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नए साल में कैसे रखें अपने निवेश की लय और ताल

संजय कुमार सिंह /  January 07, 2018

नए साल का पहला महीना शुरू हो गया है। लिहाजा निवेशकों के लिए अब अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा की जरूरत आ गई है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली योजनाएं या श्रेणियां हर साल बदलती रहती हैं। वर्ष 2017 में जिन योजनाओं का प्रदर्शन अच्छा रहा है, वे अब और महंगी हो गई होंगी। इसलिए उनके साथ जोखिम भी बढ़ गया होगा।  ऐसी स्थिति में निवेशकों को इन योजनाओं से निवेश निकालकर (मुनाफावूसली कर) उन परिसंपत्तियों में डालना चाहिए, जिनका मूल्यांकन कम रहा है। ïवर्ष 2018 में निवेशकों को अपनी रकम इक्विटी से निकालकर सावधि जमा जैसी फिक्स्ड इनकम योजनाओं और सोने में निवेश करना चाहिए।

 
इक्विटी
 
शेयरों में निवेश जरूर कम करें, लेकिन यह पहले से तय स्तर पर किया जाना चाहिए क्योंकि आर्थिक विकास में तेजी आने के साथ ही शेयरों में उछाल आने की मजबूत संभावनाएं हैं। रिलायंस म्युचुअल फंड में वरिष्ठ फंड प्रबंधक अश्विनी कुमार कहते हैं, 'अधोसंरचना क्षेत्र में परियोजनाओं पर अमल में तेजी, निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में सुधार और निर्यात वृद्धि से अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज होगी।' शेयरखान में हेड-एडवाइजरी, हेमांग जानी के अनुसार वर्ष 2018-19 में सेंसेक्स की आय वृद्धि 14-15 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
 
पिछले साल शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव कम रहा है, इसलिए शेयरों में गिरावट के लिए तैयार रहें। पश्चिमी देशों के केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरें बढ़ाने से ऐसा हो सकता है। वर्ष 2017 में मझोले और छोटे फंडों का प्रदर्शन लार्ज-कैप फंडों के मुकाबले बेहतर रहा है। हालांकि मझोले और छोटे फंडों का मूल्यांकन बहुत ज्यादा बढ़ गया है। कुमार कहते हैं, 'बड़े आकार के फंडों में मूल्यांकन अपेक्षाकृत वाजिब स्तर पर है। इनमें कम उतार-चढ़ाव के कारण इनसे बेहतर रिटर्न के आसार हैं।' कुमार का कहना है कि निवेशकों को अपना दो तिहाई इक्विटी पोर्टफोलियो लार्ज-कैप फंडों में रखना चाहिए। 
 
डेट म्युचुअल फंड 
 
वर्ष 2017 में कम अवधि के फंडों का प्रदर्शन दीर्घ अवधि के फंडों के मुकाबले मजबूत रहा है। दिसंबर तक के तीन महीनों के दौरान 10 साल की अवधि के बॉन्ड पर प्राप्तियां 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 7.22 प्रतिशत हो गई हैं, जिससे दीर्घ अवधि वाले फंडों के प्रदर्शन पर असर पड़ा है। बेंचमार्क प्राप्तियों में तेजी के पीछे कई वजह रही हैं। सुंदरम म्युचुअल फंड में नियत आय के मुख्य निवेश अधिकारी द्विजेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं, 'भारतीय रिजर्व बैंक ने अपना रुख अनुकूल से तटस्थ कर लिया है। कच्चे तेल की कीमतें बढऩे के साथ ही चालू खाते के घाटे में इजाफे का अंदेशा भी बढ़ गया है। कुछ वस्तुओं पर जीएसटी दरें घटने से सरकार की राजकोषीय स्थिति बिगडऩे की आशंका बढ़ गई है।' पश्चिमी देशों के केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति के कारण भारत में डॉलर की आवक पर असर हो सकता है।
 
जिस हिसाब से बाजार उम्मीद कर रहा है अगर उस हिसाब से परिस्थितियां नहीं बदलीं तो 10 साल की अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर प्राप्तियां थोड़ी कम हो सकती हैं। जो फंड कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश करते हैं, उन्होंने अवधि फंडों के मुकाबले बढिय़ा प्रदर्शन किया। इसका एक बड़ा कारण इन फंडों में फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भारी निवेश रहा है, जिससे इनकी कीमतों में गिरावट नहीं आई। कम रेटिंग वाले बॉन्ड में दांव लगाने वाले क्रेडिट ऑपच्र्युनिटीज फंड का भी प्रदर्शन अच्छा रहा। लेकिन निवेशकों को इनमें अपने डेट फंड पोर्टफोलियो का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा निवेश नहीं करना चाहिए क्योंकि इनके साथ ज्यादा जोखिम जुड़ा होता है। इस समय आपके डेट पोर्टफोलियो का 60-70 प्रतिशत हिस्सा छोटी अवधि के फंडों में होना चाहिए। 
 
