बिजनेस स्टैंडर्ड - अब मुनाफाखोरी की शिकायत होगी आसान
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अब मुनाफाखोरी की शिकायत होगी आसान

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 01 07, 2018

मौजूदा फॉर्म में हैं कई पेचीदगियां

फॉर्म को बनाया जा रहा है आसान, स्थायी समिति देगी सुझाव

बिजनेस स्टैंडर्ड अब मुनाफाखोरी की शिकायत होगी आसानवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत करों में कटौती का फायदा ग्राहकों को नहीं दे रही कंपनियों के खिलाफ आम उपभोक्ता अब आसाानी से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकार मुनाफाखोरी संबंधी शिकायत फॉर्म को आसान बनाने पर विचार कर रही है। मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण के अध्यक्ष बी एन शर्मा ने स्थायी समिति से फॉर्म को आसान बनाने के बारे में सुझाव देने को कहा है। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'हम समझते हैं कि मौजूदा फॉर्म आम आदमी के लिए थोड़ा जटिल है। हम इसे सरल बना रहे हैं।इस बीच लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए कर अधिकारियों की मदद ले सकते हैं।' 

मुनाफाखोरी की शिकायत के मौजूदा फॉर्म में उपभोक्ताओं को कई तरह ही जानकारियां देनी पड़ती है। इनमें बिक्री कीमत (जीएसटी से पहले और जीएसटी के बाद), कर (जीएसटी से पहले और जीएसटी के बाद), इनपुट क्रेडिट की जानकारी शामिल है। इसलिए एक आम आदमी के लिए यह शिकायत करना लगभग नामुमकिन है। इतना ही नहीं, इसके लिए कंपनी की जीएसटी पहचान संख्या और उत्पाद का 6 अंकों का एचएसएन कोड भी देना पड़ता है। अलग-अलग सामान या सेवा की मुनाफाखोरी की शिकायत के लिए अलग-अलग आवेदन भरने पड़ते हैं, जो बड़ा उबाऊ काम है।

मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण को अब तक 169 शिकायतें मिली हैं, जिनमें कहा गया है कि कंपनी या आपूर्तिकर्ता ने सामान या सेवा पर जीएसटी का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं दिया है। राजस्व विभाग की जांच शाखा रक्षोपाय महानिदेशालय ने पिरामिड इन्फ्राटेक, होंडा मोटर व्हीकल्स, शॉपिंग आउटलेट लाइफस्टाइल इंटरनैशनल और हार्डकैसल रेस्टोरेंट्स और मैकडॉनल्ड्स की प्रमुख फ्रैं चाइजी को जीएसटी का फायदा अंतिम उपभोक्ता को नहीं पहुंचाने के मामले में नोटिस भेजे हैं। महानिदेशालय ने इन कंपनियों को पिछले एक साल का लेखा जोखा सौंपने को कहा है। 

जीएसटी के तहत मुनाफाखोरी रोधी व्यवस्था त्रिस्तरीय है। स्थानीय शिकायतों के लिए राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी और राष्ट्रीय स्तर की शिकायतों की जांच के लिए स्टैंडिंग कमेटी है। जांच का जिम्मा रक्षोपाय महानिदेशालय के पास है जबकि फैसला लेने का अधिकार राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण को है।  पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन ने कहा कि निश्चित रूप से उपभोक्ताओं के लिए फॉर्म को सरल बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'अगर प्रथम दृष्टïया मामल बनता है तो फिर संबंधित कंपनियों से विस्तृत ब्योरा मांगा जा सकता है। जांच करने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने की जरूरत है जिसमें कंपनियों से जानकारी मांगने की मौजूदा व्यवस्था भी शामिल है।' 

मुनाफाखोरी रोधी नियमों के मुताबिक कीमतों में कमी के मुताबिक इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा उपभोक्ता को मिलना चाहिए। उद्योग संस्था सीआईआई की दलील थी कि यह परिभाषा स्पष्टï नहीं है। उसने उद्योग के लिए मुनाफाखोरी रोधी दिशानिर्देशों को स्पष्ट करने की मांग की है क्योंकि मौजूदा व्यवस्था से छोटी कंपनियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। सीआईआई का कहना है कि अनुपालन की जटिल प्रक्रिया भी एक चुनौती है। सरकार को कर लाभ का निर्धारण करने के लिए हर उत्पाद की जीएसटी से पहले और जीएसटी के बाद की कीमत का अंतर निकालना होगा।

यह भी संभव है कि विनिर्माता कंपनी या आपूर्तिकर्ता कई उत्पादों का कारोबार करते हों जिन्हें खातों में अलग-अलग दर्ज नहीं किया गया हो। ऐसी स्थिति में हर उत्पाद की कीमत का अंतर निकालना मुश्किल होगा।  ईवाई के विपिन सपरा ने कहा, 'शिकायत फॉर्म को सरल बनाने से आम आदमी के लिए शिकायत करना आसान होगा। लेकिन सरकार को किसी शिकायत पर जांच शुरू करने से पहले इसका प्राथमिक सत्यापन करना चाहिए ताकि उद्योग को अनावश्यक परेशानी न हो।'

Keyword: फॉर्म, स्थायी समिति, जीएसटी, कर कटौती, ग्राहक, उपभोक्‍ता, मुनाफाखोरी, इनपुट क्रेडिट,
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