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सरपट दौडऩे को तैयार ऑनलाइन गेमिंग

करण चौधरी और अजय मोदी /  01 05, 2018

सादा ग्राफिक्स और धीमी रफ्तार के गेम्स गुजरे जमाने की बात हो चुके हैं। देश में मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग उद्योग अपना चोला बदल रहा है और जबरदस्त कमाई करने में लगा हुआ है। इस पर चीन के तकनीकी दिग्गज जैक मा से लेकर मंझे हुए निवेशक राकेश झुनझुनवाला तक तमाम बड़े नाम दांव लगा रहे हैं। इसकी धमक इतनी बढ़ गई है कि विराट कोहली और हृतिक रोशन जैसी मशहूर हस्तियां भी अब गेमिंग ब्रांडों की एंबेसडर बनने लगी हैं। गूगल-केपीएमजी ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी, जो बताती है कि स्मार्टफोन की पैठ बढऩे और डिजिटल भुगतान के सुविधाजनक विकल्प मिलने से देश में ऑनलाइन गेम खेलने वालों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और 2021 तक दोगुनी होकर 31 करोड़ तक पहुंच जाएगी। रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में इस कदर तेजी आएगी कि 20 फीसदी सालाना की रफ्तार से बढ़कर 2021 तक यह 100 करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा। रिपोर्ट तो यह भी कहती है कि ग्राहकों से कीमत वसूलने वाली पेड ऐप्लिकेशन पर शीर्ष 100 'फ्रीमियम गेम्स' द्वारा होने वाली कमाई में इसी साल 22 गुना तक इजाफा होने की उम्मीद है।

 
पैसे की बारिश
 
ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया की अव्वल कंपनियों में नजारा टेक्नोलॉजिज शामिल है, जिसका आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी आना है। कंपनी की बागडोर प्रबंध निदेशक नीतीश मित्रसेन के हाथों में है। कंपनी ने केवल दो हफ्तों में ही संपत्ति प्रबंधन कंपनी इंडिया इन्फोलाइन फाइनैंस लिमिटेड (आईआईएफएल) के स्पेशल अपॉच्र्युनिटीज फंड और झुनझुनवाला से 550 करोड़ रुपये जुटा लिए थे। झुनझुनवाला ने इसकी मामूली हिस्सेदारी 180 करोड़ रुपये में खरीदी है। नजारा के मुख्य कार्याधिकारी मनीष अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल गेमिंग उद्योग में राजस्व यानी कमाई के तीन प्रमुख मॉडल हैं। उन्होंने कहा, 'कोई भी गेमिंग कंपनी ग्राहकों से मिलने वाले शुल्क (सबस्क्रिप्शन), ऐप के जरिये खरीदारी और विज्ञापन के जरिये कमाई करती है। मोबाइल गेमिंग तभी कामयाब है, जब गेम खेलने वाला उसमें डूब जाए और उससे जुड़ा भी रहे। सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें किसी भी उम्र के लोग खेल सकते हैं। भारत में स्मार्टफोन आने से गेमिंग उद्योग और भी तेजी से फैलता जा रहा है।'
 
नजारा अगले वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपये का करोपरांत मुनाफा कमाना चाहती है। फिलहाल उसके सबसे लोकप्रिय खेल 'छोटा भीम' की बिक्री से ही उसे सबस्क्रिप्शन शुल्क के तौर पर 550 करोड़ रुपये से ज्यादा हासिल हो चुके हैं और उसका करोपरांत मुनाफा 66 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। कंपनी 61 देशों में कारोबार करती है और उसके पास विराट कोहली, हृतिक रोशन, कार्टून चरित्र छोटा भीम और आईपीएल की क्रिकेट टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर आदि पर मोबाइल गेम बनाने के लाइसेंसी अधिकार हैं। हर महीने उसके पास करीब 1 करोड़ सक्रिय गेमर रहते हैं। कंपनी जल्द ही आईपीओ भी लाना चाहती है।
 
अलीबाबा भी तैयार
 
इस क्षेत्र में संभावनाएं देखकर अलीबाबा समूह ने भी पिछले जुलाई में यहां दस्तक दे दी। उसने मोबाइल वॉलेट कंपनी पेटीएम के साथ पहला औपचारिक संयुक्त उपक्रम बनाने का ऐलान किया, जिसके तहत एक ऑनलाइन गेमिंग कंपनी की बुनियाद डाली जाएगी। इसमें पेटीएम की 55 फीसदी हिस्सेदारी होगी और बाकी हिस्सा अलीबाबा की हॉन्गकॉन्ग स्थित निजी कंपनी एजीटेक मीडिया के पास होगी। अलीबाबा समूह ने इसे 'पहला महत्त्वपूर्ण रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय विस्तार' तक बता दिया। संयुक्त उपक्रम के लिए पेटीएम ने पेटीएम होल्डिंग के तहत नई कंपनी पेटीएम ग्रुप बना दी। कंपनी ने कहा, 'अलीबाबा समूह को उम्मीद है कि इस साझे उपक्रम के जरिये वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश में तेजी से बढ़ रहे मोबाइल मनोरंजन बाजार की संभावनाओं का फायदा उठाएगा।'
 
दूसरे भी पीछे नहीं
 
पिछले कुछ महीनों में दिल्ली की ऑनलाइन गेमिंग स्टार्ट-अप कंपनी 9स्टैक्स ने करीब 15.5 लाख डॉलर की बीज पूंजी हासिल की है। स्मैश और पैशन गेमिंग जैसी स्टार्टअप भी रकम जुटा चुकी हैं। स्मैश के पास 38 लाख डॉलर और पैशन गेमिंग के पास 37 लाख डॉलर की रकम है। यू2पिया मोबाइल भी है, जिसने हाल ही में रीक्रियो नाम का प्लेटफॉर्म शुरू किया है। यह प्लेटफॉर्म तमाम तरह के खेल ढूंढने की सुविधा मुहैया कराता है। रीक्रियो के ग्राहकों को ब्राउजर से चलने वाले 500 से अधिक गेम हासिल करने का मौका मिलता है। गेमिंग की दुनिया में पहली बार आने वालों को भी इस प्लेटफॉर्म से बहुत मदद मिलेगी। यू2पिया मोबाइल के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक सुमेश मेनन ने कहा, 'भारत के लोग गेमिंग को हाथोहाथ ले रहे हैं। जो पहली बार गेम खेलने आते हैं, हम उनकी मदद करते हैं और उन्हें खेल की सामग्री मुहैया कराते हैं।' लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बैंडविड्थ की सुस्त रफ्तार हो या हैंडसेट का गेम के अनुकूल नहीं होना या भुगतान के तरीकों तक पहुंचने में मुश्किल आना, तमाम ऐसी कठिनाई हैं, जो गेमिंग के विस्तार में बाधा बन रही हैं।
Keyword: online, game,,
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