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एसएफआईओ 57 संदिग्ध मुखौटा कंपनियों की जांच करेगा

वीणा मणि / नई दिल्ली 01 02, 2018

बैंकों से मांगा संदिग्ध कंपनियों की जमाओं का ब्यौरा

कंपनी मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टीगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) से कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशकों द्वारा दी गई रिपोर्टों के आधार पर 57 संदिग्ध मुखौटा कंपनियों की जांच करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि इन इकाइयों ने नोटबंदी के बाद की अवधि में 1 अरब डॉलर से अधिक की रकम और अन्य 39 ने 25 करोड़ रुपये से लेकर 1 अरब रुपये के बीच रकम जमा कराई।  मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'इस जांच का आदेश कंपनीज ऐक्ट की धारा 216 के तहत दिया गया है जिसमें सरकार उन लोगों की तलाश के लिए जांच का आदेश दे सकती है जिन्हें किसी कंपनी के वित्तीय लेनदेन से फायदा हुआ हो।'

अधिकारी ने कहा कि उन्होंने बैंकों से सभी संदिग्ध मुखौटा कंपनियों द्वारा जमाओं का व्यापक ब्यौरा मांगा है। उन्होंने कहा, 'सभी बैंकों ने हमें यह विवरण मुहैया नहीं कराया है। इनमें को-ऑपरेटिव और ग्रामीण बैंक शामिल हैं।' 13 बैंकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 8 नवंबर (जब नोटबंदी की घोषणा की गई) से 31 दिसंबर 2016 तक की अवधि के बीच 45 अरब रुपये (4500 करोड़ रुपये) जमा किए गए और निकाले गए। 300 से अधिक खातों के संबंध में कई कंपनियां जांच के दायरे में आ गई हैं। मंत्रालय ने 1505 कंपनियों मुखौटा कंपनियां करार देते हुए जांच के लिए विभिन्न आरओसी के पास भेजा। शुरुआती जांच के बाद मामले अब एसएफआईओ के पास भेजे जा सकते हैं।

इन कंपनियों के अलावा, 331 अन्य को बाजार नियामक सेबी द्वारा अलर्ट के दायरे में शामिल किया गया। एमसीए ने उन 809 सूचीबद्ध कंपनियों की भी पहचान की है जिनका कोई अता-पता नहीं है और उनके कार्यालयों और निदेशकों के संबंध में जांच के लिए इनके नाम सेबी को भेजे हैं।

सरकार द्वारा मुखौटा कंपनियों के साथ कथित तौर पर काम करने वाले लगभग 300,000 निदेशकों को अयोग्य घोषित करने के लिए उनकी पहचान पहले ही की जा चुकी है। एमसीए ने राज्य सरकारों से ऐसी कंपनियों के स्वामित्व वाली कंपनियों की पहचान करने और इन्हें जिला कलेक्टर्स की नियंत्रण में रखने को भी कहा है। मुखौटा कंपनियों का पर्दाफाश नोटबंदी के बाद असामान्य ढंग से लेनदेन और ऑडिट रिपोर्टों की अनियमित फाइलिंग की खबरें मिलने जाने के बाद शुरू हुआ।  मुखौटा कंपनियां अक्सर ऐसी कॉरपोरेट इकाइयां होती हैं जो सक्रिय रूप से व्यावसायिक परिचालन नहीं करती हैं। सरकार का मानना है कि इन कंपनियों  का इस्तेमाल कालेधन, कर चोरी और अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

Keyword: MCA, SFIO, ROC,,
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