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2जी में सभी निर्दोष करार... उलझते तार

साहिल मक्कड़ / नई दिल्ली 12 22, 2017

2जी के उलझते तार

समूचे देश में तहलका मचाने वाले और राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल लाने वाले 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में आज पूर्व संचार मंत्री ए राजा समेत सभी अभियुक्त बरी कर दिए गए। विशेष अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) किसी भी अभियुक्त के खिलाफ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, षड्यंत्र और काले धन को सफेद बनाने के आरोप सिद्घ नहीं कर पाए।

मामले में एस्सार समूह के प्रवर्तक रवि कांत रुइया और अंशुमान रुइया, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्घार्थ बेहुरा, राजा के पूर्व निजी सचिव आरके चंदोलिया, स्वान टेलीकॉम के प्रवर्तक शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के तीन शीर्ष अधिकारी भी अभियुक्त थे। ये सब भी बरी हो गए। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने खचाखच भरी अदालत में फैसला सुनाया और कहा, 'ऐसी कोई सामग्री मौजूद नहीं है, जो यह दिखाए कि ए राजा इस मामले में प्रमुख षड्यंत्रकारी थे। किसी गलत कार्य, षड्यंत्र अथवा भ्रष्टाचार में उनके लिप्त होने के भी प्रमाण नहीं हैं।' 

अदालत ने राज्यसभा सदस्य कनिमोई और उनकी सौतेली मां दयालु अम्माल को भी धनशोधन के मामले में बरी कर दिया। कनिमोई तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता एम करुणानिधि की पुत्री हैं। इस फैसले से तमिलनाडु में द्रमुक की स्थिति मजबूत हो सकती है। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरने के बाद 2014 के लोकसभा चुनावों में बुरी तरह पटखनी खाकर सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस को भी इस फैसले से फायदा हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर यह आरोप लगाती रही है कि अपने कार्यकाल के दौरान वह इस लूटपाट को चुपचाप देखते रहे। लेकिन आज के फैसले के बाद सिंह ने कहा, 'मुझे खुशी है कि अदालत ने स्पष्टï रूप से कह दिया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के खिलाफ किया गया भारी दुष्प्रचार पूरी तरह निराधार था।' सीबीआई ने 21 अक्टूबर, 2009 को अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी निकायों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच शुरू की थी। 

सीबीआई का मामला नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पर आधारित था, जिसकी कमान विनोद राय के हाथ में थी। सीएजी की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि संप्रग सरकार द्वारा 122 स्पेक्ट्रम लाइसेंसों का आवंटन मनमाने ढंग से किए जाने के कारण सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का 'अनुमानित' घाटा हुआ है।

सीएजी की रिपोर्ट के बाद भाजपा सड़कों पर उतर गई और उसने संप्रग सरकार के कार्यकाल में संसद का आखिरी सत्र चलने ही नहीं दिया। भाजपा ने मनमोहन सिंह सरकार के मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को ही अपने चुनाव अभियान के केंद्र में रखा। राजनीतिक विश्लेषक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवनी के लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने संवाद समिति पीटीआई से कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह बड़ी असहज स्थिति है -उनका पूरा अभियान खरबों के इस घोटाले के आरोपों पर ही बुना गया था और इस बात पर आधारित था कि पिछली सरकार भ्रष्ट थी।' 

हालांकि फैसला आने के बाद भाजपा ने सहज दिखने की कोशिश करते हुए कहा कि कांग्रेस इस फैसले को अपने लिए तमगा न माने, लेकिन उसके नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने आरोप लगाया कि सरकारी अभियोजकों ने अदालत में मुकदमा गंभीरता के साथ नहीं लड़ा। विशेष न्यायाधीश सैनी ने भी सीबीआई और दूरसंचार विभाग को जमकर लताड़ा। उन्होंने कहा, 'नीतियों और दिशानिर्देशों में स्पष्टïता नहीं होने से भी भ्रम बढ़ा। दिशानिर्देश इतनी तकनीकी भाषा में गढ़े गए हैं कि दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को भी कई शब्दों के अर्थ नहीं पता... किसी ने भी दूरसंचार विभाग के बयानों पर यकीन नहीं किया और हर किसी को बड़ा घोटाला दिखा, जबकि घोटाला था ही नहीं। इस वजह से लोगों को बड़ा घोटाला लगने लगा। यानी कुछ लोगों ने चुनिंदा तथ्यों को जानबूझकर एक खास क्रम में रखा और बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताया। इस तरह उन्होंने घोटाला पैदा कर दिया।'

सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया था कि राजा ने अपने निजी सचिव आरके चंदोलिया और पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्घार्थ बेहुरा के साथ मिलकर यूनिटेक लिमिटेड के संजय चंद्रा और स्वान टेलीकॉम (एतिसलात डीबी) के शाहिद बलवा तथा विनोद गोयनका को स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटित करने की साजिश रची। बलवा के साथियों आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल पर भी एजेंसी ने आरोप लगाया।

