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कोयले की मांग 2022 तक स्थिर रहने के आसार : आईईए

ज्योति मुकुल / नई दिल्ली December 31, 2017

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की वार्षिक कोयला बाजार रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से 2022 के बीच कोयले की वैश्विक मांग लगभग स्थिर बनी रहेगी, इस प्रकार कोयले की खपत में एक दशक के दौरान स्थिरता देखने को मिलेगी। पिछले वर्ष वैश्विक कोयला खपत 1.9 प्रतिशत गिरकर कोयला समतुल्य के 5,3570 लाख टन (एमटीसीई) पर पहुंच गई। गिरावट का यह दूसरा वर्ष था। 'कोल 2017' के अुनसार, कम गैस मूल्य, नवीकरणीय ऊर्जा में वृद्घि और ऊर्जा क्षमता में सुधार की वजह से ऐसा हुआ।
 
वर्ष 2016 में चीन, संयुक्त राज्य और यूरोपीय संघ में कोयले की मांग में कमी आई, जबकि भारत और दक्षिणपूर्व एशिया के कई भागों में मांग में वृद्घि हुई और फिलहाल मांग में कमी आने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। उदाहरण के लिए, नवीकरणीय ऊर्जा में तीव्र वृद्धि होने के बावजूद, भारत के कोयला-आधारित बिजली उत्पादन में वर्ष 2022 तक लगभग चार प्रतिशत की वार्षिक वृद्घि होने की उम्मीद है।   आईईए का कहना है, जहां वैश्विक कोयला बाजार के लिए भारत की भूमिका में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, वहीं चीन इसमें अग्रणी रहेगा। चीन में कोयले की मांग की संभावना सीमित है, लेकिन वहां आने वाले वर्षों में कोयले की कीमत के निर्धारण के लिए आपूर्ति के मोर्च पर सुधार मुख्य कारक होगा। इस बीच, यूरोपीय संघ जो कि मौजूदा समय में कोयले की वैश्विक मांग की केवल छह फीसदी खपत करती है, तेजी से अपने यहां इसकी मांग में कमी लाने के लिए तैयार है। पिछले दो वर्षों से कोयले की मांग 4.2 प्रतिशत की कमी पर टिकी है, यह 1990 के शुरुआती वर्षों की याद दिलाती है, जो 40 वर्ष पहले आईईए द्वारा आंकड़े जुटाने की शुरुआत के बाद के इतिहास में सबसे बड़ी गिरावट है। वर्ष 2022 तक कोयले की वैश्विक मांग 5,530 एमटीसीई तक पहुंचने के आसार है, जो औसतन पिछले पांच वर्षों की खपत के बराबर है। इस प्रकार यह कोयले के उपयोग में एक दशक की स्थिरता दर्शाती है।
 
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