बिजनेस स्टैंडर्ड - उर्वरक सब्सिडी बढऩे के आसार
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उर्वरक सब्सिडी बढऩे के आसार

दिलीप कुमार झा / मुंबई 12 25, 2017

कच्चे माल की कीमतों में तेज इजाफे और भविष्य में भी बढऩे के पूर्वानुमान से सरकार पर उर्वरक सब्सिडी में वृद्धि करने का दबाव बढऩे के आसार हैं। चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में प्राकृतिक गैस की लागत 17.5 प्रतिशत तक बढ़कर (सरकार हर छह महीने में कीमतों में संशोधन करती है) 2.89/एमबीटीयू हो गई है, जो अप्रैल-सितंबर की पहली छमाही में 2.46/एमबीटीयू थी। सरकार ने कहा है कि कच्चे तेल के दामों में तीव्र वृद्धि के कारण ऐसा हुआ है। पहली छमाही में इसके दाम 52.71 डॉलर प्रति बैरल से 22 प्रतिशत बढ़कर 64.37 डॉलर प्रति बैरल हो चुके हैं।
 
उर्वरक को सस्ता बनाने के लिए सरकार विनिर्माताओं को सब्सिडी प्रदान करती है। सरकार अगले साल तक इसे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के जरिये सीधे किसानों के खाते में स्थानांतरित करना चाहती है। हालांकि, इससे पहले सरकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये के बकाये को पूरा करने की योजना बना रही है। भुगतान में देरी से कंपनियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है, जिससे उनकी वित्तीय लागत और लाभ पर असर पड़ता है।
 
केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि प्राकृतिक गैस की लागत में 17.5 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई और कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि के कारण इसके और बढऩे की संभावना है। इससे उर्वरक विनिर्माताओं की उत्पादन लागत में वृद्धि होगी और सरकार पर सब्सिडी के लिए भी दबाव पड़ेगा। हालांकि, केयर रेटिंग्स का एक अध्ययन उर्वरक आयात नीति में लगातार परिवर्तन के कारण सरकारी सब्सिडी में वृद्धि की मात्रा का उल्लेख नहीं करता है। यूरिया संयंत्रों की नई क्षमता जोड़ी जाने और निष्क्रिय पड़े पुराने संयंत्रों को पुन: क्रियाशील करने से भारत न केवल यूरिया आयात खत्म करने का लक्ष्य हासिल कर सकता है, बल्कि भविष्य में 2030 तक संभवत: निर्यातक भी बन सकता है।
 
अभी तक वित्त वर्ष 18 में यूरिया का उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रहा है। आयात में भी गिरावट आई। मिट्टïी का स्वास्थ्य कार्ड योजना के बेहतर क्रियान्वयन की वजह से यूरिया की खपत में गिरावट का संकेत मिलता है। इस योजना का लक्ष्य मिट्टïी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम (एनपीके) स्तर को 4:2:1 के आदर्श अनुपात में लाना है, जो वर्तमान में 6.8:2.7.1 के स्तर पर है।
 
इस बीच, देश भर के विभिन्न स्थानों पर पांच निष्क्रिय संयंत्रों को पुन: क्रियाशील करने के सरकार के फैसले से भारत काउर्वरक उत्पादन बढऩे की संभावना है। प्रति वर्ष 12.7 लाख टन की क्षमता वाला नया अमोनिया-यूरिया संयंत्र स्थापित करते हुए ऐसा किया जा रहा है। इन संयंत्रों की शुरूआत से देशी यूरिया उत्पादन में विशेष वृद्धि की उम्मीद की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप आयात में काफी कमी होगी।
 
भारत का यूरिया उत्पादन वित्त वर्ष 2013 से लेकर वित्त वर्ष 2015 तक 1.7 प्रतिशत सीएजीआर की स्थिर दर से बढ़ रहा है। कुल उर्वरक उत्पादन में देशी यूरिया का हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत रहता है, जबकि यूरिया आयात में गिरावट आ रही है। वित्त वर्ष 17 में आयात निर्भरता 26.3 फीसदी से घट कर 18.5 फीसदी पर आ गई। भारत में इस साल यूरिया उत्पादन में मामूली गिरावट आई है।
Keyword: fertilizer, agri, आधुनिक मशीन, किसान, कृषि उपकरण,,
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