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किसानों के साथ कंपनियों को भी काट रहा कपास का कीड़ा

सुशील मिश्र / मुंबई 12 27, 2017

महाराष्ट्र में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के कारण कपास की फसल को हुए नुकसान और किसानों की आत्महत्या के चलते लगातार हमले झेल रही सरकार अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना बना चुकी है। सरकार ने कपास बीज कंपनियों और इन बीजों की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।  कपास बीजों की जांच के लिए सरकार ने बीज बेचने वाली कंपनियों तथा विक्रेताओं के यहां छापेमारी की कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत आज भी कुछ कंपनियों और डीलरों के यहां छापेमारी की गई तथा नमूने एकत्र किए गए। महाराष्ट्र सहित देश के सभी कपास उत्पादक क्षेत्रों में कपास की फसल पर पिंक बॉलवर्म नामक कीट का हमला हुआ है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र में हुआ है। विदर्भ में इस कीट के कारण 50 फीसदी से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचा है। यवतमाल, वर्धा और जालना में कपास की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। किसान फसल बरबाद होने की वजह नकली बीज और खराब कीटनाशक दवा को मान रहे हैं जिसकी शिकायत भी दर्ज कराई गई है। कपास की फसल बरबाद होने का मुद्दा महाराष्ट्र विधानसभा में गूंजता रहा जिसके बाद सरकार ने कार्रवाई करने की बात कही थी। राज्य विधानसभा के बाद यह मुद्दा लोकसभा में भी उठा। राकांपा सांसद सुप्रिया सुले और शिवसेना सांसद प्रकाश जाधव ने बीटी कॉटन के खराब बीज के कारण कपास की खड़ी फसल पर पिंक बॉलवर्म से हुए नुकसान का मुद्दा संसद में उठाया और किसानों को मुआवजा व कंपनियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। 
 
महाराष्ट्र कृषि विभाग के गुणवत्ता जांच करने वाले अधिकारियों और पुलिस विभाग ने मिलकर मंगलवार को करीब 10 जगह छापेमारी की थी। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस महीने अभी तक करीब 20 विक्रेताओं के यहां छापेमारी की गई है और नमूने लिए जा रहे हैं। यह कार्रवाई पूरे राज्य में की जाएगी तथा नमूने की जांच होगी। इसी महीने यवतमाल जिले में बीज कंपनी मोनसैंटो के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई थी। मोनसैंटों के साथ पांच अन्य कंपनियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इनमें अजीत बीड्स प्राइवेट लिमिटेड, अंकुर बीड्स प्राइवेट लिमिटेड, नुजेइवेदु बीड्स लिमिडेट, कावेरी बीयर लिमिटेड और रसिल बीड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। दो सप्ताह पहले राज्य सरकार ने कई कंपनियों और उनके विक्रेताओं के यहां छापेमारी की थी। 
 
कृषि विभाग की तरफ से कल मुख्य रूप से यवतमाल, वर्धा और जालना में छापेमारी की गई जबकि इसके पहले बुलढाणा और जालना में छापेमारी करके बीज के नमूने लिए गए थे। जिन कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है उनका कहना है कि उनके पास अभी तक कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है। मोनसैंटों कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि अभी तक हमें अधिकारिक प्रति नहीं मिली है। अधिकारिक प्रति देखने के बाद हम अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एफएसआईआई) का कहना है कि वह भी किसानों से संपर्क कर रहे हैं और अभी तक सैकड़ों किसानों से मिल चुके हैं। महाराष्ट्र में कुल 42 लाख हेक्टेयर रकबे में कपास की खेती होती है जिसमें 18 जिलों में 20.36 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल पिंक बॉलवर्म ने नष्ट कर दी है। इसके कारण 15,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। 
Keyword: cotton, कपास बुआई,
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