उसने रिलायंस एडीएजी के अधिकारियों को दूरसंचार विभाग के सामने गलत तथ्य पेश करने का आरोपी बनाया। कलइनार टीवी के शरद कुमार और कनिमोई को बदले में लाभ प्राप्त करने का आरोपी बनाया गया। सीबीआई ने कहा कि बलवा ने दूरसंचार लाइसेंसों के बदले में शेल कंपनियों के जरिये कलइनार टीवी को 200 करोड़ रुपये दिए।

सैनी ने कहा कि अदालत के सामने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह पता चले कि 'अंतिम तिथि निर्धारित करने, पहले आओ-पहले पाओ नीति से छेड़छाड़ करने, दोहरी प्रौद्योगिकी के लिए आवेदन करने वालों को स्पेक्ट्रम का आवंटन करने, स्वान टेलीकॉम और यूनिटेक समूह की अपात्रता को नजरअंदाज करने, प्रवेश शुल्क में परिवर्तन नहीं करने और अवैध फायदा पहुंचाने के लिए कलईनार टीवी को 200 करोड़ रुपये दिए जाने की गतिविधियां आपराधिक हैं।' 

सीबीआई के न्यायाधीश ने एस्सार समूह के रुइया के साथ ही लूप टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के आईपी खेतान तथा किरण खेतान को भी बरी कर दिया। साथ ही एस्सार समूह के निदेशक विकाश सराफ को भी निर्दोष करार दिया गया। सीबीआई का आरोप था कि रुइया और खेतान ने एकीकृत एक्सेस सेवा लाइसेंस (यूएएसएल) दिशानिर्देशों के अनुच्छेद 8 का उल्लंघन किया है और लूप टेलीकॉम के जरिये नए दूरसंचार लाइसेंसों के लिए आवेदन किया। जिस समय लूप टेलीकॉम को लाइसेंस दिए गए थे, उस समय वोडाफोन एस्सार लिमिटेड (अब वोडाफोन इंडिया लिमिटेड) में रुइया और खेतान की 33 फीसदी हिस्सेदारी थी। यूएएसएल दिशानिर्देशों के अनुच्छेद 8 के अनुसार 'कोई एक कंपनी/विधिक व्यक्ति सीधे अथवा सहयोगियों के जरिये एक ही सेवा क्षेत्र में बेसिक, सेल्युलर और एकीकृत एक्सेस सेवा नाम की एक्सेस सेवाओं के लिए एक से अधिक लाइसेंसशुदा कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी हासिल नहीं करेंगे।'

 
2जी घोटाले का घटनाक्रम 
 
मई 2007 : ए राजा ने  संचार मंत्री के रूप में प्रभार संभाला।
 
अगस्त 2007: दूरसंचार विभाग ने यूनिफाइड एक्सेस सर्विसेस (यूएएस) लाइसेंसों के साथ 2 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन की प्रक्रिया आरंभ की।
 
2 नवंबर, 2007 : तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निष्पक्ष लाइसेंस आवंटन एवं प्रविष्टि शुल्क की उचित समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजा को पत्र लिखा।
 
10 जनवरी, 2008 : दूरसंचार विभाग ने पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर लाइसेंस जारी करने का निर्णय लिया। आवेदन की अंतिम तारीख निर्धारित तिथि से पहले कर 25 सितंबर तय की गई।
 
2009: केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई को 2 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों की जांच का आदेश दिया। 
 
21 अक्टूबर, 2009: सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के अज्ञात अधिकारियों, अज्ञात निजी व्यक्तियों कंपनियों और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। 
 
10 नवंबर, 2010: कैग ने 2जी स्पेक्ट्रम पर सरकार को रिपोर्ट सौंपी, राजस्व को 1.76 लाख करोड़ रुपये की हानि का दावा किया।
 
नवंबर, 2010: राजा ने दूरसंचार मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।
 
2 फरवरी, 2011: सीबीआई ने 2जी मामले में राजा को गिरफ्तार किया। पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव रवींद्र कुमार चंदोलिया को भी गिरफ्तार किया गया।
 
14 मार्च, 2011: दिल्ली उच्च न्यायालय ने विशेष रूप से 2जी मामलों के निपटान के लिए विशेष अदालत का गठन किया।
 
25 अप्रैल, 2011: सीबीआई ने द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि की बेटी एवं सांसद कनीमोई और चार अन्य का नाम भी दूसरे आरोप पत्र में शामिल किया।
 
2 फरवरी, 2012: उच्चतम न्यायालय ए राजा के कार्यकाल में मंजूर किए गए 122 लाइसेंस रद्द किए। चार महीनों में लाइसेंसों की नीलामी के निर्देश दिए।
 
21 दिसंबर, 2017: विशेष अदालत ने सभी तीनों मामलों में राजा समेत सभी आरोपियों को बरी किया। 
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