने केलिए किसी व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। अगर निवेश पर मनचाहा प्रतिफल नहीं मिल रहा है तो उसे दूसरी योजनाओं की तरफ मुड़ जाना चाहिए। लेकिन जो लोग ऐसा नहीं करना चाहते, उनके लिए सस्ती यूलिप योजनाएं फायदेमंद हो सकती हैं। इसके अलावा किसी निवेशक को अपने निवेश पर कर लाभ मिल सकता है। संचित रकम या निकासी पर किसी तरह का कर भी नहीं लगता है। एक निश्चित अवधि के बाद कोष से आंशिक निकासी का भी प्रावधान है। यह निकासी भी कर मुक्त है। 

चुनें म्युचुअल फंड 
वित्तीय योजनाकारों के अनुसार यूलिप में योजनाएं एवं रणनीति बदलने का लचीलपन होता है, जो कई निवेशक अक्सर सक्रिय रुप से नहीं करते हैं। अगर आप योजनाएं बदलना भी चाहते हैं तो केवल उसी बीमा कंपनी की दूसरी योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। प्लान अहेड एडवाइजर्स के संस्थापक  विशाल धवन कहते हैं,'जब कोई निवेशक अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करता है तो म्युचुअल फंडों के मामले में वह एक फंड कंपनी की योजना से दूसरी फंड कंपनी की योजना में जा सकता है। यूलिप में ऐसा विकल्प नहीं होता है।'

म्युचुअल फंडों में आपने अगर सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) ले रखा है तो इसे कभी भी रोक सकते हैं और अपनी पूरी रकम पा सकते हैं। यूलिप के मामले में अपने निवेश का एक बड़ा हिस्सा पाने के लिए निवेशक को कम से कम पांच साल तक प्रीमियम का भुगतान करना होता है। लैडर7 फाइनैंशियल सर्विसेज के संस्थापक सुरेश सद्गोपन कहते हैं,'नौकरी जाने या किसी खास स्थिति में निवेशक को रकम निकालने की जरूरत पड़ती है तो कुछ निश्चित सालों तक पॉलिसी जारी नहीं रखने पर उसे पूरी रकम नहीं मिलेगी। इसके साथ ही यूलिप में एक निश्चित अवधि का चयन करना होता है। अगर अवधि पूरी होने से पहले ही निवेशक पॉलिसी लौटाता है तो बीमा कंपनी कोष का एक हिस्सा काट कर शेष रकम लौटा देती है।' सद्गोपन का कहना है कि  निवेशकों को यूलिप का चयन सिर्फ इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि ये सस्ते प्लान हैं। 
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