बिजनेस स्टैंडर्ड - मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान पर अदालत जाएंगी फर्में
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मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान पर अदालत जाएंगी फर्में

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 01 14, 2018

आईटी और एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियां कर रहीं तैयारी

जीएसटी के बाद कम कीमतों का लाभ ग्राहकों को नहीं दिए जाने पर सरकार ने कुछ कंपनियों को भेजा नोटिस
कंपनियों ने कहा, मुनाफाखोरी आकलन के लिए कोई स्पष्ट नियम का नहीं है प्रावधान

बिजनेस स्टैंडर्ड मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान पर अदालत जाएंगी फर्मेंवस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत सरकार के मुनाफाखोरी-रोधी अभियान से चिंतित एफएमसीजी और आईटी सॉफ्टवेयर क्षेत्र की कंपनियां दिल्ली और बंबई उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करने की योजना बना रही हैं। कंपनियां इसके दिशानिर्देश के प्रावधानों पर स्पष्टता चाहती हैं।सरकार ने मुनाफे की  गणना के लिए कोई नियम या दिशानिर्देश अभी तय नहीं किया है, जबकि हार्डकैसल रेस्टोरेंटस, लाइफस्टाइल ऐंड पिरामिड इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी कुछ कंपनियों को नोटिस भेजे जाने के कारण उद्योग में घबराहट देखी जारही है।
एफएमसीजी क्षेत्र की एक कंपनी के प्रतिनिधि ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, 'मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान में काफी अस्पष्टता है। मुनाफे की गणना के लिए कोई नियम नहीं होने को लेकर हम बंबई उच्च न्यायालय में  रिट याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं।' उन्होंने कहा कि उत्पाद की कीमत केवल कर पर निर्भर नहीं होती है बल्कि उसमें आपूर्ति और मांग के साथ ही आपूर्तिकर्ता की लागत आदि का ध्यान रखा जाता है।

हालांकि जो कंपनियां उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की योजना बना रही हैं, उन्हें फिलहाल सरकार से इस का नोटिस नहीं मिला है। एफएमसीजी क्षेत्र की एक अन्य कंपनी ने कहा कि जीएसटी से पहले और बाद की व्यवस्था में मुनाफे  का निर्धारण लॉजिस्टिक्स लागत और वस्तुओं की देश भर में सुगम आवाजाही, दक्षता में सुधार जैसे कारकों के आधार पर होता है।

एक आईटी कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि उनके ग्राहक जीएसटी के लाभ को हस्तांतरित नहीं करने के बारे में पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'लेकिन मसला यह है कि मुनाफाखोरी का आकलन किस तरह से किया जाए।' उन्होंने कहा कि याचिका दायर करने में 10 से 15 दिन का समय लग सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार इससे पहले नियम लेकर आती है तो हम याचिका नहीं दायर करेंगे।' मुनाफाखोरी-रोधी नियमों के अनुसार, इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ कीमतों में कमी कर ग्राहकों को पहुंचाना चाहिए।

डेलायट इंडिया के पार्टनर एम एस मणि ने कहा, 'मुनाफाखोरी निर्धारण की कोई व्यवस्था नहीं होने से करदाताओं के लिए यह तय करना कठिन है कि अगर जरूरत हो तो कितने मुनाफे का लाभ ग्राहकों को देना चाहिए। कई मामलों में ग्राहक मुनाफा का हिस्सा देने पर जोर दे रहे हैं, ऐसे में इसके लिए एक मानक तय होना चाहिए।'

मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण को अब तक वस्तु एवं सेवाओं के आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ जीएसटी का लाभ नहीं पहुंचाने के बारे में 169 शिकायतें मिली हैं। सेफागर्ड महानिदेशक ने पिरामिड इन्फ्राटेक, होंडा मोटर व्हीकल्स, लाइफस्टाइल इंंटरनैशनल और हार्डकैसल रेस्टोरेंटस (मैकडॉनल्डस की फ्रैंचाइजी) को जीएसटी का लाभ ग्राहकों को नहीं देने पर नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में इन फर्मों को पिछले एक साल की अपनी बैलेंस शीट और मुनाफा तथा घाटे का ब्योरा देने को कहा गया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने भी मुनाफाखोरी-रोधी के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश लाने पर जोर दिया है।

सीआईआई ने कहा, 'एक अन्य चुनौती जटिल अनुपालन है। सरकार को कर लाभ की गणना करने के लिए जीएसटी से पहले और उसके बाद सभी उत्पादों की लागत की तुलना करनी होगी। विनिर्माताओं या आपूर्तिकर्ताओं कई ऐसे उत्पादों का भी इस्तेमाल करते हैं, जिसे उनके बहीखाते में अलग से नहीं दिखाया जाता है, ऐसे में प्रत्येक उत्पाद के लिए कीमत मार्जिन तय करना काफी कठिन होगा।' मुनाफाखोरी-रोधी व्यवस्था तीन स्तरीय प्रक्रिया है। राज्य स्तर की जांच समिति स्थानीय शिकायतों को देखती है, वहीं स्थायी समिति राष्ट्रीय स्तर की शिकायतों का निपटारा करती है जबकि राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण सेेफगार्ड महानिदेशालय से जांच कराने के बाद अंतिम निर्णय लेता है। इस बीच, सरकार मुनाफाखोरी-रोधी शिकायत के लिए आवेदन को सरल बनाने की संभावना तलाश रही है।

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