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'लार्ज-कैप शेयरों को सरकारी पहलों से मिल सकती है मदद'

विशाल छाबडिय़ा और ऐश्ली कुटिन्हो /  January 15, 2018

बाजारों में पिछले साल आई तेजी से मूल्यांकन ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) मनीष कुमार ने विशाल छाबडिय़ा और ऐश्ली कुटिन्हो के साथ साक्षात्कार में बताया कि मिड- और स्मॉल-कैप क्षेत्र में बुलबुले जैसी स्थिति दिख रही है। इसलिए, आपको निवेश निर्णयों को लेकर सावधान रहने की जरूरत होगी। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
पिछले साल कई समस्याओं के बावजूद बाजारों में अच्छी तेजी आई। साथ ही हमने महसूस किया कि वैश्विक समीकरण उत्साहजनक नहीं हैं। क्या आप इसे लेकर चिंतित हैं?
 
मौजूदा तेजी नियमित है और कुल मिलाकर सभी क्षेत्रों से जुड़ी हुई है और हम सतर्कता बरतने के साथ साथ आशान्वित बने हुए हैं। कई कंपनियों ने अपने कोष उगाही कार्यक्रम पूरे किए हैं और बाजारों में इसका असर दिखा और तेजी आई। हमें विश्वास है कि मौजूदा तेजी की रफ्तार मजबूत पूंजी प्रवाह की वजह से और अधिक मजबूत होगी। 
 
क्या 24-25 गुना पर कीमत-आय के साथ मूल्यांकन महंगा है?
 
ये मूल्यांकन ऐतिहासिक दायरे के ऊपरी किनारे पर हैं। मौजूदा मूल्यांकन को बरकरार रखने और बाजारों को मजबूती प्रदान करने के लिए कंपनियों मजबूत आय वृद्घि दर्ज करने की जरूरत होगी। लार्ज-कैप कंपनियों (जिनमें मूल्यांकन ऐतिहासिक जोन के ऊपरी छोर के आसपास हैं) के विपरीत मिड- और स्मॉल-कैप क्षेत्र में बुलबुले जैसी स्थिति दिख रही है। इसलिए आपको निवेश निर्णय लेने में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। नोटबंदी और जीएसटी क्रियान्वयन की वजह से आय में सुस्ती का मध्यावधि में ठोस फायदा मिलने की संभावना है। हम वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही से आय में मुख्य रूप से कम बेस प्रभाव की वजह से सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। दरअसल, दूसरी तिमाही की आय पहली की तुलना में बेहतर रही है।
 
पिछले तीन वर्षों में निवेशकों ने आय वृद्घि 18 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद जताई थी और उन्हें आय को लेकर हर साल निराशा का सामना करना पड़ा। वित्त वर्ष 2019 में भी आय 15-20 फीसदी तक बढऩे का अनुमान है। क्या आप इस नजरिये से सहमत हैं?
 
हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2019 में आय वृद्घि की रफ्तार वित्त वर्ष 2018 की तुलना में बेहतर रहेगी। वहीं वित्त वर्ष 2020 में यह वित्त वर्ष 2019 से बेहतर रहेगी। बैंकिंग, दूरसंचार और दवा क्षेत्र अगले दो वर्षों में आय में सुधार दर्ज कर सकते हैं और कुल आय परिदृश्य में सुधार लाने में अहम योगदान दे सकते हैं। 
 
पिछले कुछ महीनों में बॉन्ड प्रतिफल में आई तेजी पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
हमें उम्मीद है कि 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल अब सीमित दायरे में रहेगा और 2018 में यह 7.5 फीसदी के सर्वाधिक स्तर पर। पिछले 6 महीनों में, हमने 4.5-5 वर्षों की बेंचमार्क दर की तुलना में अपनी अवधि घटाकर 3.5 साल कर दी है और ब्याज दर चक्र में बदलाव की उम्मीद की जा रही है। 
 
आप अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को किस तरह से मजबूत बना रहे हैं?
 
हम मिड- और स्मॉल-कैप के मुकाबले लार्ज-कैप को अधिक पसंद कर रहे हैं। हम सरकार द्वारा चलाई जाने वाली पहलों को ध्यान में रखकर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव भी कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, सरकार द्वारा अगले 18 महीनों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उपाय किए जाने की संभावना है और हमारे पोर्टफोलियो में इसका असर दिखेगा। हम दूरसंचार और मुख्य रूप से अधिक सीएएसए (चालू खाता और बचत खाता) फ्रैंचाइजी वाले बैंकों पर भी ध्यान दे रहे हैं। 
 
वैश्विक रूप से केंद्रीय बैंक अपनी बैलेंस शीट को सख्त बनाने पर जोर दे रहे हैं। भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
 
हम अमेरिकी अर्थव्यवस्था में धीरे धीरे सुधार और यूरोप में आर्थिक वृद्घि के संकेत देख रहे हैं। इसलिए हम अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों में सख्ती और फिर धीरे धीरे मजबूती देखेंगे। इन घटनाक्रम के परिणामस्वरूप भारतीय इक्विटी बाजारों में पूंजी प्रवाह नरम होगा। अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल 2.2-2.3 फीसदी पर है और यह वर्ष 2018 के अंत तक 3 फीसदी पर पहुंच सकता है। फिर भी, अमेरिकी और भारतीय 10 वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल के बीच अंतर लगभग 4.5 फीसदी का बना रहेगा, जो काफी अधिक है। इसलिए, हम भारतीय डेट बाजार से किसी बड़ी विदेशी पूंजी की निकासी की आशंका नहीं जता रहे हैं। 
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