नियत आय
 
बैंकों की सावधि जमा और डाक घर की लघु बचत योजनाओं पर प्राप्तियां 2018 में खास कम नहीं होंगी। एएसके वेल्थ एडवाइजर्स में पार्टनर एवं हेड-इन्वेस्टमेंट एडइवाइजरी और स्ट्रैटेजी, प्रोडक्ट्स और इंटरनैशनल बिजनेस- सोमनाथ मुखर्जी कहते हैं, 'महंगाई के अनुमान, वैश्विक अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने और मौद्रिक नीति पर आरबीआई के ताजा रुख के बाद मोटे तौर पर दरें लगभग जस की तस रह सकती हैं।' मुखर्जी ने कहा कि निवेशकों को निश्चित आय वाली योजनाएं जैसे शॉर्ट टर्म डेट फंड, लघु बचत योजनाओं और कर-मुक्त बॉन्ड में निवेश करना चाहिए। उनका मानना है कि बैंकों की सावधि जमा में कराधान के बाद आकर्षक प्रतिफल नहीं मिलता।
 
सोना
 
सोना ने पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक करीब 2.9 प्रतिशत प्रतिफल दिया है। सितंबर तक यह 7 प्रतिशत था। लेकिन अमेरिका में ब्याज दरें बढऩे के अनुमान और कर सुधारों की उम्मीद से कीमतों में कमी आई। सोने में 8 से 12 प्रतिशत तक निवेश करना चाहिए। क्वांटम ऐसेट मैंनेजमेंट कंपनी में वरिष्ठ फंड प्रबंधक - वैकल्पिक निवेश- चिराग मेहता कहते हैं, 'फेडरल रिजर्व के बहीखाते का बोझ घटाने और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के बॉन्ड खरीद कम करने से साल 2018 में नकदी में कमी दिख सकती है। कम नकदी के माहौल में शेयरों का अधिक मूल्यांकन ज्यादा समय बरकरार नहीं रह सकता है। शेयर बाजार के दिन जब खराब होते हैं तो सोना उस समय ऊपर भागता है।' सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड जैसे अधिक बेहतर निवेश साधन अब उपलब्ध हैं, इसलिए उनमें निवेश करना चाहिए। 
 
जीवन बीमा
 
अपनी परिस्थितियों में बदलाव के अनुसार अपने जीवन बीमा का मूल्यांकन करें। प्लान अहेड वेल्थ एडवायजर्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी विशाल धवन कहते हैं, 'अगर आपने नया ऋण लिया है तो अपना कवर बढ़ाएं और अगर पुराना ऋण चुका दिया है तो जीवन बीमा कवर घटा सकते हैं। अगर आपने अपने बच्चे को शिक्षा के लिए विदेश भेजने का फैसला किया है तो अपना बीमा कवर बढ़ा दें। इसी तरह, अगर आपकी पत्नी या पति ने नौकरी छोडऩे का मन बना लिया है तो तो भी कवर बढ़ा दीजिए। अपने बीमा कवर की लागत देखिए और अगर कम प्रीमियम वाली पॉलिसी मिल जाए तो ले तीजिए। अगर आपने यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान लिया है तो बेंचर्माक के मुकाबले उनके प्रदर्शन की समीक्षा करें और इक्विटी से डेट की दिशा में पोर्टफोलियो में बदलाव करें।'
 
स्वास्थ्य बीमा
 
स्वास्थ्य संबंधी खर्च 12 से 15 प्रतिशत अधिक महंगा होता जाता है। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस में हेड-प्रोडक्ट डेवलपमेंट- पुनीत साहनी कहते हैं, 'अगर आपने पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा नहीं ले रखा है तो इसे बढ़ाइए। अगर बीमा के तहत परिवार के नए सदस्य को शामिल करना चाहते हैं तो वह भी करें। बढ़ती उम्र के साथ टॉप-अप कवर लेने पर भी विचार करें।'
 
पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन
 
हर साल खत्म होते-होते पोर्टफोलियो में उन निवेश योजनाओं में आवंटन बढ़ जाता है, जिनका प्रदर्शन अच्छा रहता है। वर्ष 2017 में मझोले और छोटे फं डों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इस साल में वहां से कुछ निवेश निकालकर फिक्स्ड इनकम और सोने में लगाएं। अंत में पोर्टफोलियो व्यय की भी पड़ताल करें। धवन कहते हैं,'बाजार जब दमदार होता है तो निवेशक व्यय पर ध्यान नहीं देते हैं। अगर किसी योजना पर मोटा व्यय हो रहा है तो उससे निकल जाएं। 
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