बिजनेस स?टैंडर?ड - आईपीएल से पैसा बटोरने की तैयारी
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आईपीएल से पैसा बटोरने की तैयारी

सुरजीत दास गुप्ता /  12 25, 2017

भारत में घरेलू क्रिकेट की तस्वीर बदल देने वाला और एक से बढ़कर एक युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम को देने वाला इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट का ऐसा टूर्नामेंट है जो हर तरह की चकाचौंध को अपनी ओर आकर्षित करता है। महज 40 ओवरों के मैच वाले इस टूर्नामेंट में जिस तरह मोटा पैसा झोंका जा रहा है, उससे इसके अगले संस्करण के और भी धमाकेदार होने की उम्मीद है।

 
इस टूर्नामेंट में कई टीमें तो पहले ही अपनी धाक जमा चुकी हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी टीमें हैं, जो कागज पर मजबूत दिखने के बावजूद मैदान पर मनचाहा करिश्मा नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में अपनी टीमों को सशक्त बनाने के लिए फ्रैंचाइजी मालिक अगली नीलामी में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को खरीदने की रणनीति बना रहे हैं। खिलाडिय़ों की अदलाबदली बहुत जटिल होने जा रही है। खिलाडिय़ों को टीम में बरकरार रखने के नियमों में भारी बदलाव किए गए हैं। इससे साफ है कि 60 दिन के इस टूर्नामेंट का रोमांच किसी भी समय कम नहीं होगा। नए कलेवर और फ्लेवर से वीआईपी लाउंज में कॉकटेल में नया तड़का लगेगा जहां छक्कों के रूप में गेंद बार-बार पहुंचती है। साथ ही इस अनौपचारिक बातचीत से नए गठजोड़ भी बनेंगे। स्टेडियमों में शोरगुल बढऩे और घरों में टेलीविजन पर ज्यादा दर्शक जुटने से क्रिकेट में और पैसा बढ़ता है। खेल के प्यार में अब कारोबार के बारे में भी बात कर ली जाए।
 
आईपीएल की कुछ टीमों पर तो लगातार पैसा बरस रहा है लेकिन सभी के लिए ऐसी स्थिति नहीं है। मगर आईपीएल के अगले संस्करण में यह स्थिति बदलने वाली है। स्टार इंडिया ने टूर्नामेंट के प्रसारण अधिकारों  के लिए जो भारी भरकम बोली लगाई है, उससे उन टीमों के भी दिन फिर जाएंगे जो अभी तक घाटे में चल रही थीं। स्टार इंडिया ने 16,347 करोड़ रुपये में आईपीएल के वैश्विक मीडिया अधिकार खरीदे हैं। इससे पहले ये अधिकार एक दशक से सोनी के पास थे। अब स्टार को अगले 5 साल तक आईपीएल के टेलीविजन और डिजिटल मीडिया अधिकार मिल गए हैं। पिछले संस्करण में सोनी प्रत्येक मैच पर 17 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी जबकि स्टार हरेक मैच पर 55 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
 
इसका मतलब यह है कि आईपीएल के केंद्रीय राजस्व में बढ़ोतरी होगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) इस राशि का आधा हिस्सा आठ फ्रैंचाइजी टीमों के साथ साझा करता है। इसके अलावा मीडिया अधिकारों और मुख्य प्रायोजन से मिली राशि का भी बंटवारा होता है। वीवो ने अगले पांच साल तक आईपीएल का मुख्य प्रायोजक बने रहने के लिए 2,199 करोड़ रुपये चुकाए हैं। इससे भी टूर्नामेंट के राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली डेयरडेविल्स के मुख्य कार्याधिकारी हेमंत दुआ के मुताबिक टीम को 100 से 120 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। उन्होंने कहा, 'हम सभी ने पिछले 10 वर्षों में भारी निवेश किया है। अगले 5 साल इस निवेश पर रिटर्न का समय होगा।' औसतन सबसे निचले दर्जे की टीमों की बैलेंस शीट में उतार-चढ़ाव आता रहा है। यह सालाना 20-30 करोड़ रुपये के मुनाफे से 10-20 करोड़ रुपये के नुकसान के बीच झूलता रहा है। दुआ कहते हैं, 'अब हर टीम अच्छा पैसा बना सकती है और अपने नुकसान की भरपाई कर सकती है।'
 
कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) के मुख्य कार्याधिकारी वेंकी मैसूर भी दुआ से सहमत हैं। आईपीएल में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली टीमों में से एक केकेआर के अगले संस्करण में 350 करोड़ रुपये से अधिक कमाई करने की उम्मीद है। मैसूर कहते हैं, 'हम एबिटा मार्जिन के बढऩे की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हमें केंद्रीय राजस्व से कम से कम 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।'
 
टीमों को फायदा देने के लिए नियमों में एक और बदलाव किया गया है। अब उन्हें आईपीएल में हिस्सा लेने के लिए सत्र से पहले दी जाने वाली फीस का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। यह फीस सालाना करीब 330 करोड़ रुपये थी। अलग-अलग टीमों को अलग-अलग फीस चुकानी पड़ती थी। मुंबई इंडियंस सर्वाधिक फीस देती थी। इसके बजाय राजस्व साझा करने का नया मॉडल अपनाया गया है। अब हर टीम अपने राजस्व का 20 फीसदी बीसीसीआई को देगी। राजस्व में टीम का केंद्रीय राजस्व, टीम प्रायोजन और टिकटों की बिक्री से हुई आय शामिल है।
 
दुआ कहते हैं कि यह बराबरी का मॉडल है और सभी के लिए फायदेमंद है। अगर किसी टीम का राजस्व बढ़ता है तो बीसीसीआई को भी उस तय सालाना फीस की तुलना में ज्यादा फायदा होगा जो वह पिछले 10 साल में लेता था। खिलाडिय़ों को भी इसका फायदा देने का फैसला किया गया है। आईपीएल संचालन परिषद की हाल में हुई बैठक में खिलाडिय़ों को खरीदने के लिए टीमों के पर्स को बढ़ा दिया गया है। पिछले सत्र में कोई टीम खिलाडिय़ों को खरीदने पर अधिकतम 66 करोड़ रुपये खर्च कर सकती थी। अगले सत्र के लिए इसे बढ़ाकर 80 करोड़ रुपये, 2019 के लिए 82 करोड़ रुपये और 2020 के लिए 85 करोड़ रुपये कर दिया गया। अगर किसी खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है (अनकैप्ड) तो उसे आईपीएल की किसी टीम से खेलने के लिए न्यूनतम 20 लाख रुपये मिलेंगे। पहले ऐसे खिलाडिय़ों का न्यूनतम आरक्षित मूल्य 10 लाख रुपये था। अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके खिलाड़ी (कैप्ड) को भी अब न्यूनतम 30 लाख रुपये के बजाय 50 लाख रुपये मिलेंगे। नीलामी से पहले यह देखना भी दिचलस्प होगा कि टीमें अपने स्टार खिलाडिय़ों को कैसे बरकरार रखती हैं। हर फ्रैंचाइजी अपने पिछले साल की टीम से अधिकतम 5 खिलाडिय़ों को बरकरार रख सकती है। हर टीम अधिकतम 3 कैप्ड खिलाड़ी (नीलामी के लिए रखे गए 80 करोड़ में से 33 करोड़ रुपये तक खर्च करके), दो अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी और दो विदेशी खिलाड़ी को बरकरार रख सकती है।
 
अगर आप हर घंटे कमाई के हिसाब से देखें तो इस टूर्नामेंट में खेलने वाले खिलाड़ी दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एथलीट बन सकते हैं। टूर्नामेंट में हर खिलाड़ी अधिकतम 14 मैच खेल सकता है। पिछले संस्करण में युवराज सिंह ने दिल्ली डेयरडेविल्स की तरफ से खेलते हुए 16 करोड़ रुपये कमाए थे। 3 घंटे के खेल में उन्होंने हर घंटे 40 लाख रुपये की कमाई की। आरक्षित मूल्य में बढ़ोतरी और नीलामी में किसी टीम के अधिकतम खर्च को देखें तो करीब 200 खिलाडिय़ों की कमाई इससे ज्यादा होगी।
 
