बिजनेस स्टैंडर्ड - मारुति सुजूकी का शेयर 14 साल में हुआ 10 हजार रुपये का
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मारुति सुजूकी का शेयर 14 साल में हुआ 10 हजार रुपये का

पुनीत वाधवा /  December 24, 2017

अगर आप उन लोगों में शुमार हैं, जिनको मारुति सुजूकी के शेयरों के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में शेयर मिल गए थे और आपने अभी तक अपने शेयर नहीं बेचे हैं तो अब आपका एक शेयर ही करीब 10 हजार रुपये का हो गया है। यानी इसने अभी तक लगभग 8,000 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है। अगर किसी को उस समय 5,000 रुपये लगाने पर 40 शेयर भी मिले होंगे तो अब उसके वे शेयर उसे मारुति का कोई भी नया वाहन दिला सकते हैं। 

 
वर्ष 2003 में सरकार मारुति सुजूकी (तब मारुति इंडस्ट्रीज लिमिटेड) का आईपीओ लाई थी और इसकी 25 प्रतिशत हिस्सेदारी 125 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेच दी थी। शेयर ने 9 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत की थी और पहले दिन ही इसमें निर्गम मूल्य के मुकाबले करीब 32 प्रतिशत तेजी दर्ज की गई। तो क्या वाहन बाजार के इस दिग्गज पर दांव लगाना चाहिए? हालांकि इसका मूल्यांकन अब काफी महंगा हो गया है। फिर भी ज्यादातर विश्लेषक इसे लेकर उत्साहित हैं। 
 
पिछले हफ्ते कंपनी का शेयर बीएसई में कारोबार के दौरान 10,000 रुपये का आंकड़ा पार कर गया था, हालांकि यह कारोबार समाप्त होने पर 9,738 के स्तर पर बंद हुआ। शेयरों में जबरदस्त उछाल के साथ ही कंपनी का बाजार पूंजीकरण (करीब 3 लाख करोड़ रुपये) हो गया और वह पांचवीं सबसे बड़ी मूल्यवान कंपनी बन गई है। इस तरह, बाजार पूंजीकरण के मामले में कंपनी अब केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेस, एचडीएफसी बैंक और आईटीसी से पीछे रह गई है। मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के अनुसार मारुति 2012-2017 के दौरान संपत्ति सृजित करने वाली शीर्ष 10 कंपनियों में एक हो गई है। विश्लेषकों के दमदार आकलन से यही लगता है कि आने वाले समय में भी मारुति का शेयर फर्राटा भर सकता है। 
 
1981 में स्थापित मारुति के लिए सरकार ने सुजकी मोटर कॉर्पोरेशन को संयुक्त उद्यम साझेदार के तौर पर चुना था। 1983 में कंपनी की पहली सस्ती कार मारुति 800 (796 सीसी इंजन क्षमता वाली हैचबैक) सड़कों पर आई। तब से ग्राहकों की बढ़ती मांग के मद्देनजर कंपनी ने विभिन्न श्रेणियों में कई मॉडल उतारे हैं। मारुति ग्राहकों की जरूरत के अनुसार अपने मॉडल उतारती रही है। इनमें बेहतर तकनीक के साथ कम कीमतें भी काम करती है। यही वजह है कि बाजार में उसकी मजबूत पकड़ बरकरार है। इस समय कंपनी की घरेलू यात्री वाहन बाजार में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। मारुति इस समय ऑल्टो 800, ऑल्टो के 10, ए-स्टार, एस्टिलो, वैगनआर, रिट्ज, स्विफ्ट, स्विफ्ट डिजायर, एसएक्स4, ईको, ग्रांड विटारा, ब्रीजा और अर्टिगा जैसे मॉडलों की बिक्री कर रही है। इनमें कई मॉडल अपनी श्रेणियों में अग्रणी हैं। 
 
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज में शोध प्रमुख गौतम दुग्गड कहते हैं, 'मारुति का अर्श पर पहुंचना पिछले कई सालों से भारत में बढ़ते उपभोक्तावाद का एक शानदार उदारहण है। कंपनी ने पिछले कई सालों में बाजार हिस्सदारी पर कब्जा जमाया है। आने वाले समय में भी कंपनी के लिए खास चुनौतियां नहीं हैं। उत्पादों में विविध मॉडल, संयंत्रों की क्षमता, मजबूत बिक्री एवं विपणन तंत्र और हर जगह पहुंच रखने के मामले में मारुति का कोई सानी  नहीं है। लंबे समय से ये खूबियां कंपनी के आगे बढऩे में सहायक रही हैं।' उसकी बिक्री और मुनाफे में भी खासी तेजी आई है। कैपिटालाइन डेटा के अनुसार 2003-04 के 9,155 करोड़ रुपये से समेकित शुद्ध बिक्री 16.7 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है। करोपरांत मुनाफा भी 561 करोड़ रुपये से 22 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर पर बढ़कर 7,511 करोड़ रुपये हो गया है। 
 
आगे की राह
 
ऊं चे आधार और 1.1 अरब डॉलर से अधिक मुनाफे के बावजूद कंपनी मजबूत कारोबार के बूते अपनी आय में जबरदस्त इजाफा कर सकती है। विकसित देशों की तुलना में भारत में यात्री वाहनों की पहुंच कम है और आने वाले समय में लोगों की आय बढऩे का लाभ मारुति को मिलना चाहिए। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों के अनुसार 2020 में कंपनी 1,18,224 करोड़ रुपये की कुल बिक्री करेगी और इससे उसे करीब 12,760 करोड़ रुपये का करोपरांत मुनाफा मिल सकता है। इसके अनुसार मारुति के सालाना वाहन वित्त वर्ष 2017 के 15.7 लाख से 22.2 लाख पहुंचने की उम्मीद है। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट में कहा गया है, 'वाहन उद्योग लंबे समय की शिथिलता के बाद अब तेजी पकडऩे लगा है। इसके अलावा प्रतिस्पद्र्धा बहुत तगड़ी नहीं है। इससे मारुति के लिए रास्ता बिल्कुल साफ  लग रहा है। आय में मजबूत वृद्धि को देखते हुए कंपनी के शेयर का दमदार प्रदर्शन जारी रह सकता है।'
 
बाजार में तेजी का दौर यूं ही बना रहा तो मॉर्गन स्टैनली के अनुसार मारुति का शेयर 14,000 रुपये का स्तर पार कर सकता है। गुजरात के साणंद में अधिक तेजी से क्षमता विस्तार और बाजार में नए मॉडलों की जोरदार बिक्री से ऐसा संभव हो सकता है। वित्त वर्ष 2018 और 2019 में कंपनी के कारोबार में क्रमश: 15 प्रतिशत और 18 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। वैसे ज्यादातर विश्लेषक दीर्घ अवधि में कंपनी की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एक विश्लेषक अभिषेक जैन ने हाल की एक रिपोर्ट में कहा, 'बाजार हिस्सेदारी में तेजी, ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री बढऩे, जापान मुद्रा येन में कम निर्भरता, महंगे मॉडलों की बढ़ती हिस्सेदारी और नकदी की मात्रा बढऩे से मारुति का शेयर लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार करता रह सकता है।' मारुति की मातृ कंपनी जापान की सुजूकी इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार में भी अवसरों का लाभ उठाने के लिए कदम उठा रही  है। मारुति को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।  
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