बिजनेस स्टैंडर्ड - निगरानी उपायों पर सेबी सख्त
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निगरानी उपायों पर सेबी सख्त

ग्रेडेड निगरानी उपाय के तहत कंपनियों को लाने के प्रावधान की हो रही समीक्षा
ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई 01 15, 2018

निगरानी में पारदर्शिता

जीएसएम का उद्देश्य कमजोर फंडामेंटल्स वाले शेयरों में असामान्य तेजी को नियंत्रित करना है
जीएसएम के दायरे में रखने के लिए कंपनियों के चयन का मानदंड स्पष्टï नहीं है
पिछले साल फरवरी में लागू होने के बाद जीएसएम के दायरे में 700 से भी अधिक कंपनियों को रखा गया

बिजनेस स्टैंडर्ड निगरानी उपायों पर सेबी सख्तभारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) कंपनियों को ग्रेडेड निगरानी उपाय (जीएसएम) के तहत लाने की प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है। इस मामले से अवगत दो व्यक्तियों ने बताया कि बाजार नियामक इस प्रक्रिया को कहीं अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह पहल कर रहा है। जीएसएम का उद्देश्य कमजोर फंडामेंटल्स अथवा कम बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के शेयरों में असामान्य तेजी को नियंत्रित करना है। इसके जरिये उन कंपनियों के शेयर वित्तीय अथवा परिचालन प्रदर्शन में कोई उल्लेखनीय सुधार न होने के बावजूद शेयर मूल्य में काफी तेजी दिख रहा हो। पिछले साल फरवरी में लागू होने के बाद जीएसएम के दायरे में 700 से भी अधिक कंपनियों को रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसएम के दायरे में रखने के लिए कंपनियों के चयन का मानदंड स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि इसके तहत कमजोर फंडामेंटल्स वाली कंपनियों के प्रति काफी आक्रामक रुख अपनाया गया है जो अक्सर धोखाधड़ी करने वालों के निशाने पर होती हैं।

सुवन लॉ एडवाइजर्स के पार्टनर सुमित अग्रवाल ने कहा, 'मौजूदा स्वरूप में जीएसएम को खतरनाक रूप से अस्पष्ट एवं गोपनीय तरीके से तैयार किया गया है।' उन्होंने कहा, 'मूल्य का निर्धारण मांग और आपूर्ति के आधार पर होना चाहिए। नियामक अथवा स्टॉक एक्सचेंज को कंपनी के फंडामेंटल्स अथवा उसके परिचालन के बारे में निर्णय नहीं लेना चाहिए क्योंकि कंपनी के फाइनैंशियल्स के बारे में खुलसे सार्वजनिक तौर पर किए जाते हैं।'

उदाहरण के लिए, बंबई स्टॉक एक्सचेंज ने जीएसएम के विभिन्न चरणों में इसके दायरे में करीब 400 कंपनियों को रखा है। इसमें से 132 कंपनियां ग्रेड6 के तहत आती हैं जहां सबसे अधिक प्रतिबंध हैं। कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स के प्रबंध निदेशक पवन कुमार विजय ने कहा, 'निवेशकों को उन मानदंडों के बारे में जानकारी नहीं होती है जिनके तहत कंपनियों को जीएसएम के दायरे में रखा जाता है। इसलिए नियामक को एक ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि जीएसएम के दायरे में जाने वाली कंपनियों के बारे में चेतावनी मिल सके।'

जीएसएम के तहत शेयरों की बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है क्योंकि सख्त मार्जिन जरूरतों के कारण निवेश इन शेयरों से आमतौर पर बचते हैं। जीएसएम के ग्रेड 2 के तहत शेयरों के लिए खरीदार से एक अतिरिक्त निगरानी जमा (एएसडी) रकम वसूली जाती है जो खरीद मूल्य का 100 फीसदी होता है। बिकवाली कम होने से शेयर मूल्य में भी गिरावट आने लगती है जिससे निवेशकों के लिए उससे बाहर आना कठिन हो जाता है। सेबी ने इस बाबत जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल को कोई जवाब नहीं दिया।
Keyword: निगरानी, पारदर्शिता, जीएसएम, मानदंड, सेबी, समीक्षा, परिचालन, शेयर मूल्य,
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