नीलामी में उतरने वाले गैर आरक्षित खिलाडिय़ों में से स्टार खिलाडिय़ों की सबसे ज्यादा चांदी होगी। टीम प्रबंधकों के मुताबिक नीलामी की कुल राशि में से करीब 75 फीसदी राशि 25 फीसदी खिलाडिय़ों को खरीदने पर खर्च होगी। इन स्टार खिलाडिय़ों के औसत वेतन में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्घि होगी। बाकी 150 खिलाडिय़ों का सालाना औसत वेतन भी पहली बार एक करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगा। दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड की झोली में भी बहुत पैसा आएगा।
 
स्टार इंडिया की भारी भरकम बोली के कारण बीसीसीआई को अलग संस्करण में 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी। टीमों का राजस्व बढऩे से बोर्ड की कमाई और बढ़ेगी। लेकिन स्टार इंडिया के लिए आगे कठिन चुनौती है। कंपनी 16,347 करोड़ रुपये की बोली को मुनाफे में बदलने की रणनीति बनाने में जुटी है। अगर कंपनी चाहती है आईपीएल के दौरान 10 सेकंड के विज्ञापन के लिए विज्ञापनदाता दिल खोलकर खर्च करें तो उसे टेलीविजन और डिजिटल मीडिया पर भारी संख्या में दर्शकों को जुटाना होगा। मीडिया अधिकार खरीदने वाली कंपनी इनिशिएटिव के वरिष्ठï उपाध्यक्ष वेंकटसुब्रमण्यन रामचंद्रन ने कहा, 'आईपीएल में विज्ञापन देने के लिए विज्ञापनदाता अतिरिक्त पैसा देने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं। वे या तो ज्यादा पैसे खर्च करेंगे या फिर सालाना खर्च को प्राथमिकता देंगे।'
 
स्टार टीवी इंडिया के प्रबंध निदेशक संजय गुप्ता एक आक्रामक रणनीति के साथ तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'पहली बार किसी एक ही कंपनी के पास आईपीएल के डिजिटल और टेलीविजन अधिकार हैं। हम विज्ञापनदाताओं को ऐसा प्लेटफॉर्म देंगे जिसकी पहुंच बहुत व्यापक होगी, जो निर्बाध चलेगा और उनके पैसे की पूरी कीमत वसूल होगी। उन्हें अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलेगा।'
 
कंपनी टेलीविजन और डिजिटल दर्शकों की संख्या में 40 फीसदी बढ़ोतरी के लिए काम करेगी। पिछले सत्र में यह संख्या 41.1 करोड़ थी जिसे अगले साल 55 से 58 करोड़ किया जाएगा। साथ ही दोनों प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के जुड़े रहने का समय 260 अरब मिनट से बढ़ाकर 350 से 360 अरब मिनट किया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि कोई भी अन्य आयोजन विज्ञापनदाताओं को एक सप्ताह में 30 करोड़ दर्शकों से जुडऩे की सुविधा नहीं देता है।
 
स्टार की यह योजना कुछ ज्यादा ही महत्वाकांक्षी लगती है क्योंकि देश में 78 करोड़ लोग टेलीविजन देखते हैं। लेकिन इसके पीछे कंपनी की अपनी दलील है। गुप्ता कहते हैं कि देश के उत्तर, पश्चिम और पूर्वी क्षेत्र में आईपीएल का दबदबा है लेकिन दक्षिण में अभी इसे रफ्तार पकडऩी है। इससे विज्ञापनदाताओं के पास एक बड़ा मौका है। दर्शकों को स्थानीय भाषा का विकल्प देना अभी तक समस्या रही है। लेकिन स्टार ने इसका तोड़ निकाल दिया है। कंपनी स्टार स्पोट्र्स को कन्नड, तेलुगु और बांग्ला में शुरू करने की योजना है। तमिल चैनल की शुरुआत हो चुकी है। स्टार का डिजिटल ब्रांड हॉटस्टार स्थानीय भाषाओं के विकल्प के साथ टूर्नामेंट का प्रसारण करेगा।
 
मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस एजेंसी मोगी मीडिया के अध्यक्ष संदीप गोयल ने कहा, 'सोनी की तुलना में स्टार की दक्षिण भारत में व्यापक पहुंच है। इसी से दर्शकों की संख्या में 20 से 25 फीसदी इजाफा हो जाएगा जो विज्ञापनदाताओं के लिए विशुद्घ बोनस होगा।' पिछले संस्करण में मैचों के सीधे प्रसारण की तुलना में हॉटस्टार पर 5 मिनट की देरी से प्रसारण किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा इसलिये किया गया ताकि टेलीविजन के दर्शक डिजिटल का रुख न करें। डिजिटल मीडिया की व्यापक पहुंच के बावजूद टेलीविजन स्क्रीन का आकर्षण कम नहीं हुआ है। हॉटस्टार के दर्शकों में अधिकांश ऐसे हैं जो विकल्प के तौर पर इसका इस्तेमाल करते हैं। देश में 95 फीसदी घरों में एक ही टेलीविजन सेट है। इस बार हॉटस्टार बिना किसी देरी के सीधे प्रसारण करेगा। स्टार को उम्मीद है कि इससे डिजिटल दर्शकों की संख्या दोगुनी होकर 20 करोड़ पहुंच जाएगी।
 
टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के साथ आने से विज्ञापनदाताओं को बहुत फायदा होगा क्योंकि इससे वे संभावित खरीदारों के और करीब पहुंच जाएंगे। टेलीविजन की तुलना में डिजिटल मीडिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह दोतरफा माध्यम है। उदाहरण के लिए टेलीविजन पर कोई कार निर्माता कंपनी अपने नए मॉडल का विज्ञापन कर सकती है लेकिन हॉटस्टार पर कोई संभावित उपभोक्ता आईपीएल देखते हुए टेस्ट ड्राइव बुक करा सकता है। 
 
गुप्ता इस बात को स्वीकार करते हैं कि कंपनी तत्काल मुनाफा कमाने की उम्मीद नहीं करती है। न घाटा और न मुनाफे की स्थिति पर पहुंचने के लिए स्टार को टेलीविजन और डिजिटल विज्ञापन से सालाना 3,000 करोड़ रुपये कमाने होंगे। यह पिछले साल की कमाई से दोगुना से ज्यादा है। स्टार के सूत्रों का कहना है कि कंपनी पहले साल दोनों प्लेटफॉर्मों से पिछले साल के 1,400 करोड़ रुपये की तुलना में कम से कम 1,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसमें सदस्यता राजस्व की लागत का हिस्सा भी शामिल होगा जो करीब 500 करोड़ रुपये है और पहले साल इसके बढऩे की उम्मीद नहीं है। 
 
गोयल कहते हैं, 'निश्चित रूप से विज्ञापन की दरें बढऩे जा रही हैं। मेरा व्यक्तिगत अनुमान है कि टेलीविजन विज्ञापन की दर 50-60 फीसदी बढ़ेगी जो स्मार्ट कदम होगा। वैसे इसमें बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है।' लेकिन देश के एक प्रमुख प्रसारक कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'आईपीएल में विज्ञापन की दरों में नाटकीय बदलाव नहीं होगा। दुनियाभर में खेल कंपनियां केवल विज्ञापन से ही नहीं बल्कि सदस्यता राजस्व में बढ़ोतरी करके कमाई करती हैं। यही एक समस्या है।'
 
स्टार के दांव से देश में विज्ञापनों पर होने वाले खर्च में भी बदलाव होगा। 2018 में टेलीविजन और डिजिटल विज्ञापन पर 28,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की संभावना है जिसमें से 8 फीसदी से अधिक आईपीएल की झोली में गिर सकता है।  अभी टेलीविजन पर विज्ञापनों से आने वाले राजस्व का 27 फीसदी हिस्सा हिंदी मनोरंजन चैनलों को जाता है। आईपीएल में स्टार की सफलता से मनोरंजन से खेलों की तरफ झुकाव में नाटकीय बदलाव आ सकता है। गुप्ता का अनुमान है कि अगले 5 साल में विज्ञापन राजस्व में खेलों की भागीदारी 8 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी हो जाएगी। अलबत्ता कई लोग उनसे सहमत नहीं होंगे। खेल अभी शुरू हुआ है।
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