बिजनेस स्टैंडर्ड - 'स्वास्थ्य उद्योग में स्व नियमन की जरूरत'
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'स्वास्थ्य उद्योग में स्व नियमन की जरूरत'

अजय मोदी और वीणा मणि /  12 22, 2017

हाल में लापरवाही और खामियों के कारण निजी स्वास्थ्य शृंखलाएं आलोचना के घेरे में हैं। उन पर बहुत ज्यादा मुनाफा कमाने के आरोप लगे हैं। फोर्टिस हेल्थकेयर के मुख्य कार्याधिकारी भवदीप सिंह से इस मसले पर अजय मोदी और वीणा मणि ने बात की। प्रमुख अंश...

 
हाल में हुई घटनाओं के बाद कंपनी के भीतर कैसा माहौल है?
 
घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण रहीं। डॉक्टरों को भगवान के रूप में देखा जाता है और ऐसी स्थिति आ गई है कि उनके लिए हत्यारे जैसे शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है। अमेरिका में हाल में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि वहां भारतीय चिकित्सक सबसे बेहतर हैं। लेकिन भारत में हम चाहते हैं कि चिकित्सक जेल में जाएं। यह स्थिति है। मैं अमेरिका में पला बढ़ा और वहां काम करने वाले भारतीय चिकित्सकों व यहां के चिकित्सकों के काम में कोई अंतर नहीं है। 
 
इन घटनाओं का क्या असर होगा?
 
दिल्ली में हुई घटना के अलावा महाराष्ट्र के कल्याण में मरीज की मौत के बाद एक चिकित्सक को बुरी तरह पीटा गया। इस माहौल का असर यह हो रहा है कि पिछले 10 साल से भारत में चिकित्सकोंं का संकट है। ऐसे माहौल में कोई चिकित्सक क्यों काम करना चाहेगा? हमारे यहां पहले से ही बड़े पैमाने पर चिकित्सकों की कमी है। अमेरिका में अस्पताल में होने वाली मौत की 5 वजहों में एक चिकित्सक की लापरवाही है। यहां हम इसके लिए चिकित्सकों को पीटते हैं और उन्हें जेल में डालते हैं। हमारे चिकित्सक कह रहे हैं कि वे अपने बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई न करने की सलाह दे रहे हैं। आज स्थिति यह है कि चिकित्सक गंभीर मरीजों का इलाज करने से कतरा रहे हैं। जैसी घटना मैक्स में हुई, उसी तरह की घटना जून महीने में सफदरजंग अस्पताल में हुई लेकिन उसकी चर्चा कोई नहीं कर रहा है।
 
अस्पतालों के उचित मुनाफे को आप किस रूप में देखते हैं? क्या मुनाफा सीमित किए जाने की जरूरत है? 
 
पिछले साल फोर्टिस को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। लालच इसे कहते हैं कि जब आपका 100 करोड़ मुनाफा हो और 200 करोड़ रुपये बनाना चाहते हों। अगर आपका कर चुकाने के बाद 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और चाहते हैं कि नुकसान 80 करोड़ रुपये हो जाए तो यह लालच नहीं है। यह जिंदा रहने की जरूरत है। हेल्थकेयर उतना मुनाफे का कारोबार नहीं है, जितना माना जाता है। सरकारी फार्मेसी उसी सामान पर 500 प्रतिशत मुुनाफा कमा रही हैं और उस पर कोई चर्चा नहीं करता। अगर सरकार मुनाफे पर बंदिश लगाना चाहती है तो वह इस विकल्प को चुन सकती है। अगर हेल्थकेयर क्षेत्र से मुनाफा नहीं होगा तो कोई इसमें निवेश करना नहीं चाहेगा। निवेश के बगैर तकनीकी उन्नयन सक्षम नहीं है। नए अस्पताल में एक बेड पर 1.3 से 1.5 करोड़ रुपये की लागत आती है। इसका मतलब है कि 200 बेड वाले अस्पताल में 200 करोड़ रुपये निवेश की जरूरत होगी। अगर इससे सालाना 40-50 करोड़ रुपये का मुनाफा न हो तो निवेश का कोई मतलब नहीं बनता।
 
क्या चिकित्सकों को सर्जरी आदि का लक्ष्य दिया जाता है? 
 
हमने अपने चिकित्सकों से इस तरह की बातचीत कभी नहीं की। मैं यह भी नहीं देखता कि वे कितने मरीज का उपचार करते हैं। हम की गई हर सर्जरी पर नजर रखते हैं, लेकिन यह फैसला चिकित्सक को करना होता है कि सर्जरी करने की जरूरत है या नहीं। ब्रांड के प्रचार के लिए हमारी अलग टीम है। हमें चिकित्सकों से ऐसा कराने की जरूरत नहीं है। 
 
उद्योग से गलत कहां हो रहा है?
 
हमें स्वनियमन या निगरानी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। हमें कुछ क्षमता और सीमाएं तय करनी होंगी। फोर्टिस द्वारा छूट पर या मुफ्त इलाज करने पर कोई बात नहींं कर रहा है। 2000 के बाद से फोर्टिस ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुफ्त या छूट पर इलाज किया है। आद्या के मामले में टीम को जब लगा कि उसे लंबे उपचार की जरूरत है तो कम खर्चीली दवाएं दी गईं। हम पर अब भी ज्यादा खर्चीली दवाएं देने का आरोप लगाया जा रहा है। हमें अपनी बात बेहतर ढंग से पहुंचाना सीखने जरूरत है। 
 
अस्पतालों, मरीजों और सरकार के बीच विश्वास का संकट है?
 
दुर्भाग्य से यह एक दुष्चक्र है और हर तरफ से विश्वास का संकट है। इसे खत्म करने में समय लगेगा। हम एक साथ मिलकर काम करने के लिए कदम उठा रहे हैं। जिस तरह से उद्योग मिल जुलकर काम करता है, वैसा हमने नहीं किया। 
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