बिजनेस स्टैंडर्ड - 'जीएसटी के तमाम लाभ, सभी फायदे अभी नजर नहीं आ रहे हैं'
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'जीएसटी के तमाम लाभ, सभी फायदे अभी नजर नहीं आ रहे हैं'

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना /  January 14, 2018

अग्रिम अनुमान के कुछ दिन के बाद यह अंदाज मिला कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर कम होकर 2017-18 में चार साल के न्यूनतम स्तर 6.5 प्रतिशत पर रहेगी। मुख्य अर्थशास्त्री टीसीए अनंत ने दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना से बातचीत में कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि वृद्धि की रफ्तार जारी है। संपादित अंश..

 
आप यह क्यों कह रहे हैं कि 2017-18 के लिए जीडीपी का अग्रिम अनुमान सतर्कतापूर्वक है?
 
मैं सतर्कतापूर्वक शब्द का इस्तेमाल कई संदर्भों में कर रहा हूं। खासकर इस मामले मेंं सांख्यिकीय अनुमान उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। यह अनुमान है क्योंकि साल पूरा नहीं हुआ है। अनुमान लगाने का यह बहुत सतर्कतापूर्ण तरीका है क्योंकि बहुत ज्यादा विश्लेषण व परिदृश्य आधारित अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर हमारा अनुभव है कि यह तरीका बेहतर काम कर रहा है। 
 
क्या 'सतर्कतापूर्वक' शब्द का आशय फिर से कम अनुमान लगाने से है? क्या वास्तविक आंकड़े ज्यादा रहेंगे?
 
यह उच्च या निम्न हो सकता है। ऐसा हर अग्रिम अनुमान के साथ होता है। आकलन का मुख्य दृष्टिकोण यह है कि सभी आंकड़े उपलब्ध हैं। गणना का तरीका पहले से उपलब्ध है। इसमें कल्पना की मात्रा कम है। निश्चित रूप से इसमें कल्पना है, लेकिन वह पहले से ही गणना के तरीके मेंं  शामिल है और उसकी व्याख्या की गई है 
 
क्या जीडीपी वृद्धि निचले स्तर पर है। 
 
मैंने इसके बादे मेंं दूसरे तिमाही आंकड़े जारी होने पर ही कहा था। वह अग्रिम अनुमान में जारी रहा। अन्यथा अग्रिम अनुमान अलग रहा होता। अग्रिम अनुमान का हमारा तरीका पहले से ही वर्णित है। इस तरीके से पता चलता है कि वृद्धि की रफ्तार जारी है और यह बढ़ रही है। इससे यह पता नहीं चलता कि वृद्धि गिरी है। लेकिन सालाना वृद्धि आर्थिक समीक्षा में लगाए गए अनुमान व भारतीय रिजर्व बैंंक के अनुमान की तुलना में अग्रिम अनुमान में कम है। 
 
क्या जीडीपी के अग्रिम अनुमान में इसलिए कमी दिख रही है कि इसके पहले के साल की दूसरी छमाही में नोटबंदी की वजह से इसमें कमी थी और उस आधार पर अनुमान लगाया गया है?
 
यह इतना सरल नहीं है। इसे तैयार करने में पहले के 4 से 5 साल की गति देखी जाती है और पहली छमाही या 7 महीनों की स्थिति देखी जाती है, जिसका इस्तेमाल शेष बचे महीनों का अनुमान लगाने में होता है। यह सिर्फ पहले साल की समान अवधि के मुताबिक नहींं तैयार किया जाता है, क्योंकि इससे बहुत उतार चढ़ाव वाला आंकड़ा आ सकता है। 
 
आंकड़ों से ऐसा लगता है कि दूसरी छमाही में भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का असर बना हुआ है। क्या आप ऐसा मानते हैं?
 
हम दूसरी छमाही मेंं जो देख रहे हैं वह वृद्धि की रफ्तार है, जो हमने पहली और दूसरी तिमाही में देखी है। जीएसटी का कम अवधि के लिए दो असर है।  एक राजस्व प्रक्रिया पर है। जीएसटी परिषद की ओर से कई बयान जारी किए गए हैं जिससे इसे सरलता से लागू किया जा सके। जीएसटी के बार राजस्व चिंता की वजह है। दूसरा असर लोगों पर है, जो अपने व्यवहार में कर भुगतान को ला रहे हैं। अब यहां दो बाते हैं। एक यह कि जीएसटी लागू होने के पहले वृद्धि सुस्त रहने की क्या वजह थी। जो लोग कर भुगतान करते हैं उनके लिए कई फायदे हैं। प्रक्रिया सरल हुई है और कई कर से एक कर का दौर आया है। इससे उत्पादन में कुशलता आएगी और इसका पूरा असर अभी नहीं दिख रहा है। समय के साथ इसका असर नजर आएगा। 
 
क्या आपको लगता है कि जीएसटी का असर अभी भी दिख रहा है, जब विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 2017-18 में इसके पहले साल के 7.9 प्रतिशत से गिरकर 4.6 प्रतिशत रह गया है?
 
किसी भी दिए गए साल मेंं विनिर्माण का अनुमान कई चीजों से प्रभावित होता है। पेशेवर अर्थशास्त्री और सांख्यिकीविद के रूप में मैं इसके सरलीकरण करने की कवायद से खुश नहीं हूं। पहली तिमाही में जीएसटी की वृद्धि में कमी भी एक वजह है। निश्चित रूप से कई वजहे हैं, जिनमें घरेलू और विदेशी दोनों वजहें शामिल हैं, जो विनिर्माण को प्रभावित कर रही हैं। 
 
आपने पहले कहा था कि तीसरी तिमाही व उसके बाद से भंडारण वृद्धि बढ़ेगी। बहरहाल 2017-18 के अग्रिम अनुमान में पहले साल की तुलना में वृद्धि बहुत कम दिखाई गई है। मौजूदा और स्थिर दोनों ही कीमतों पर यह हुआ है?
 
लेकिन आपके पास अभी तीसरी तिमाही के आंकड़े नहीं हैं। इस समय हमारे पास सिर्फ दूसरी तिमाही के आंकड़े हैं। मैंने यह भी कहा था कि पहली तिमाही में मंदी की वजह यह भी है कि कारोबारी अपना भंडारण घटा रहे हैं, और वे जीएसटी के पहले का स्टॉक नहीं रखना चाहते। जब हम दूसरी तिमाही के आंकड़े देखते हैं तो भंडारण बहाल हो गया था। इसलिए मैने कहा था कि ऐसा नहींं लगता है, जैसा आंकड़ों मेंं आ रहा है। उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा त्योहारी मौसम की मांगों को पूरा करने के लिए है। इस तरह से स्टॉक बनाना दीर्घावधि कवायद है। 
 
अग्रिम अनुमान से पता चलता है कि सकल स्थिर पूंजी सृजन 2016-17 के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर 2017-18 में 4.5 प्रतिशत हो गया है। वहींं दूसरी तरफ इसी अवधि में सरकारकी व्यय 20.8 प्रतिशत से गिरकर 4.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। क्या इसका मतलब है कि निजी निवेश की बहाली शुरू हो गई है?
 
यह जरूरी नहीं है। आपको सरकार के व्यय के घटकों को देखना होगा, जो फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। यह  साल के आखिर तक उपलब्ध होगा। 
Keyword: GDP, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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