बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्ज घटना और एडीएजी शेयरों का उछलना
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कर्ज घटना और एडीएजी शेयरों का उछलना

हंसिनी कार्तिक /  January 07, 2018

अपनी पुरानी रंगत खो देने वाले अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) समूह के शेयरों में पिछले कुछ दिनों में खासी हलचल देखने को मिली है। मुश्किलों में फंसी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को रिलायंस जियो का सहारा मिलने के बाद एडीएजी समूह के दूसरे शेयरों की भी किस्मत खुल गई है। पिछले साल मध्य दिसंबर से आरकॉम के शेयर में लगभग 182 प्रतिशत की तेजी आई है। उस समय ऐसी चर्चाएं गर्म थीं कि कर्ज कम करने के लिए आरकॉम अंतत: अपनी संपत्तियां बेचने का रास्ता चुनेगी। 

 
वास्तव में दूरसंचार कंपनी ने बड़े पैमाने पर अपना पुनर्गठन किया। इससे यह पक्का हुआ कि कर्जदाताओं को अपने कर्ज पर नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। पहले ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि आर कॉम के कर्जदताओं को कुछ नुकसान उठाना पड़ सकता है। आरकॉम ने अपनी दूरसंचार परिसंपत्तियां रिलायंस जियो को 25,000 करोड़ रुपये में बेच दी। परिस्थितियां जिस तरह से बदलीं, उनसे एडीएजी शेयर एक पखवाड़े से भी कम समय में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। कर्ज से दबी कंपनियां खासकर रिलायंस नैवल का शेयर 18 दिसंबर 2017 के बाद अब तक 66 प्रतिशत तक चढ़ चुका है। हाल में ही सूचीबद्ध हुई रिलायंस होम फाइनैंस को छोड़कर समूह के दूसरे शेयरों को भी फायदा हुआ है। कुल मिलाकर समूह की 7 सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य 23,886 करोड़ रुपये बढ़ गया जबकि गैर-प्रवर्तकों को 95,00 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। क्या शेयरों में तेजी एडीएजी समूह की कंपनियों के दिन फिरने का संकेत है? समूह की जिन कंपनियों पर कर्ज का भारी बोझ है, उनको आरकॉम की ऋण पुनर्संचना से लाभ हो सकता है, क्योंकि अब उन्हें बैंकों से सौदेबाजी करने में अधिक आसानी होगी। एक बाजार विशेषज्ञ ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया, 'ऋण पुनर्संरचना योजना की घोषणा करते समय अनिल अंबानी का यह आश्वासन देना कि उनके समूह की दूसरी कंपनियों को आरकॉम जैसी स्थितियों का सामना नहीं करना होगा, एक तरह से समूह के निवेशकों और ऋणदाताओं को भरोसा देना था। 
 
कुछ दिनों पहले रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भी मुंबई में अपना एकीकृत बिजली कारोबार अंदाणी ट्रांसमिशन को बेचने के सौदे की घोषणा की थी। दोनों कंपनियों के बीच यह सौदा 13,000 करोड़ रुपये में हुआ था। इस सौदे में बिजली उत्पादन, वितरण और संप्रेषण का कारोबार शामिल है। इस तरह, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर भी मोटे तौर पर कर्ज मुक्त हो जाएगी और इसे इसका लाभ मिलेगा। कंपनी को अपनी इंजीनियरिंग प्रॉक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) परियोजनाओं के लिए कार्यशील पूंजी प्रतिस्पर्धी दर पर मिल सकती है। जानकारों का कहना है कि रिलायंस निप्पॉन लाइफ के शेयरों में तेजी भी वाजिब है क्योंकि हाल की घटनाओं से इसका ब्रांड मजबूत हो सकता है। इससे कंपनी को बॉन्ड बाजार का लाभ अधिक आसानी से उठा सकती है।  
 
हालांकि अहम सवाल यह है कि क्या ये सारी बातें इन शेयरों में नया निवेश करने के लिए काफी हैं? विशेषज्ञों की राय इस पर अलग-अलग है। आईआईएफएल के कार्यकारी उपाध्यक्ष संजय भसीन और इक्विनॉमिक्स ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोक्कालिंगम मानते हैं शेयरों में नए निवेश किए जा सकते हैं, जबकि कुछ दूसरे विशेषज्ञों की राय में मौजूदा तेजी अस्थायी हो सकती है। एक विशेषज्ञ ने कहा, 'इस समय छोटे एवं मझोले शेयर किसी भी सकारात्मक समाचार के प्रति प्रतिक्रिया दिखा रहे हैं और एडीएजी शेयरों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है।' उन्होंने कहा कि एडीएजी शेयरों को अपनी पुरानी रंगत हासिल करने के लिए अपने ब्रांड को फिर से मजबूत करना होगा। इस विशेषज्ञ ने कहा कि वह फिलहाल इस तेजी में निवेश की जल्दबाजी नहीं दिखाएंगे। हालांकि भसीन और चोक्कलिंगम का मानना है कि सभी शेयर बुनियादी तौर पर कमजोर नहीं हैं। चोक्कालिंगम ने कहा, 'पहली नजर में रिलायंस निप्पॉन और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर में आई गिरावट तर्कसंगत नहीं थी। अगर आरकॉम संकट का असर दूसरे शेयरों पर पड़ा तो अब हालात सुधरने पर सभी में बराबर तेजी आना जायज है।' चोकालिंगम के लिए रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस निप्पॉन, रिलायंस कैपिटल और रिलायंस पावर निवेश के अच्छे विकल्प है, जबकि रिलायंस नैवल उनकी पसंद नहीं है। भसीन की इस साल की पसंद में रिलायंस पावर भी शामिल है। वह रिलांयस कैपिटल और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर सकारात्मक हैं। 
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